यूएस कांग्रेस सदस्यों ने चेताया, एआई चिप तक चीन की पहुंच अमेरिकी सुरक्षा के लिए बड़ा मुद्दा बन चुकी है
यूएस कांग्रेस सदस्यों ने चेताया, एआई चिप तक चीन की पहुंच अमेरिकी सुरक्षा के लिए बड़ा मुद्दा बन चुकी है

अमेरिका के सांसदों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पूर्व अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब देश की सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। उनका कहना है कि आधुनिक युद्ध, खुफिया तंत्र और आर्थिक ताकत की नींव अब एडवांस्ड एआई चिप्स पर टिकी है।
हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सामने विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाले दस वर्षों में एआई की यह दौड़ तय करेगी कि सैन्य शक्ति में आगे कौन रहेगा और क्या अमेरिका चीन पर अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रख पाएगा या नहीं।
समिति के अध्यक्ष ब्रायन मास्ट ने साफ शब्दों में कहा कि एआई की दौड़ जीतना अमेरिका की राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर इस बात पर पड़ेगा कि सैन्य ताकत में अमेरिका चीन से आगे रहता है या नहीं।
मास्ट के अनुसार, आज एआई का उपयोग सेना के कमांड सिस्टम, निगरानी, साइबर ऑपरेशन और परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण में हो रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैट पॉटिंजर ने चेतावनी दी कि अगर चीन को एडवांस्ड अमेरिकी एआई चिप्स तक पहुंच दी गई, तो उसकी सैन्य ताकत बहुत तेजी से बढ़ेगी। उनका कहना था कि एनविडिया की एडवांस्ड चिप्स चीन की साइबर युद्ध, ड्रोन और खुफिया क्षमताओं को मजबूत कर सकती हैं।
पॉटिंजर ने बताया कि चीन की नीति में जो तकनीक आम उपयोग के लिए बनती है, वही सैन्य कामों में भी जाती है। पूर्व बाइडन प्रशासन अधिकारी जॉन फाइनर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच एआई अब सबसे अहम प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर लापरवाही भारी पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि चीन तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को “महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी के रूप में देख रहा है जो उनकी आर्थिक और सैन्य महत्वाकांक्षा को सक्षम बनाएगी। इसी वजह से एडवांस्ड चिप्स और सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरणों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध चीन की रफ्तार को धीमा करने में अहम रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि बड़े सरकारी खर्च के बावजूद चीन अभी बड़े पैमाने पर एडवांस्ड सेमीकंडक्टर बनाने में सक्षम नहीं है। खुद चीनी नेताओं ने भी माना है कि इस क्षेत्र में वे अभी पीछे हैं। पॉटिंजर के मुताबिक, चीन विदेशों से एडवांस्ड चिप्स खरीदकर इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहा है और हर हाल में अमेरिका की बराबरी करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि चीन एडवांस्ड विदेशी चिप्स खरीदकर उस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। पोटिंगर ने कहा, “चीन हमें पकड़ने और हम पर हावी होने के लिए वह सब कुछ कर रहा है जो वे कर सकते हैं।” सांसदों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि अमेरिकी चिप्स खरीदने वाली प्राइवेट चीनी टेक्नोलॉजी कंपनियां अक्सर सरकार के साथ मिलकर काम करती हैं। पोटिंगर ने डीपसीक, अलीबाबा और टेनसेंट जैसी कंपनियों का उदाहरण दिया, जो चीन के बड़े मिलिट्री लक्ष्यों से जुड़ी हुई हैं।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट
