आधुनिकता के दौर में हम अपनी संस्कृति से हो रहे हैं दूर: ऊषा मलिक..
आधुनिकता के दौर में हम अपनी संस्कृति से हो रहे हैं दूर: ऊषा मलिक..

सिरसा, । भारतीय संस्कृति के रखरखाव के साथ-साथ त्यौहार पारिवारिक, सामाजिक व राष्ट्रीय एकता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। आधुनिकता के दौर में हम कहीं ना कहीं अपनी संस्कृति से विमुख होते जा रहे हैं, लेकिन त्यौहार हमें अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव को महसूस करवाते हैं। इसलिये हमें हर्षोल्लास से अपने परंपरागत त्यौहारों को मनाने चाहिए। यह बात चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय सिरसा की प्रथम महिला ऊषा मलिक ने विश्वविद्यालय के युवा कल्याण निदेशालय द्वारा तीज महोत्सव में कही।
श्रीमती मलिक ने कहा कि युवाओं के व्यक्तित्व विकास में सांस्कृतिक कार्यक्रम अहम भूमिका अदा करते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से हमें अपनी परंपराओं तथा संस्कृति का ज्ञान होता है और इस प्रकार के कार्यक्रम संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ युवाओं की ऊर्जा को भी चैनेलाइज करने का कार्य करते हैं। उन्होंने हरियाली तीज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं के लिए हरियाली तीज का विशेष महत्व होता है। इस त्योहार पर महिलाएं व्रत रखते हुए सोलह श्रृंगार करके पूजा अर्चना करती हैं। भारत को यदि त्योहारों का देश कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। कार्यक्रम की संयोजिका तथा युवा कल्याण निदेशक डॉ मंजू नेहरा ने बताया कि मेहंदी व उत्सव पकवान प्रतियोगिताओं का भी आयोजन करवाया गया। जिन महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर रखी थी, उन्हें भी सम्मानित किया गया।
दीदार ए हिन्द की रिपोर्ट