भारतीय शिप ईरान की आई आर जी सी सेना की गोलिबारी निंदनीय

भारतीय शिप ईरान की आई आर जी सी सेना की गोलिबारी निंदनीय

(लेखक- संजय गोस्वामी)

शनिवार 18 अप्रैल 26 को भारत सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, ईरानी आईआरजीसी ने नौसेना की गनबोटों ने भारतीय ध्वज वाले टैंकरों के पास चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं भारतिय दो टैंकर पर आई आर जी सी ने गोली चला दी भारत ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर दो भारतीय जहाज़ों पर हुई गोलीबारी की घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए देश में ईरान के राजदूत को तलब किया। हालांकि, विदेश मंत्रालय के बयान में समन शब्द का प्रयोग नहीं किया गया, लेकिन यह संकेत दिया गया कि ईरानी राजदूत फाथली को शनिवार शाम जवाहरलाल नेहरू भवन में विदेश सचिव से मिलने के लिए कहा गया था।भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शनिवार (18 अप्रैल) शाम को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली को तलब किया और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी युद्धपोतों द्वारा दो भारतीय जहाजों पर की गई गोलीबारी पर ‘गंभीर चिंता’ जताई है।
ये घटनाएं ऐसे समय हुईं, जब ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया है। यह बंदी अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर यातायात की निरंतर नाकाबंदी के जवाब में की गई है, जबकि तेहरान ने इस सप्ताह की शुरुआत में वाणिज्यिक यातायात के लिए इस मार्ग को खोलने का निर्णय लिया था
वो जो टैंकर था वो तो आप सभी धर्मों के लोगों के लिए था ऐ बहुत ही शर्मनाक घटना है फिर भी यहाँ के लोग उसको सपोर्ट करते हैं गलत है राष्ट्र सर्वोपरि है भारत माता के लिए हमेशा हमें
शनिवार 18 अप्रैल 26 को होरमुज़ जलडमरूमध्य में भारत के झंडे वाले दो जहाजों पर हुई फायरिंग ने ईरान की सत्ता संरचना में बढ़ती दरार को उजागर कर दिया है। यह फायरिंग इस बात को लेकर हुई भ्रम के कारण हुई कि शनिवार को होरमुज़ जलडमरूमध्य खुला था या नहीं। जहाँ एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि सभी जहाज होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुज़र सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब वे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ समन्वय करें, वहीं इसके विदेश मंत्री, अब्बास अराघची ने कहा कि फ़ारस की खाड़ी में यह संकरा रास्ता खुला है, क्योंकि लेबनान में इज़राइल-हिज़्बुल्ला युद्ध के लिए संघर्ष-विराम समझौते पर सहमति बन गई थी। भारत को नेवी शिप भेज कर इसका करारा ज़बाब देना चाहिए भारत 140 करोड़ लोगों का एक लोकतान्त्रिक देश है और भारत ऐसा देश है जो गोली का ज़बाब गोली से देना जानता है भारत के लोग कहीं भी हो अगर हमला हुआ है तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए ईरान में सत्ता संघर्ष हो या कुछ भी ऐ एक आतंकवादी घटना है शिप पर भारत का तिरंगा होगा यदि इसे शक्ति से नहीं लिया गया तो आतंकी का हौसला बढ़ेगा और दुनिया में इसे मज़ाक बनाया जाएगा जिससे भारत की छवि धूमिल होगी जब ईरान की नेवी को अमेरिका के हमले से बचाने के लिए कोच्ची में अपना नेवी शिप भेज कर अमेरिका को अपनी ताकत का अहसास करा सकता है तो ऐसा हमला बर्दास्त नहीं है चाहे क़ोई भी हो भारत को इसका करारा ज़बाब देना चाहिए हम भगवान राम के मार्गदर्शन पर चलने वाले मान और मर्यादा से रहने वाला शांति प्रिय देश है तो हमें अपने लोगों की रक्षा का पूर्ण अधिकार है भारत को इसे गंभीरता से लेकर जबाबी कार्यवाही करना चाहिए अमेरिका क्या कर रहा है नहीं कर रहा है ऐ दो देशों का अंदरूनी मामला है इसमें भारत का क़ोई रोल नहीं है भारत एक शान्तिप्रिय देश है और भारत माँ की रक्षा के लिए मर मिटने वाला देश है ऐ हमला बिल्कुल जायज नहीं है इसपर भारत को कड़ा रुख अपनाना चाहिए ईरान की आबादी 9 करोड़ है और भारत की आबादी 140 करोड़ है इसे यदि हल्के में लिया गया तो परोसी दुश्मन मुल्क मज़ाक उड़ा सकता है क्योंकि उसके जहाज आ रहे हैँ हम अपनी रक्षा के लिए आत्मनिर्भर हैं आतंकी हमला बर्दास्त नहीं है। भारत परमाणु संपन्न देश है और भारतीयों की रक्षा के लिए भारतीय सेना पूरे विश्व में अव्वल है भारतीय सशस्त्र बल भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के प्रबन्धन के अधीन हैं। 14 लाख से अधिक सक्रिय कर्मियों की शक्ति के साथ, यह विश्व की द्वितीय सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है इसलिए भारत को इसका कड़ा जबाब देना चाहिए नहीं तो पाकिस्तान और ईरान दोनों की सीमा सटती है वहाँ से तो आतंकवाद होता रहता है अब यदि धर्म के नाम पर ईरान भी इसी रास्ते चला तो आने वाले समय में आतंकवादी घटना बढ़ेगी लेकिन यहाँ तो एक नारी शक्ति बिल पर राजनीति हो रही जो संसद में पास नहीं हुआ लोकतंत्र है ऐसा होता है इसका सम्मान करना चाहिए हालांकि मुझे भी दुःख है लेकिन अदालत तो संसद के निर्णय को ही सही मानेगी अगर गलत है तो अगले चुनाव में पूर्ण बहुमत दे देना लेकिन राष्ट्र हित में जो निर्णय लिए जाएं वो सही हो इसलिए इस मुद्दे पर कार्यवाही करना चाहिए।

