पोप और ट्रंप के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के मिशन पर वेटिकन पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
पोप और ट्रंप के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के मिशन पर वेटिकन पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
-शांति बहाली और कूटनीतिक रिश्तों को सुधारने की बड़ी कवायद

वेटिकन सिटी, 08 मई । अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो गुरुवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील कूटनीतिक दौरे पर वेटिकन सिटी पहुंचे। इस यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पोप लियो 14वें के बीच चरम पर पहुंचे तनाव को कम करना और दोनों शक्तियों के बीच बिगड़े हुए संबंधों को पटरी पर लाना है। दरअसल, शिकागो में जन्मे पोप द्वारा ईरान युद्ध और आव्रजन नीतियों की आलोचना करने के बाद ट्रंप ने उन पर तीखे हमले किए थे। रुबियो, जो स्वयं एक कैथोलिक हैं, अब मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए इस कड़वाहट को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वैश्विक शांति और कूटनीति के मोर्चे पर अमेरिका और वेटिकन के बीच सहयोग बना रहे।
विवाद का मुख्य केंद्र ईरान युद्ध और परमाणु हथियारों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में पोप पर आरोप लगाया था कि उनकी टिप्पणियां दुनिया को असुरक्षित बना रही हैं और वे अप्रत्यक्ष रूप से ईरान की मदद कर रहे हैं। हालांकि, पोप लियो 14वें ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कैथोलिक चर्च दशकों से सभी प्रकार के परमाणु हथियारों का विरोध करता आया है। पोप ने जोर देकर कहा कि वे किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की तरह नहीं, बल्कि बाइबिल और चर्च की शिक्षाओं के आधार पर केवल शांति वार्ता की अपील कर रहे हैं। ट्रंप द्वारा उन्हें ‘आतंकवाद पर नरम’ बताए जाने के बाद यह विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
मार्को रुबियो की यह राह आसान नहीं होने वाली है, क्योंकि वेटिकन के विदेश मंत्री कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने पोप का पुरजोर बचाव किया है। मेलोनी और विदेश मंत्री एंतोनियो ताजानी ने ईरान युद्ध को ‘अवैध’ करार देते हुए ट्रंप के हमलों की कड़ी निंदा की है, जिससे अमेरिकी प्रशासन और यूरोपीय सहयोगियों के बीच भी मतभेद उभर आए हैं। रुबियो को न केवल वेटिकन के अधिकारियों को संतुष्ट करना है, बल्कि इटली के नेतृत्व के साथ भी समन्वय बिठाना है। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के नतीजों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह तय करेगा कि वाशिंगटन और वेटिकन के बीच भविष्य की राह क्या होगी।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट