इंस्टाग्राम-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर हो रही नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री

इंस्टाग्राम-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर हो रही नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री

नई दिल्ली, डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने का माध्यम है, वहीं अब यह नशे की तस्करी का नया केंद्र बनता जा रहा है। इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। तस्कर सोशल मीडिया का इस्तेमाल ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खासकर इंस्टाग्राम पेज और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए नशे को आकर्षक तरीके से पेश किया जा रहा है। कई मामलों में ड्रग्स को चॉकलेट या कैंडी जैसे रूप में दिखाकर युवाओं को लुभाया जा रहा है, जिससे पहली बार इस्तेमाल करने वालों को भी जाल में फंसाया जा सके। इस अवैध कारोबार में पहचान छिपाने के लिए खास कोडवर्ड का इस्तेमाल हो रहा है। ये कोडवर्ड्स ऐसे बनाए जाते हैं कि आम लोगों या एजेंसियों के लिए उन्हें समझ पाना आसान न हो। इससे तस्कर आसानी से निगरानी से बच निकलते हैं।
भुगतान के तरीकों में भी बड़ा बदलाव आया है। पारंपरिक नकद लेनदेन की जगह अब क्रेप्टोकरंसी और ई-वॉलेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे लेन-देन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है और तस्करी का नेटवर्क ज्यादा सुरक्षित और गुप्त बन जाता है। इस नेटवर्क का सबसे बड़ा निशाना युवा वर्ग है। सोशल मीडिया के जरिए नए और कम उम्र के लोगों तक आसानी से पहुंच बनाकर उन्हें नशे की दुनिया में धकेला जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। एनसीबी और पुलिस सोशल मीडिया आधारित नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए तस्करों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। 2026 के शुरुआती तीन महीनों में एनसीबी द्वारा 73 तस्करों को दोषी ठहराया जाना इस दिशा में की जा रही सख्त कार्रवाई को दर्शाता है। इसके साथ ही सरकार और एजेंसियां युवाओं को जागरूक करने के लिए अभियान भी चला रही हैं, ताकि वे इस खतरे से बच सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई चुनौती से निपटने के लिए उन्नत तकनीक, बेहतर खुफिया तंत्र और सामाजिक जागरूकता तीनों की जरूरत है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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