मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने ‘धुरंधर’ को प्रोपेगैंडा फिल्म बताने वालों को दिया करारा जवाब

मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने ‘धुरंधर’ को प्रोपेगैंडा फिल्म बताने वालों को दिया करारा जवाब

हैदराबाद, निर्देशक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचते हुए ‘दंगल’ के बाद दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म का खिताब अपने नाम कर लिया है। 19 मार्च को रिलीज हुई रणवीर सिंह अभिनीत इस फिल्म ने सिनेमाघरों में 46 दिन पूरे कर लिए हैं और आठवें हफ्ते में भी इसका जलवा बरकरार है। हालांकि, इस बड़ी व्यावसायिक सफलता के बीच कुछ आलोचकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे ‘प्रोपेगैंडा फिल्म’ का लेबल देना शुरू कर दिया। फिल्म को लेकर बढ़ते इस विवाद पर अब दिग्गज पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने खुलकर अपनी राय रखी है।

रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान जब मीडिया ने जावेद अख्तर से ‘धुरंधर’ को प्रोपेगैंडा कहे जाने पर सवाल किया, तो उन्होंने फिल्म का बचाव करते हुए इसे एक बेहतरीन सिनेमा बताया। उन्होंने कहा कि “मुझे धुरंधर बहुत पसंद आई, यह एक शानदार फिल्म है।” अख्तर ने तर्क दिया कि अक्सर लोग उन फिल्मों को प्रोपेगैंडा कहने लगते हैं जिनका ‘स्टैंड’ या विचार उनकी निजी मर्जी से मेल नहीं खाता। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कोई फिल्म आपके विचारों के अनुकूल है तो वह सही है और अगर नहीं है तो उसे प्रोपेगैंडा कहना पूरी तरह से गलत और पक्षपाती रवैया है।

अपनी बात को विस्तार देते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि हर फिल्मकार और लेखक को अपनी विचारधारा को फैलाने का पूरा हक है। उन्होंने समझाया कि यहां तक कि परियों की कहानियों में भी कोई न कोई जीवन दर्शन या विचारधारा छिपी होती है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने नास्तिक होने और सहनशीलता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने पश्चिम बंगाल में अपने एक कार्यक्रम के रद्द होने का उदाहरण देते हुए कहा कि यह उन लोगों की समस्या है जिनकी धार्मिक सोच सीमित है। उनके अनुसार, सिनेमा को केवल एक कहानी के नजरिए से देखा जाना चाहिए न कि राजनीतिक चश्मे से।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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