चीन की अवैध चिप तस्करी ने बढ़ाई अमेरिका की चिंता

चीन की अवैध चिप तस्करी ने बढ़ाई अमेरिका की चिंता

-खुफिया नेटवर्क के जरिए उन्नत एआई तकनीक चुरा रहा बीजिंग, अमेरिकी पैनल ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर बताया बड़ा खतरा

वॉशिंगटन, अमेरिकी सांसदों और तकनीकी विशेषज्ञों ने एक संसदीय सुनवाई के दौरान चीन की खतरनाक रणनीतियों का भंडाफोड़ किया है। ‘चाइना सेलेक्ट कमेटी’ के अध्यक्ष जॉन मूलनार ने चेतावनी दी है कि चीन कानूनी और अवैध तस्करी नेटवर्क के माध्यम से उन्नत अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप्स हासिल कर रहा है। न्याय विभाग (DOJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 2.5 बिलियन डॉलर मूल्य के चिप्स की तस्करी की गई है, जिसे अमेरिकी इतिहास में निर्यात नियंत्रण का सबसे बड़ा उल्लंघन माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह चोरी न केवल व्यापारिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ‘बढ़ता हुआ संकट’ भी है।

सुनवाई में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि तस्कर पकड़े जाने से बचने के लिए बेहद जटिल और शातिराना तरीके अपना रहे हैं। तस्करी के लिए उपकरणों से सीरियल नंबर हटाए जा रहे हैं और प्रतिबंधित चिप्स को चीन भेजने के लिए फर्जी ‘सर्वर शिपमेंट’ तैयार किए जा रहे हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन निर्यात नियंत्रणों को दरकिनार करने के लिए विदेशी डेटा केंद्रों का निर्माण कर रहा है ताकि वैश्विक ‘कंप्यूटिंग पावर’ की दौड़ में आगे निकल सके। इस तस्करी नेटवर्क में कई प्रतिष्ठित टेक कंपनियों से जुड़े संदिग्धों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जो फर्जी पहचान के जरिए अमेरिकी तकनीक को बीजिंग पहुँचा रहे हैं।

विशेषज्ञ यूसुफ महमूद ने आगाह किया कि चीन का अंतिम लक्ष्य 2030 तक AI के क्षेत्र में वैश्विक वर्चस्व हासिल करना है। इसके लिए वह ‘डिस्टिलेशन अटैक’ जैसे साइबर हमलों के जरिए अमेरिकी प्रणालियों की नकल कर रहा है। चिंता की बात यह है कि यदि इन चोरी की गई उन्नत तकनीकों को नहीं रोका गया, तो चीन इनका उपयोग युद्ध के मैदान में अमेरिकी सेना और उसके सहयोगियों के खिलाफ कर सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी नेतृत्व बनाए रखना अब केवल आर्थिक प्रभुत्व की बात नहीं, बल्कि सैन्य और रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए अनिवार्य हो गया है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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