सायामी खेर ने मुंबई मैराथन के साथ पूरे किए 10 साल, अपनी एंड्योरेंस जर्नी की शुरुआत को किया याद

सायामी खेर ने मुंबई मैराथन के साथ पूरे किए 10 साल, अपनी एंड्योरेंस जर्नी की शुरुआत को किया याद

मुंबई, 20 जनवरी। अभिनेत्री और फिटनेस आइकन सायामी खेर ने टाटा मुंबई मैराथन में अपनी पहली भागीदारी के 10 साल पूरे होने का एक बेहद खास और भावनात्मक पड़ाव मनाया। भले ही महामारी के कारण सायामी की यह यात्रा लगातार न रही हो, लेकिन यह मैराथन सायामी के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यहीं से उनकी एंड्योरेंस स्पोर्ट्स की शुरुआत हुई और यही उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ बना।
एक समर्पित रनर और सफल आयरनमैन ट्रायथलीट सायामी के लिए मुंबई मैराथन सिर्फ़ फिटनेस तक सीमित नहीं है। करीब दस साल पहले इसी मैराथन में उन्होंने पहली बार पूरे 42.2 किलोमीटर की मैराथन दौड़ी थी। यही अनुभव आगे चलकर एंड्योरेंस स्पोर्ट्स के प्रति उनके प्यार की नींव बना और उन्हें दुनिया की कुछ सबसे कठिन रेसों के फिनिश लाइन तक ले गया, जिनमें दो आयरनमैन 70.3 रेस भी शामिल हैं।
सायामी नेअपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, मुंबई मैराथन के साथ 10 साल पूरे करना मेरे लिए बेहद खास है, क्योंकि यहीं से मेरी रनिंग की शुरुआत हुई थी। मेरी पहली ही रेस 42.2 किलोमीटर की थी और वही एक स्टार्ट लाइन मुझे ज़िंदगी की कई फिनिश लाइनों तक ले गई। इसी ने मुझे दो आयरनमैन 70.3 रेस पूरी करने तक पहुंचाया और मेरी एंड्योरेंस स्पोर्ट्स की असली यात्रा शुरू हुई। इन सालों में चाहे शूट्स कितने भी व्यस्त रहे हों या ट्रेनिंग कितनी भी मुश्किल लगी हो, इस रेस में शामिल होना मुझे हमेशा ज़मीन से जोड़े रखता है।
सायामी ने कहा भारत को एक हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर बढ़ते देखना बहुत प्रेरणादायक है। मेरी बस यही उम्मीद है कि हम अपने पर्यावरण की सुरक्षा और हवा को साफ़ रखने की दिशा में भी उतनी ही गंभीर कोशिश करें, क्योंकि फिट रहना तब ही सही मायने रखता है जब हम साफ़ और सुरक्षित हवा में सांस ले सकें। रनिंग ने मुझे धैर्य, हिम्मत और खुद पर भरोसा करना सिखाया है। टाटा मुंबई मैराथन के ये 10 साल इस बात की याद दिलाते हैं कि वह पहला कदम मुझे कितनी दूर तक ले आया है।
एक कठिन अभिनय करियर के साथ सख़्त शारीरिक ट्रेनिंग को संतुलित करने के लिए जानी जाने वाली सायामी खेर फिटनेस को किसी ट्रेंड की तरह नहीं, बल्कि एक लंबे समय की प्रतिबद्धता मानती हैं। टाटा मुंबई मैराथन में अपनी पहली दौड़ के 10 साल पूरे होने पर, उनकी यह यात्रा निरंतरता, मानसिक मज़बूती और उस पहले कदम की ताक़त का सशक्त उदाहरण है – जो कभी रुकना नहीं सिखाता।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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