ग्रीनलैंड को हासिल करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक : अमेरिका…

ग्रीनलैंड को हासिल करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक : अमेरिका…

वॉशिंगटन, 16 जनवरी । अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने गुरुवार को कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ग्रीनलैंड को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए अतिआवश्यक मानते हैं और इसे हासिल करने के लिए प्रबल उत्सुक हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने संवाददाताओं से कहा, “राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी प्राथमिकता बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करे। उनका मानना है कि ऐसा करना हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोत्तम हित में है।”

व्हाइट हाउस की यह टिप्पणी अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद आई है। यह बातचीत ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने की राष्ट्रपति ट्रम्प की महत्वाकांक्षा को लेकर हुई थी। गौरतलब है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत क्षेत्र है।

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि बुधवार को वॉशिंगटन में ग्रीनलैंड के उनके समकक्ष, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई चर्चा मुख्य मतभेदों को सुलझाए बिना समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि ‘एक मौलिक असहमति’ बनी हुई है। श्री रासमुसेन ने कहा कि ‘हम अमेरिका की स्थिति को बदलने में कामयाब नहीं हुए’। उन्होंने हालांकि यह भी रेखांकित किया कि यह अप्रत्याशित भी नहीं था।

ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री ने कहा कि मतभेदों के बावजूद डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका एक उच्च स्तरीय कार्य समूह गठित करने पर सहमत हुए हैं ताकि ‘यह पता लगाया जा सके कि क्या हम आगे बढ़ने का कोई साझा रास्ता खोज सकते हैं।’ उन्होंने बताया कि इस समूह की पहली बैठक ‘कुछ हफ्तों के भीतर’ होने की उम्मीद है। श्री रासमुसेन के अनुसार, इस समूह का ध्यान डेनमार्क की ‘रेड लाइन्स’ की रक्षा करते हुए अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने पर होगा। उल्लेखनीय है कि डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो के सदस्य हैं।

इस बीच, डेनमार्क और कई यूरोपीय सहयोगियों ने ग्रीनलैंड में सैनिक तैनात करने की योजना की घोषणा की है, जो इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक द्वीप पर सुरक्षा को मजबूत करने के एक बड़े प्रयास का संकेत है।

व्हाइट हाउस ने उपराष्ट्रपति वेंस और डेनमार्क के अधिकारियों के बीच हुई बैठक को सकारात्मक बताया है, भले ही राष्ट्रपति ट्रम्प ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के लिए दबाव बनाना जारी रखे हुए हैं। सुश्री लेविट ने प्रशासन के रुख को दोहराते हुए कहा, “उस बैठक में, दोनों पक्ष एक कार्य समूह स्थापित करने पर सहमत हुए हैं, जो ग्रीनलैंड के अधिग्रहण पर तकनीकी बातचीत जारी रखेंगे। मुझे बताया गया है कि वे बातचीत हर दो से तीन हफ्ते में होगी।”

डेनमार्क के अधिकारियों ने हालांकि बातचीत के बाद बिल्कुल अलग बात कही। डेनमार्क के विदेश मंत्री ने ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ड के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारे लिए, वे विचार जो डेनमार्क साम्राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान नहीं करते हैं, निश्चित रूप से पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।”

श्री रासमुसेन ने कहा, “हम अमेरिकी स्थिति को बदलने में सफल नहीं रहे। यह स्पष्ट है कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा है। हमने इसे बहुत स्पष्ट कर दिया है कि यह डेनमार्क के हित में नहीं है।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड का अधिग्रहण ‘बिल्कुल आवश्यक नहीं’ है और रूस या चीन से कोई ‘तत्काल खतरा’ नहीं है। ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि इसकी रणनीतिक स्थिति, प्रचुर खनिज संसाधनों और इस क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर उपजी चिंताओं के कारण है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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