इजरायल-ईरान युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार में कोहराम, ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर के पार पहुंचा, कतर के ऊर्जा केंद्रों पर मिसाइल हमलों से दुनिया भर में सप्लाई संकट गहराया

इजरायल-ईरान युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार में कोहराम, ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर के पार पहुंचा, कतर के ऊर्जा केंद्रों पर मिसाइल हमलों से दुनिया भर में सप्लाई संकट गहराया

पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 4% से अधिक की छलांग लगाकर 112.17 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब इजरायली लड़ाकू विमानों ने ईरान के बुशहर स्थित महत्वपूर्ण गैस सुविधाओं को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने कतर स्थित दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा केंद्रों में से एक, ‘रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी’ पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। इस भीषण गोलाबारी ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को पूरी तरह हिला कर रख दिया है, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया है।

‘कतर एनर्जी’ ने आधिकारिक पुष्टि की है कि रास लफान पर पिछले 12 घंटों में हुए दो मिसाइल हमलों से वहां के बुनियादी ढांचे को व्यापक क्षति पहुंची है और भीषण आग लग गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। इन हमलों ने विशेष रूप से वैश्विक एलएनजी (LNG) आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हो रही इस सैन्य कार्रवाई ने समुद्री व्यापारिक मार्गों को असुरक्षित बना दिया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यह संघर्ष तत्काल नहीं थमा, तो कच्चे तेल की कीमतें जल्द ही 125 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर सकती हैं।

मध्य पूर्व से होने वाली तेल और गैस आपूर्ति में बाधा भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। कच्चे तेल के महंगे होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि और मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने का सीधा खतरा मंडरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि कतर जैसे ऊर्जा केंद्रों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें राजनयिक प्रयासों पर टिकी हैं, क्योंकि इस युद्ध का लंबा खिंचना वैश्विक मंदी का कारण बन सकता है। तेल की कीमतों में इस अस्थिरता ने शेयर बाजारों को भी लाल निशान पर धकेल दिया है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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