एयर इंडिया का अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बड़ा फैसला: जुलाई तक विदेशी फ्लाइट्स की संख्या में होगी भारी कटौती
एयर इंडिया का अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बड़ा फैसला: जुलाई तक विदेशी फ्लाइट्स की संख्या में होगी भारी कटौती
मुंबई, एयर इंडिया ने जुलाई 2026 तक अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बड़ी कटौती करने का निर्णय लिया है। एयरलाइन के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर कैंपबेल विल्सन ने स्टाफ को भेजे एक संदेश में स्पष्ट किया कि पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव के कारण हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) पर लगी पाबंदियों और जेट फ्यूल की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने परिचालन को मुश्किल बना दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय रूट पर विमानों को लंबे रास्तों से उड़ान भरनी पड़ रही है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है और इन रूट्स पर फ्लाइट ऑपरेट करना अब कंपनी के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
सीईओ विल्सन ने बताया कि अप्रैल और मई में पहले ही कुछ उड़ानें कम की जा चुकी हैं, लेकिन मौजूदा चुनौतीपूर्ण स्थितियों को देखते हुए जून और जुलाई के शेड्यूल में भी कटौती करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने और मिडिल ईस्ट की अस्थिरता के कारण एयरलाइन के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। विल्सन ने यात्रियों के यात्रा प्लान और क्रू मेंबर्स के रोस्टर में होने वाली इस असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि मध्य पूर्व की स्थिति जल्द सामान्य होगी ताकि परिचालन फिर से सुचारू किया जा सके।
विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का अनुमान है कि एयर इंडिया ग्रुप को 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी नुकसान हुआ है। ईंधन की कीमतों में अस्थिरता और लंबे रूट के कारण परिचालन लागत में करीब 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। विल्सन, जिन्होंने इस साल के अंत में पद छोड़ने की घोषणा की है, ने संकेत दिया कि एयरलाइन अब केवल उन्हीं रूट्स पर ध्यान केंद्रित करेगी जो आर्थिक रूप से व्यावहारिक हैं। इस फैसले से विदेशों में यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों और व्यापारिक यात्रियों को टिकट बुकिंग में समस्याओं और बढ़े हुए किराए का सामना करना पड़ सकता है।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट