नोएडा हवाईअड्डे से यात्रियों का समय बचेगा..

नोएडा हवाईअड्डे से यात्रियों का समय बचेगा..

नई दिल्ली, 11 जून । नोएडा हवाईअड्डा के निर्माण से संबंधित गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस परियोजना के लिए अभियांत्रिकी, खरीद एवं निर्माण (ईपीसी) अनुबंध दिया जा चुका है। परियोजना से जुड़ी अन्य निविदाएं जारी होने की कवायद भी तेज हो गई है। परियोजना 2024 में पूरी होने का लक्ष्य है।

हवाईअड्डा के मुख्य कार्याधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने बताया कि घरेलू से अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर एक घंटे से कम समय में पूरा करने के लिए एक टर्मिनल तैयार हो रहा है। श्नेलमैन ने कहा कि नोएडा हवाईअड्डा एकल-टर्मिनल वाली परियोजना होगी। मगर डिजिटल तकनीक की मदद से घरेलू से अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर में एक घंटे से भी कम समय लगेगा।

देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो के सीईओ रणजय दत्ता ने हाल में कहा था कि भारत में अत्याधुनिक हवाईअड्डे विकसित करने के लिए हवाईअड्डों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक पहुंचने में लगने वाला समय कम करना होगा।

नोएडा एयरपोर्ट का ढांचा इस तरह किया जाएगा कि एक ही गेट से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों को यात्रा की सुविधा मिल जाएगी। यानी दुबई से आए किसी विमान को अगर कोलकाता तक जाना है तो उसमें उसी गेट से यात्री सवार हो सकते हैं और इसके लिए विमान को किसी खास अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल पर ले जाने की जरूरत नहीं होगी।

दत्ता ने कहा, ‘हमने यात्रियों के लिए यात्रा का अनुभव बेहतर बनाने पर पूरा ध्यान दिया है और विमानों को भी एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक यात्रियों को पहुंचने में कम समय लगेगा।’ईपीसी अनुबंध जारी होने के बाद हवाईअड्डा बोर्ड 80 एकड़ से अधिक क्षेत्र में माल वहन और रखरखाव सुविधाओं के निर्माण के लिए साझेदारों की तलाश कर रहा है। 200 से अधिक कमरों वाले एक पांच सितारा होटल के निर्माण के लिए बोली प्रक्रिया भी शुरू हो गई हैं।

श्नेलमैन ने कहा, हम 80 एकड़ से अधिक क्षेत्र में माल वहन सुविधाएं विकसित करने की योजना तैयार कर रहे हैं। जल्द खराब होने वाली वस्तुओं के लिए एक विशेष भंडारण सुविधाओं का इंतजाम किया जाएगा। निर्माण एवं परिचालन प्रारूप पर होटल के निर्माण के लिए हम एक साझेदार की तलाश कर रहे हैं। पिछले सप्ताह टाटा समूह की ढांचागत एवं निर्माण इकाई टाटा प्रोजेक्ट्स को हवाईअड्डे के निर्माण का ठेका मिला था।

सूत्रों ने कहा कि संभावित उम्मीदवारों की सूची में एलऐंडटी और शापूरजी ऐंड पलोनजी के भी नाम आए थे मगर ठेका टाटा प्रोजेक्ट्स के हाथ लगा। परियोजना निर्माण पर करीब 7,000 करोड़ रुपये लागत आएगी। इस बारे में एक सूत्र ने कहा कि सफल बोलीदाता और दूसरी सबसे बड़ी बोली के बीच काफी अंतर था। टाटा प्रोजेक्ट्स ने संसद की नई इमारत, मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक और विभिन्न शहरों में मेट्रो लाइनों का ठेका मिला है।

दीदारे हिन्द की रिपोर्ट

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