रूस-यूक्रेन संघर्ष: जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमले से आईएईए चिंतित
रूस-यूक्रेन संघर्ष: जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमले से आईएईए चिंतित
वियना। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र (जेडएनपीपी) के टरबाइन भवन पर कथित ड्रोन हमले को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि परमाणु केंद्रों पर हमले करना ‘आग से खेलने’ जैसा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस घटना का खुलासा करते हुए आईएईए ने बताया कि उसे जेडएनपीपी की तरफ से जानकारी दी गई कि दिन में पहले एक ड्रोन ने संयंत्र के टरबाइन भवन को निशाना बनाया। बताया गया है कि इस हमले से भवन की एक दीवार में छेद हो गया।
ग्रॉसी ने कहा, “किसी भी परमाणु केंद्र से या उसके खिलाफ किसी भी तरह का हमला नहीं होना चाहिए।” उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील दोहराई ताकि परमाणु सुरक्षा और संरक्षा को खतरा न हो।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि संयंत्र में मौजूद आईएईए की टीम ने प्रभावित टरबाइन भवन तक पहुंचने की अनुमति मांगी है, ताकि नुकसान का मौके पर जाकर आकलन किया जा सके।
आईएईए के अनुसार, अप्रैल 2024 के बाद यह पहली बार होगा जब जेडएनपीपी परिसर के अंदर किसी ड्रोन हमले की खबर सामने आई है।
जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र यूरोप के सबसे बड़े परमाणु बिजली संयंत्रों में से एक है। मार्च 2022 से यह रूस के नियंत्रण में है। रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से आईएईए कई बार चेतावनी दे चुका है कि इस इलाके में सैन्य गतिविधियां परमाणु सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकती हैं। एजेंसी लगातार परमाणु ढांचे की सुरक्षा की मांग करती रही है।
रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम ने शनिवार को कहा कि एक यूक्रेनी ड्रोन ने जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र पर हमला किया, हालांकि महत्वपूर्ण उपकरणों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
बताया गया कि यूक्रेनी ड्रोन ने संयंत्र की यूनिट 6 के टरबाइन सेक्शन को निशाना बनाया और शनिवार को वहां विस्फोट हुआ। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को इस घटना की जानकारी दे दी गई।
संयंत्र ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा, “परमाणु केंद्रों पर ऐसे हमले बेहद गैर-जिम्मेदाराना हैं और परमाणु सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। किसी परमाणु संयंत्र के बुनियादी ढांचे पर हमला अप्रत्याशित परिणाम ला सकता है और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।”
संयंत्र ने यह भी बताया कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और न ही कोई बड़ा नुकसान हुआ।
रोसाटॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेक्सी लिखाचेव ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी परमाणु संयंत्र के महत्वपूर्ण उपकरणों को जानबूझकर निशाना बनाया गया, जिससे विस्फोट हुआ और टरबाइन सेक्शन की संरचना को नुकसान पहुंचा।
ट्रंप के नाकाबंदी हटाए जाने के दावे के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध अभी भी लागूः ईरान
तेहरान, 31 मई (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध हटाने के दावे के बावजूद ईरानी जहाजों को अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। यह जानकारी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने दी।
ईरानी नौसैनिक अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिबंध अभी भी लागू हैं और अमेरिकी केंद्रीय कमान की ओर से जहाजों को क्षेत्र में प्रवेश न करने की चेतावनी दी जाती रहती है। ट्रंप ने शुक्रवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा था कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी “अब हटा ली जाएगी।”
इसी पोस्ट में उन्होंने ईरान के साथ संभावित समझौते की शर्तें भी रखीं। उन्होंने कहा कि तेहरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने पर सहमत होना होगा। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, ट्रम्प ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को “तुरंत” खोल दिया जाना चाहिए, ताकि दोनों दिशाओं में बिना किसी प्रतिबंध के जहाजरानी हो सके और सभी समुद्री बारूदी सुरंगें हटा दी जाएं।
ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के समन्वय से ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार का पता लगाया जाएगा और उसे नष्ट कर दिया जाएगा। वहीं, ईरान ने कहा है कि परमाणु मुद्दे मौजूदा वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं।
ईरान की मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय ने शनिवार को कहा कि ईरानी सशस्त्र बल होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण अधिकार के साथ नियंत्रण स्थापित कर रहे हैं। यह जानकारी आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने दी।
मुख्यालय ने एक बयान में स्पष्ट किया कि जलमार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों (वाणिज्यिक पोतों और तेल टैंकरों) को केवल ईरान द्वारा निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करना होगा और उन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना से अनुमति प्राप्त करनी होगी।
इस बीच, अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, आईआरजीसी की नौसेना ने शनिवार को कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान 20 जहाजों ने उसके बलों और ईरानी समुद्री अधिकारियों के समन्वय से जलडमरूमध्य को पार किया।
फार्स ने आईआरजीसी नौसेना के अधिकारियों के हवाले से बताया कि इन जहाजों को रासायनिक उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की अपने-अपने देशों में मांग को देखते हुए जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी गई थी।
गौरतलब है कि ईरान ने 28 फरवरी को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण और सख्त कर दिया था तथा इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरानी क्षेत्र पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद इन देशों से जुड़े जहाजों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया था। दूसरी ओर, अमेरिका ने भी जलडमरूमध्य में अपने नौसैनिक प्रतिबंध बनाए रखे हैं, जिससे ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट