उड़ान योजना को नई रफ्तार देने की तैयारी

उड़ान योजना को नई रफ्तार देने की तैयारी

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना ‘उड़ान’ (उड़े देश का आम नागरिक) को अधिक प्रभावी और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए एक नई फंडिंग व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। विभिन्न मंत्रालयों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद इस संबंध में एक नया प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे अब केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। सरकार का मानना है कि नई फंडिंग व्यवस्था लागू होने से दूर-दराज और कम विकसित क्षेत्रों में स्थित हवाई अड्डों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा और आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा अधिक सुलभ बनेगी। वर्ष 2016 में शुरू की गई उड़ान योजना का उद्देश्य कम किराए में क्षेत्रीय हवाई सेवाएं उपलब्ध कराना था। अब तक इस योजना के तहत 4,352 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जा चुकी है, जबकि हवाई अड्डों के विकास और बुनियादी ढांचे पर 4,638 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। हालांकि, भारी निवेश के बावजूद चुनौतियां बनी हुई हैं। स्वीकृत 649 मार्गों में से फिलहाल केवल 60 प्रतिशत मार्ग ही संचालित हो रहे हैं। बढ़ती परिचालन लागत, सीमित किराया व्यवस्था, महंगा विमान ईंधन और कई रूट्स पर कम यात्री संख्या के कारण कई एयरलाइनों ने उड़ानें बंद कर दी हैं। वर्तमान सब्सिडी मॉडल में असंतुलन को दूर करने के लिए सरकार अब नए समाधान की ओर बढ़ रही है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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