ऑड-इवेन का खेल

ऑड-इवेन का खेल

-निर्भय कुमार पाण्डेय ‘नीरज’-

एक बार फिर से शुरू है दिल्ली में,
ऑड-इवेन का खेल।
कोई बता रहा है सफल,
तो कोई बता रहा है इसे विफल।
सफल-विफल के इस खेल में,
दिल्ली की आम जनता का
जीना हुआ है मुहाल।
प्रदूषण कम करने की आड़ में,
राजनीतिक चमकाने की होड़ मची है
कहीं
यही ऑड-इवेन का असली खेल तो नहीं है
आज भी दिल्ली की आम जनता
सुबह-शाम जाम की झाम से जूझ रही है।
कार पुल तो नहीं,
पर वर्षों से पुरानी कार की अब टंकी फूल हो रही है
यत्री बस आने की आस में,
स्टैंड पर लाल-पीला हो रहा है
पर सरकार श्आपश् की कृपा से,
बस का मालिक माला-माल हो रहा है।
एसी रूम में बैठकर जब से योजनाओं को
मूर्त देने का दौर शुरू हुआ है
तब से आम आदमी का
जीना दुस्वार हुआ है
इस लाखों-करोड़ों की खेल में
स्वप्रचार का भी आरोप चस्पा जा रहा है
श्आपश् की राज में
दिल्ली इस कदर विकसित हो रही है
व्यक्ति कार छोड़
बाइक पर सवार हो रहा है
जब से दिल्ली में ऑड-इवेन का
यह नायाब खेल शुरू हुआ है
सड़क पर सांसद चालान कटवा रहा है
श्आपश् के मंत्री चालान की डर से
वाहन बदल-बदल कर
सचिवालय पहुंच रहा है
कानून पालन करने के खातिर
दिल्ली का आम आदमी
श्आपश् के अपील पर
आज मेट्रो व डीटीसी की बसों में धक्के खा रहा है
इस खेल में जनता के खून-पसीने के पैसे का
बेजा इस्तेमाल हो रहा है।
जब से ऑड-इवेन का खेल
एक बार फिर से दिल्ली में शुरू हुआ है।।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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