मनोरंजन के साथ दिया गया संदेश दिमाग तक पहुंचता है आसानी से: माधुरी
मनोरंजन के साथ दिया गया संदेश दिमाग तक पहुंचता है आसानी से: माधुरी
मुंबई, अपनी नई नई फिल्म मां बहन को लेकर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने मनोरंजन और समाज के रिश्ते पर अपने गहरे और विचारोत्तेजक विचार साझा किए। उनका मानना है कि अगर समाज की किसी जरूरी और संवेदनशील बात को लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना हो, तो मनोरंजन से बेहतर और कोई तरीका नहीं हो सकता।
माधुरी दीक्षित ने कहा, जब लोग किसी फिल्म या शो को देखने बैठते हैं, तो उनका प्राथमिक मकसद कुछ समय के लिए अपने रोजमर्रा के तनाव से दूर होकर अच्छा समय बिताना और हल्का महसूस करना होता है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ऐसे में अगर कहानी के जरिए समाज की सच्चाई भी बड़े ही सहज और मनोरंजक तरीके से दिखाई जाए, तो उसका असर कहीं ज्यादा गहरा और स्थाई होता है।
माधुरी का मानना है कि लोग हँसते-हँसते या मनोरंजन करते हुए भी यह आसानी से समझ सकते हैं कि उनके आसपास क्या हो रहा है, समाज में कौन-सी बातें सही हैं या गलत, और किन बदलावों की आवश्यकता है। उनके अनुसार, मनोरंजन के साथ दिया गया संदेश लोगों के दिल और दिमाग तक आसानी से पहुँचता है और उन्हें सोचने पर मजबूर करता है। अभिनेत्री ने आगे इस बात पर जोर दिया कि, किसी बात को बार-बार समझाने या उपदेश देने से लोग कई बार दूरी बना लेते हैं और उसे सुनना पसंद नहीं करते। लेकिन, जब वही बात मजेदार, दिलचस्प और कहानी के रूप में प्रभावी तरीके से दिखाई जाती है, तो लोग उसे न केवल ध्यान से देखते हैं, बल्कि उस पर सोचते भी हैं और उस पर चर्चा भी करते हैं।
उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा, फिल्मों और कहानियों की यही सबसे बड़ी ताकत है कि वे गंभीर मुद्दों को भी सुलभ और आकर्षक बना सकती हैं। माधुरी ने बताया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से ऐसी कहानियां बेहद पसंद आती हैं, जिनमें मनोरंजन का भी पूरा पुट हो और साथ ही कोई गहरा और सकारात्मक सामाजिक संदेश भी छिपा हो, जो दर्शकों को जागरूक कर सके। इसके अलावा, माधुरी दीक्षित ने समाज में महिलाओं और पुरुषों के प्रति अपनाए जाने वाले अलग-अलग नजरिए पर भी खुलकर बात की और पितृसत्तात्मक सोच पर तीखे सवाल उठाए। माधुरी ने कहा, यह एक पितृसत्तात्मक समाज है जो प्यार और रिश्तों के मामलों में आज भी दोहरे मापदंड अपनाता हुआ आया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, अगर कोई पुरुष कई गर्लफ्रेंड बनाता है तो उसे रोमियो या प्लेबॉय कहकर महिमामंडित किया जाता है, लेकिन अगर कोई महिला वैसा ही करती है तो उसे बुरा-भला कहा जाता है और उसे नकारात्मक नजरिए से देखा जाता है। अभिनेत्री ने बताया, मेरी फिल्म मां बहन इन्हीं पुरानी परंपराओं, रूढ़ियों और लैंगिक असमानता वाले नियमों को चुनौती देती है।
फिल्म में महिलाओं को मजबूत, स्वतंत्र और पारंपरिक नियमों को तोड़ने वाला किरदार दिया गया है, जो अपने हक के लिए खड़ी होती हैं। माधुरी ने दृढ़ता से कहा, हर महिला सम्मान और गरिमा के साथ जीने की हकदार है, और समाज को इस सोच को अपनाना चाहिए। मां बहन का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है। फिल्म में माधुरी के साथ तृप्ति डिमरी, धारणा दुर्गा, रवि किशन, गीतांजलि कुलकर्णी, अरुणोदय सिंह और शार्दुल भारद्वाज भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। बता दें कि माधुरी दीक्षित आज भी अपनी शानदार अदाकारी, मनमोहक मुस्कान और सशक्त स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जानी जाती हैं। पिछले कई दशकों से वह लगातार दर्शकों का मनोरंजन करती आ रही हैं और हर दौर में खुद को नए और चुनौतीपूर्ण किरदारों के साथ साबित कर रही हैं।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट