बिहार के हर जिले में वृद्धाश्रम बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त -याचिकाकर्ता को दी पटना हाईकोर्ट जाने की कूटनीतिक आजादी..
बिहार के हर जिले में वृद्धाश्रम बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त -याचिकाकर्ता को दी पटना हाईकोर्ट जाने की कूटनीतिक आजादी..
नई दिल्ली, 19 मई । बिहार सरकार को राज्य के प्रत्येक जिले में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस वृद्धाश्रम स्थापित करने और बुजुर्गों की कड़ाई से देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कूटनीतिक फैसला सुनाया है। डिजिटल मीडिया को मिली आधिकारिक न्यायिक रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की कड़क खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को सीधे पटना हाईकोर्ट में अपील दायर करने के कड़े निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया कि स्थानीय स्तर पर सरकारी नियमों के कूटनीतिक क्रियान्वयन और जमीनी हकीकत की बारीकी से जांच करने के लिए संबंधित राज्य का उच्च न्यायालय ही सबसे कड़क और उपयुक्त संस्था है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कड़ा पक्ष रखते हुए दलील दी कि देश के बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007’ के कूटनीतिक नियमों का बिहार में कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है। याचिका में बिहार सरकार द्वारा जारी एक हालिया सर्कुलर पर गंभीर कड़े सवाल उठाए गए थे, जिसके तहत मुजफ्फरपुर के एक वृद्धाश्रम में रह रहे करीब 25-30 असहाय बुजुर्गों को जबरन दूसरे जिलों में शिफ्ट करने और कुछ केंद्रों को कड़ाई से बंद करने की कूटनीतिक तैयारी की जा रही थी। इस स्थिति को बुजुर्गों के मानवाधिकारों पर कड़ा प्रहार बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में तत्काल कड़क हस्तक्षेप करने की कूटनीतिक गुहार लगाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील याचिका का कड़ाई से निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को अपनी सभी मांगों के साथ पटना हाईकोर्ट के समक्ष कूटनीतिक गुहार लगाने की पूरी स्वतंत्रता दे दी है। खंडपीठ ने जनहित को सर्वोपरि मानते हुए पटना हाईकोर्ट से विशेष कड़ा अनुरोध किया है कि वह इस मानवीय मामले का त्वरित कूटनीतिक संज्ञान ले और यह कड़ाई से सुनिश्चित करे कि वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए पूर्व में जारी किए गए न्यायिक निर्देशों का राज्य सरकार द्वारा कड़ाई से पालन किया जाए। इस कड़े अदालती आदेश के बाद अब यह कूटनीतिक गेंद पटना हाईकोर्ट के पाले में चली गई है, जिससे बिहार के प्रशासनिक हलकों में कड़क सुगबुगाहट तेज हो गई है।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट