बड़ी खबर: ईरान युद्ध के चलते श्रीलंका में गहराया ऊर्जा संकट, बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी के साथ जारी हुए सख्त दिशा-निर्देश, शाम 6 बजे से बंद रहेंगी स्ट्रीट लाइटें

बड़ी खबर: ईरान युद्ध के चलते श्रीलंका में गहराया ऊर्जा संकट, बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी के साथ जारी हुए सख्त दिशा-निर्देश, शाम 6 बजे से बंद रहेंगी स्ट्रीट लाइटें

कोलंबो, 01 अप्रैल । पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध की वजह से श्रीलंका की अर्थव्यवस्था एक बार फिर संकट के मुहाने पर खड़ी है। सार्वजनिक उपयोगिता आयोग (PUCSL) ने आज 1 अप्रैल से बिजली की कीमतों में 8.5 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का फैसला किया है। आयोग के चेयरमैन केपीएल चंद्रलाल ने स्पष्ट किया कि यद्यपि सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने और अधिक वृद्धि का प्रस्ताव दिया था, लेकिन जनता की दिक्कतों को देखते हुए इसे फिलहाल सीमित रखा गया है। नई दरों के अनुसार, 180 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को अब 25 प्रतिशत तक अधिक बिल का भुगतान करना होगा, जिससे आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ना तय है।

ईंधन की भारी कमी और बढ़ती लागत को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने पूरे देश में ऊर्जा बचत के सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के मुताबिक, सभी सरकारी संस्थानों में दोपहर 3 बजे के बाद एयर कंडीशनर (AC) चलाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही, विज्ञापन होर्डिंग्स को रात 8 बजे तक बंद करना होगा और स्थानीय परिषदों को शाम 6 बजे से रात 10 बजे के बीच सड़कों की लाइटें बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 100 से अधिक लोगों की उपस्थिति वाले किसी भी कार्यक्रम के लिए राष्ट्रीय ग्रिड की बिजली के उपयोग पर रोक लगा दी गई है, ताकि ग्रिड पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।

श्रीलंका सरकार ने स्वीकार किया है कि ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश में ईंधन की राशनिंग के लिए पहले ही ‘क्यूआर कोड’ प्रणाली लागू की जा चुकी है, और अब कच्चा तेल प्राप्त करने के लिए रूस के साथ बातचीत की जा रही है। युद्ध का सीधा असर श्रीलंका के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा है; मार्च महीने में पर्यटकों के आगमन में 18 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में बिजली और ईंधन की कीमतों में एक और बड़ा संशोधन करना पड़ सकता है।

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