परमाणु हथियारों को लेकर ईरान ने जाहिर की मंशा, कहा- हम अमन और शांति के पक्षधर

परमाणु हथियारों को लेकर ईरान ने जाहिर की मंशा, कहा- हम अमन और शांति के पक्षधर

ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने परमाणु हथियारों के निर्माण और उपयोग को इस्लाम में हराम (वर्जित) करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार बनाने की इच्छा नहीं रखी है, क्योंकि यह उनके धार्मिक और नैतिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। डॉ. इलाही के अनुसार, ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एकमात्र उद्देश्य सामाजिक और मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग करना है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और वैश्विक संगठनों पर दोहरा मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया। डॉ. इलाही ने कहा कि जहां एक ओर ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाते हैं और उसके परमाणु केंद्रों की निरंतर सख्त निगरानी होती है, वहीं अन्य देशों के परमाणु कार्यक्रमों पर दुनिया चुप्पी साध लेती है। यह बयान जून 2025 में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों और हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में उपजे मतभेदों के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय विवाद 2015 के संयुक्त व्यापक कार्ययोजना समझौते पर केंद्रित है, जिस पर ईरान और कई विश्व शक्तियों ने हस्ताक्षर किए थे।
भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा करते हुए डॉ. इलाही ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग इस्लाम के उदय से भी सदियों पुराना है। प्राचीन काल में ईरान में भारतीय गणित, खगोलशास्त्र और चिकित्सा का गहरा अध्ययन किया जाता था। उन्होंने बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेता हमेशा भारत के साथ मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों के पक्षधर रहे हैं। चाबहार बंदरगाह परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने भविष्य में और अधिक सहयोग की उम्मीद जताई। देश की आंतरिक स्थिति पर उन्होंने स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से कुछ आर्थिक चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा कि बाहरी तत्व ईरान की आंतरिक स्थिति का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

Related Articles

Back to top button