क्या ईरान में खामेनेई सिर्फ मुखौटा………….असली खेल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स खेल रही
क्या ईरान में खामेनेई सिर्फ मुखौटा………….असली खेल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स खेल रही

ईरान में महीने के शुरुआत में हुए विरोध प्रदर्शनों ने एक नया सवाल उठाया है कि असली ताकत किसके हाथ में है। इन प्रदर्शनों को दबाने के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपनी ताकत और प्रभाव को बढ़ाया है। अयातुल्ला अली खामेनेई, जो ईरान के सुप्रीम लीडर हैं, उनका नेतृत्व अब चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि आईआरजीसी अब सिर्फ एक सैन्य संगठन नहीं, बल्कि सत्ता के फैसले लेने और भविष्य तय करने वाली एक प्रमुख ताकत बन चुका है।
1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद स्थापित आईआरजीसी ने ईरान की सुरक्षा, राजनीति और अर्थव्यवस्था में गहरी पैठ बना ली है। इसके पास अपनी सेना, नौसेना, वायु सेना और एक शक्तिशाली खुफिया नेटवर्क है, जिससे यह देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बीते कुछ सालों में, खासकर आर्थिक संकट और वैश्विक प्रतिबंधों के कारण, आईआरजीसी ने अधिक शक्ति हासिल की है। इसके कई पूर्व कमांडर अब सरकारी संस्थाओं और महत्वपूर्ण उद्योगों में उच्च पदों पर हैं, जिससे नागरिक शासन और सैन्य सत्ता के बीच की रेखा धुंधली हो गई है।
ईरान की राजनीति में आईआरजीसी की बढ़ती ताकत ने सत्ता के संतुलन को बदल दिया है। अब राष्ट्रपति और कैबिनेट के पास प्रशासनिक अधिकार हैं, लेकिन प्रमुख रणनीतिक निर्णय आईआरजीसी द्वारा ही लिए जा रहे हैं। यह संगठन, जो पहले सिर्फ सैन्य ताकत के रूप में जाना जाता था, अब ईरान की आंतरिक और बाहरी नीतियों में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
खामेनेई की उम्र 90 साल हो गई है, और उनका उत्तराधिकारी कौन होगा, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है। आईआरजीसी को एक ऐसी संस्था के रूप में देखा जा रहा है, जो राजनीतिक स्थिरता और निरंतरता को बनाए रखने में सक्षम है। इसलिए, ईरान का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि आईआरजीसी की शक्ति किस हद तक बढ़ती है और वह सत्ता के केंद्रीकरण में कितनी भूमिका निभाता है।
गार्ड्स की प्रभुता उनकी आर्थिक पहुंच से और मजबूत होती है। खतम अल-अंबिया जैसे समूहों के माध्यम से आईआरजीसी ईरान के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और निर्माण क्षेत्रों के विशाल हिस्सों को नियंत्रित करता है। प्रतिबंधों ने इस प्रभाव को कम करने के बजाय अक्सर बढ़ाया है। इसने निजी प्रतिस्पर्धियों को किनारे कर दिया है और गार्ड्स से जुड़े नेटवर्क को लाभ दिया है।
ईरान का भविष्य क्या होगा
ईरान में जैसे-जैसे आर्थिक तनाव और असंतोष बढ़ रहा है, सत्ता की रूपरेखा को लेकर भी चिंता गहरा रही है। तेहरान का भविष्य शायद इस बात पर कम निर्भर करेगा कि वरिष्ठ राजनीतिक पदों पर कौन बैठता है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खुद को जिस मजबूती से स्थापित किया है, उससे कहा जा सकता है कि उनका रोल अहम होने वाला है।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट