जीवन का शतक पार कर चुके स्वतंत्रता सेनानी प्रह्लाद प्रजापति ढाई करोड़ सेनानी परिवारों के मुखिया!
जीवन का शतक पार कर चुके स्वतंत्रता सेनानी प्रह्लाद प्रजापति ढाई करोड़ सेनानी परिवारों के मुखिया!
(लेखक – डॉ. श्रीगोपाल नारसन)
आजादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन कर प्रह्लाद प्रजापति को स्वतंत्रता सेनानी होने का सम्मान तो मिला ,लेकिन स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को वह सम्मान तथा पहचान नही मिल पाई ,जिसके वे हकदार है।इसीलिए अपने जीवन शतक के बाद भी प्रह्लाद प्रजापति देश के उन ढाई करोड़ सेनानी परिवारों का आत्म सम्मान बढाने के लिए उनके हक की लड़ाई संगठन समन्वयक हरिराम गुप्ता,उपाध्यक्ष अवधेश पंत व महामंत्री कुमार पटेल आदि के साथ मिलकर लड़ रहे है।
देश की आजादी में अपना अहम योगदान करने और फिर आजादी मिलने पर देश की आजादी के लिए लड़ने वाले स्वाधीनता सेनानियों के सपनो का भारत बनाने के लिए एक सौ एक वर्ष की आयु पूरी कर लेने पर भी संघर्षरत महान स्वतंत्रता सेनानी प्रहलाद प्रजापति चाहते है कि देशभर में मौजूद ढाई करोड़ स्वतंत्रता सेनानी परिजनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के लिए उनका चिन्हीकरण किया जाए और उन्हें तत्सम्बन्धी परिचय पत्र जारी किए जाए।उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बनकटा बाजार क्षेत्र के निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. प्रह्लाद प्रजापति अपने जीवन के एक सौ एक वर्ष पूरे कर लेने को अपना सौभाग्य मानते है,उनका कहना है कि अपने आश्रितों की देश के प्रति कुछ कर गुजरने की ललक देखकर उनका सीना चौड़ा हो जाता है।
स्वाधीनता सेनानी प्रहलाद प्रजापति पर भारत सरकार ने सन 2022 में डाक टिकट भी जारी किया है। भारत सरकार के डाक विभाग ने लालकिले की तस्वीर के साथ स्वाधीनता सेनानी प्रहलाद प्रजापति की तस्वीर लगाकर 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया है।इस अवसर पर उन्हें भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत मिलकर उनके राष्ट्र के प्रति योगदान की सराहना भी की।डॉ प्रहलाद प्रजापति ने अपनी इस उपलब्धि के लिए भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।प्रहलाद प्रजापति इन दिनों स्वतंत्रता सेनानी परिवार कल्याण महापरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों के साथ मिलकर देश मे रचनात्मक अभियान चला रहे है।प्रहलाद प्रजापति का देश को आजाद कराने में अहम योगदान रहा है। उनके चाचा रामफल प्रजापति भी एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उन्होंने कई बार आजादी का बिगुल फूंका, जिससे उनको जेल जाना पड़ा था। अपने चाचा रामफल प्रजापति के साथ ही डॉ. प्रहलाद ने भी अंग्रेजों से लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई और यातनाएं सहने के बाद भी हार नहीं मानी। इसलिए भारत सरकार के द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित होने का मौका मिला।लेकिन उन्होंने कभी सत्ता के साथ चलने ,सत्ता की हा में हा मिलाने की कोशिश नही की बल्कि वे जहां कमिया है उसकी भी आवाज़ उठाते है और जहां अच्छा काम हुआ है,उसकी तारीफ़ करने से भी नही चूकते।उनका स्पष्ट मानना है कि वे जिन लोगो का आजादी के आंदोलन में योगदान रहा है,उन्हें कभी नही भुला सकते ,बल्कि ऐसे महान लोगो के पदचिन्हों पर भावी पीढ़ी को चलाने और उनके प्रति श्रद्धाभाव के प्रति कृतसंकल्प है।उनकी शिकायत है कि सरकार स्वतंत्रता सेनानी परिवारों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है,जबकि इन्ही परिवारों के बलबूते आज देश आजाद है और हम खुले मन से आजादी की सांस ले पा रहे है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी परिवारों की संगठन शक्ति बढ़ाने के लिए देश के सभी जिले के स्वतंत्रता सेनानी परिवारो को संगठन से जुड़ने की वकालत की।उनका मानना है कि आजादी के आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार के लोगो को देश की अग्रिम पंक्ति का नागरिक माना जाना चाहिए ।जिसके लिए वे लगातार मांग करते चले आ रहे है।उनका कहना है कि स्वतंत्रता सेनानियों व शहीदों के परिवारों को एक माला में पिरोकर उन्हें अपने पूर्वजों के मान-सम्मान और अपने स्वयं के अस्तित्व की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए ही प्रतिबद्धित और संकल्पित किया जा रहा है।स्वतंत्रता सेनानी और शहीदों की शौर्य गाथाएं हमारे देश को उत्तर से लेकर दक्षिण तक तथा पूर्व से लेकर पश्चिम तक एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती हैं ।यही स्वतंत्रता सेनानी परिवार कल्याण महापरिषद का उद्देश्य भी है ,ताकि हम अपने पूर्वज स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों के बलिदान को याद रखें, उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करें, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा लेती रहें तथा उनका बलिदान कभी भी विस्मृत न होने पाए।इसके लिए शहीदों की जीवनी पाठ्यक्रम में शामिल कराये जाने की मांग भी संगठन के माध्यम से उठती रही है।हरिद्वार में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के अमर शहीद जगदीश प्रसाद वत्स जैसे राष्ट्रभक्तो की जीवनी शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल हो,इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारों से मांग की गई है।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट