दिल्ली पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार हैंडलर शब्बीर अहमद लोन को किया गिरफ्तार, मेट्रो पोस्टर केस के जरिए राजधानी को दहलाने की बड़ी आतंकी साजिश का हुआ पर्दाफाश

दिल्ली पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार हैंडलर शब्बीर अहमद लोन को किया गिरफ्तार, मेट्रो पोस्टर केस के जरिए राजधानी को दहलाने की बड़ी आतंकी साजिश का हुआ पर्दाफाश

नई दिल्ली, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल/एनडीआर की टीम ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सक्रिय मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। टीम ने इस नेटवर्क के मुख्य हैंडलर शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार किया है, जो हाल ही में हुए ‘मेट्रो पोस्टर केस’ के जरिए राजधानी में दहशत फैलाने की साजिश रच रहा था। जांच में सामने आया कि शब्बीर और उसके साथी दिल्ली मेट्रो परिसर व सार्वजनिक स्थानों पर संदिग्ध पोस्टर लगाकर माहौल खराब करने और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के मिशन पर थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस गिरफ्तारी ने दिल्ली में अस्थिरता पैदा करने के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कमर तोड़ दी है।

शब्बीर अहमद लोन का आपराधिक इतिहास बेहद चौंकाने वाला है; वह पहले भी आतंकवाद के मामले में दस साल जेल काट चुका है और 2019 में जमानत मिलने के बाद बांग्लादेश भाग गया था। खुफिया जानकारी के अनुसार, शब्बीर सीधे तौर पर 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी के संपर्क में था। उसे भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की भर्ती करने और उन्हें ‘ब्रेनवॉश’ कर आतंकी विचारधारा से जोड़ने का जिम्मा सौंपा गया था। वह दलालों के जरिए घुसपैठियों के फर्जी आधार कार्ड बनवाता था और उन्हें हमले के लिए हथियार मुहैया कराने की योजना पर काम कर रहा था।

पुलिस द्वारा पूर्व में गिरफ्तार किए गए आठ अन्य आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यह मॉड्यूल किसी प्रसिद्ध मंदिर या भारी भीड़भाड़ वाले इलाके को निशाना बनाने की फिराक में था। शब्बीर अहमद लोन के पास से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं, जो विदेशी फंडिंग और सीमा पार बैठे आकाओं से उसके संबंधों की पुष्टि करते हैं। इस बड़ी सफलता के बाद पूरी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को हाई-अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस अब उन दलालों और स्थानीय मददगारों की तलाश कर रही है जो फर्जी पहचान पत्र बनाने में इस आतंकी मॉड्यूल की मदद कर रहे थे।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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