जीवन धूप-छांव है: सुख-दुःख का अनंत चक्र

(लेखक- सुनील कुमार महला)

जीवन वास्तव में धूप-छांव की तरह है-कभी सुख है तो कभी दुःख।कभी सफलता है तो कभी असफलता तो, कभी संघर्ष। वास्तव में, यही परिवर्तन जीवन का स्वाभाविक नियम है। इसलिए अच्छे समय में प्रसन्न रहना चाहिए, पर यह भी स्मरण रहे कि वह स्थायी नहीं है। उसी प्रकार कठिन समय में धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि वह भी एक दिन बीत ही जाता है। जीवन में हर व्यक्ति के सामने अच्छे और बुरे दोनों दौर आते हैं, इसलिए परिस्थितियाँ कैसी भी हों, जीवन में हर समय विनम्रता और संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।
मनुष्य का स्वभाव जल के समान निर्मल, सरल और शांत होना चाहिए-जैसे किसी झील का स्थिर जल। विनम्रता व्यक्ति को ऊँचा बनाती है, क्योंकि अभिमान क्षणिक है, पर नम्रता एक स्थायी गुण है। सुख और दुःख जीवन के दो पहिए हैं, जो समय के साथ घूमते रहते हैं। जैसे धूप के बाद छांव आती है, वैसे ही कठिनाइयों के बाद सुख का समय भी आता है। संसार में कोई भी अवस्था सदा नहीं रहती।
हमें हर परिस्थिति में सृष्टि, ईश्वर या प्रकृति का धन्यवाद करना चाहिए कि जो जीवन मिला है, वह एक अवसर है। संयम, धैर्य और सकारात्मक सोच मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी सहज रहना और शिकायत के स्थान पर स्वीकार का भाव रखना मन को मजबूत बनाता है। जब हम अच्छा सोचते हैं, तो हमारे कर्म भी उसी दिशा में चलते हैं। इसलिए नकारात्मक विचारों, नकारात्मक वातावरण और निराशा फैलाने वाले लोगों से दूरी रखना उचित है।
कर्म ही जीवन का सार है। ईमानदारी से मेहनत करना, अपने कार्य को पूजा मानना और परिणाम को ईश्वर पर छोड़ देना सच्ची जीवन-दृष्टि है। साथ ही मानवता, दया, करुणा और प्रकृति-प्रेम को अपनाना आवश्यक है। किसी को कष्ट देकर कोई भी व्यक्ति सच्चा सुख नहीं पा सकता। जो हम संसार को देते हैं, वही किसी न किसी रूप में लौटकर हमारे पास आता है। इसलिए अच्छा करें, अच्छा सोचें और अच्छा फैलाएँ-यही जीवन का शाश्वत सत्य है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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