भारतीय रेलवे की आय में ऐतिहासिक उछाल: कबाड़ बेचकर कमाए ₹6,800 करोड़ से अधिक

भारतीय रेलवे की आय में ऐतिहासिक उछाल: कबाड़ बेचकर कमाए ₹6,800 करोड़ से अधिक

-वार्षिक लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए बनाया नया रिकॉर्ड, गैर-किराया राजस्व में भी दर्ज की 168% की भारी बढ़त

नई दिल्ली, 20 अप्रैल। भारतीय रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन पर एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रेलवे ने पुराने कबाड़ (स्क्रैप) की बिक्री से कुल 6,813.86 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। यह रेल मंत्रालय द्वारा निर्धारित 6,000 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य से लगभग 13.5 प्रतिशत अधिक है। रेलवे द्वारा अनुपयोगी पटरियों, पुराने कोचों और इंजनों की पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रिया के कारण यह सफलता मिली है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब रेलवे ने अपने कबाड़ बिक्री के लक्ष्य को बड़े अंतर से पार किया है।

स्क्रैप की बिक्री के साथ-साथ रेलवे ने ‘गैर-किराया आय’ (NFR) में भी शानदार प्रदर्शन किया है। विज्ञापन, स्टेशन पुनर्विकास और व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय में पिछले पांच वर्षों में करीब 168 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। यह आय वर्ष 2021-22 के 290 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 777.76 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुँच गई है। इस रणनीति से रेलवे को यात्रियों पर टिकट का बोझ डाले बिना अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिली है। इसके लिए प्रीमियम ब्रांडेड आउटलेट्स और डिजिटल सेवाओं को प्रमुख जरिया बनाया गया है।

कबाड़ के इस व्यवस्थित निपटान से रेलवे परिसरों, यार्डों और वर्कशॉप में सालों से दबी हुई बहुमूल्य जगह खाली हुई है, जिससे परिचालन दक्षता और सुरक्षा में सुधार हुआ है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ अभियान के तहत अर्जित इस अतिरिक्त आय का निवेश रेल बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में किया जाएगा। इसमें स्टेशनों का नवीनीकरण, सुरक्षा प्रणालियों को बेहतर बनाना और नई डिजिटल सुविधाएं प्रदान करना शामिल है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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