परफॉर्मेंस, पॉलिटिक्स और गठबंधन- मोदी 3.0 के विस्तार का नया त्रिकोण
परफॉर्मेंस, पॉलिटिक्स और गठबंधन- मोदी 3.0 के विस्तार का नया त्रिकोण
नई दिल्ली, 24 मई केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी आरंभ हो गई है. चर्चा है कि यह विस्तार केवल चेहरों का बदलाव नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था को नई ऊर्जा देने का प्रयास होगा. इतना ही नहीं इस विस्तार के सहारे हिंदी पट्टी के राज्यों की राजनीतिक समीकरण और 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पंजाब जैसे चुनावी राज्यों के जातीय समीकरणों को साधने का प्रयास भी किया जा सकता है.जानकार बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंत्रिपरिषद की बुलाई गई विशेष बैठक ने उन चर्चाओं को हवा दे दी है कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ यानी 09 जून से ठीक पहले या तुरंत बाद एक बड़े बदलाव के मूड में है.
बताया जा रहा है कि इस संभावित विस्तार के पीछे कई रणनीतिक कारण छिपे हैं. पहला और सबसे महत्वपूर्ण आधार प्रदर्शन आधारित राजनीति है. मोदी सरकार में मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड उनके भविष्य का आधार बनता रहा है. जिन मंत्रालयों में योजनाओं का क्रियान्वयन धीमा रहा है, वहां नेतृत्व परिवर्तन कर प्रधानमंत्री यह संदेश देते रहे हैं कि 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के साथ कोई समझौता नहीं होगा. जबकि दूसरा पहलू राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन का है. आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पंजाब समेत कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं.
ऐसे में भाजपा नेतृत्व की कोशिश होगी कि उन क्षेत्रों और समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए, जो चुनावी गणित में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. क्योंकि 2027 का सबसे बड़ा रण उत्तर प्रदेश है. पिछले लोकसभा चुनावों के सबक को देखते हुए, भाजपा इस विस्तार में उत्तर प्रदेश से पिछड़ा वर्ग और दलित चेहरों को प्रमुखता दे सकती है. यह कोशिश उन समुदायों को फिर से अपने पाले में लाने की है जो लोकसभा चुनाव के समय राजग खेमे से छिटक गए थे. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समीकरण और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छोटे दलों के साथ तालमेल को कैबिनेट के जरिए मजबूती दी जाएगी.
तीसरा बड़ा कारण सहयोगी दलों के साथ समन्वय है. गठबंधन सरकार होने के नाते, सहयोगियों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उन्हें शासन में महत्वपूर्ण भागीदारी देना सरकार की स्थिरता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है. इसलिए उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों के समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है. चर्चा है कि इस फेरबदल में केवल पुराने चेहरों की अदला-बदली नहीं होगी बल्कि कुछ ऐसे नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है जो भविष्य के नेतृत्व के रूप में उभरने की क्षमता रखते हैं.
हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार के समय को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. क्योंकि 17 मई से 15 जून तक अधिक मास है. इसलिए धार्मिक मान्यताओं के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल 15 जून के बाद किया जा सकता है. हालांकि इस बीच गठबंधन सहयोगियों से भी चर्चा होनी है. इसलिए विस्तार को अंतिम रूप देने के पहले आंतरिक राजनीति और वैश्विक उथल-पुथल पर भी सरकार की नजर है
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट