या है कि काउंटिंग केंद्रों पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने और प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए बूथ-लेवल मैनेजमेंट और प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
या है कि काउंटिंग केंद्रों पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने और प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए बूथ-लेवल मैनेजमेंट और प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए उन सभी ‘प्रवासी’ नेताओं, सांसदों और विधायकों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं, जिन्हें चुनाव प्रचार के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई थी। ये नेता अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों का विस्तृत फीडबैक और अपडेट पार्टी आलाकमान को देंगे। सूत्रों के मुताबिक, मतगणना के दिन होने वाली किसी भी चुनौती से निपटने के लिए एक ‘कोऑर्डिनेशन मैकेनिज्म’ तैयार किया गया है। भाजपा का मानना है कि इन अनुभवी नेताओं की मौजूदगी से मतगणना केंद्रों पर पार्टी के एजेंटों का मनोबल बढ़ेगा और प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
पश्चिम बंगाल में इस बार रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ है, जिससे मुकाबले के बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दोनों चरणों को मिलाकर कुल 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपनी जन कल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, वहीं भाजपा ने भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लेकर कड़ा नैरेटिव सेट किया है। अब सबकी निगाहें 4 मई पर टिकी हैं, जब बंगाल के साथ-साथ असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के चुनावी नतीजों का भी ऐलान किया जाएगा।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट