चुनाव आयोग ने स्ट्रांग रूम में बाहरी लोगों की मौजूदगी को लेकर तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को नकारा

चुनाव आयोग ने स्ट्रांग रूम में बाहरी लोगों की मौजूदगी को लेकर तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को नकारा

कोलकाता, 01 मई । चुनाव आयोग ने स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर बाहरी लोगों की मौजूदगी को लेकर तृणमूल कांग्रेस के आरोप को खारिज करते हुए दावा किया कि पोस्टल बैलेट को अलग करने की प्रक्रिया सभी तय नियमों के अनुसार ही की गई है।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस ने आज शाम नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन किया जहां ईवीएम का स्ट्रॉन्ग रूम बनाया गया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता निर्वाचन आयोग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर मतपेटियों को गैर-कानूनी तरीके से खोल रहे थे। तृणमूल कांग्रेस के एक राज्यसभा सदस्य ने सीसीटीवी फुटेज जारी किया। इस फुटेज में कथित तौर पर कुछ अनजान लोग स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर घूमते हुए दिखाई दे रहे थे। जैसे-जैसे रात बढ़ती गई दोनों दलों के समर्थक और कार्यकर्ता एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाने लगे। दोनों पार्टियों के अलग-अलग नेता जब स्टेडियम पहुंचे, तो वहां झड़प जैसी स्थिति बन गई। हालात और ज्यादा तनावपूर्ण होते देख नेताजी इंडोर स्टेडियम के स्ट्रॉन्ग रूम के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए। इसी तरह की झड़पों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी शेखावत मेमोरियल स्कूल में एक घंटे से ज़्यादा समय बिताया। इसी स्कूल में भवानीपुर विधानसभा सीट की ईवीएम वाला स्ट्रॉन्ग रूम बना हुआ है। इस विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को मतदान हुआ था और सुश्री बनर्जी का मुकाबला उनके भाजपा प्रतिद्वंद्वी शुवेंदु अधिकारी से था।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने देर शाम संवाददाता सम्मेलन में इन आरोपों को खारिज किया और पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खुदीराम अनुशीलन केंद्र में बने ज़िला स्ट्रॉन्ग रूम में पोस्टल बैलेट को अलग करने की प्रक्रिया 30 अप्रैल को शाम चार बजे शुरू होनी थी, जिसकी घोषणा पहले ही की गई थी। उन्होंने कहा, “अलग किए गए बैलेट को प्रक्रिया के अनुसार, उत्तरी 24 परगना के बारासात में स्थित नोडल क्लियरिंग हाउस में भेजा जा रहा था। जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उत्तरी कोलकाता के सभी जनरल ऑब्ज़र्वर से इस प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहने का अनुरोध किया गया था।”

उन्होंने यह भी बताया कि रिटर्निंग अधिकारियों को पहले ही निर्देश दे दिए गए थे कि वे चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों और उनके चुनाव एजेंटों को इस बारे में सूचित करें, ताकि अगर वे चाहें तो पूरी प्रक्रिया की सीधे तौर पर निगरानी कर सकें।

श्री अग्रवाल ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से दिशा-निर्देशों के अनुसार ही चलाई जा रही है और सभी संबंधित पक्षों को इसकी विधिवत सूचना दी गई थी।

समस्या तब शुरू हुई जब बेलेघाटा से तृणमूल के उम्मीदवार कुणाल घोष और श्यामपुकुर से पार्टी की उम्मीदवार शशि पांजा ने आरोप लगाया कि सील किए गए स्ट्रॉन्ग रूम में कुछ अनाधिकृत लोग घुसते हुए देखे गए।

इससे पहले दिन की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने एक वीडियो संदेश जारी कर पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया था कि वे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और स्ट्रॉन्ग रूम पर कड़ी नज़र रखें।

इस बीच चुनाव आयोग ने मतगणना केंद्रों की सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए ‘ईसीआईएनईटी’के तहत एक विशेष मॉड्यूल शुरू किए जाने की जानकारी दी। यह प्रणाली — जिसे पश्चिम बंगाल सहित पाँच राज्यों में अनिवार्य किया गया है — निगरानी तंत्र को मज़बूत बनाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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