गर्मियों में लगातार एसी में बैठना पड़ सकता है भारी -गंदे एसी फिल्टर से रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन का खतरा..
गर्मियों में लगातार एसी में बैठना पड़ सकता है भारी -गंदे एसी फिल्टर से रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन का खतरा..
गर्मी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर भारत में तापमान 40 डिग्री के पार जा चुका है और हीटवेव की चेतावनी जारी हो चुकी है। ऐसे में खुद को गर्मी की मार से बचाने के लिए एसी कई लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। एसी गर्मी से तो राहत देता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घंटों ठंडी हवा में बैठे रहना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है? जी हां, लगातार एसी की ठंडी हवा में बैठे रहने से शरीर पर कई नेगेटिव असर हो सकते हैं।
डिहाइड्रेशन और ड्राईनेस
एसी हवा से नमी सोख लेता है, जिससे कमरे की ह्युमिडिटी 30% से भी कम हो जाती है। कम नमी के कारण हमारी विंड पाइप का म्यूकस मेंमब्रेन सूखने लगता है। इससे गले में खराश, सूखी खांसी और नाक में जलन की समस्या बढ़ जाती है। साथ ही, त्वचा और आंखों में सूखापन महसूस होने लगता है।
सिक बिल्डिंग सिंड्रोम
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आधुनिक इमारतों में जहां हवा का वेंटिलेशन कम होता है और वही हवा बार-बार सर्कुलेट होती है। इससे सिक बिल्डिंग सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन और फोकस में कमी शामिल है।
तापमान का बड़ा अंतर
जब आप बाहर की 40°C-45°C वाली गर्मी से अचानक 18°C-20°C वाले एसी कमरे में आते हैं, तो शरीर को थर्मल शॉक लगता है। तापमान में यह अचानक बदलाव ब्लड वेसल्स को सिकोड़ देता है, जिससे जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है।
रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन
अगर एसी के फिल्टर की नियमित सफाई न की जाए, तो उनमें धूल, फफूंद और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार, शहरी आबादी में गर्मियों के दौरान रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण गंदा एसी फिल्टर है।
संतुलन कैसे बनाएं?
एसी का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, लेकिन कुछ उपायों से इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है-
तापमान 24-26°C रखें- ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) के अनुसार, 24 से 26 डिग्री का तापमान इंसानी शरीर के लिए सबसे सही है। यह न केवल बिजली बचाता है, बल्कि शरीर को बाहरी तापमान के साथ तालमेल बिठाने में भी मदद करता है।
भरपूर पानी पिएं- एसी में पसीना नहीं आता, लेकिन शरीर की नमी अंदरूनी तौर पर कम होती रहती है। इसलिए प्यास न लगने पर भी दिन भर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं।
नियमित सर्विसिंग- एलर्जी और इन्फेक्शन से बचने के लिए हर 2-4 सप्ताह में एसी के फिल्टर को साफ करें या बदलें।
ताजी हवा के लिए ब्रेक लें- हर दो-तीन घंटे में कुछ देर के लिए एसी से बाहर निकलें या खिड़कियां खोलें, ताकि कमरे में ताजी हवा आ सके और ऑक्सीजन का स्तर बना रहे।
सीधी हवा से बचें- एसी की हवा सीधे शरीर या सिर पर न पड़ने दें। इससे साइनस और मांसपेशियों में दर्द का खतरा बढ़ जाता है।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट