सोनिया गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

सोनिया गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

नई दिल्ली, 13 अप्रैल । कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लेख के माध्यम से केंद्र सरकार के आगामी विशेष सत्र और परिसीमन (डिलिमिटेशन) के प्रस्तावों पर कड़ा प्रहार किया है। गांधी ने कहा कि इस समय देश के सामने असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि सरकार द्वारा लाया जा रहा परिसीमन का प्रस्ताव है, जिसे उन्होंने “बेहद खतरनाक” और “संविधान पर हमला” करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने वाला कोई भी परिसीमन केवल गणितीय आंकड़ों पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि वह राजनीतिक रूप से न्यायसंगत और पारदर्शी होना चाहिए ताकि किसी राज्य के साथ अन्याय न हो।

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार का असली इरादा जाति जनगणना को पटरी से उतारना और इसमें और देरी करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिहार और तेलंगाना जैसे राज्य छह महीने के भीतर जाति सर्वेक्षण करा सकते हैं, तो केंद्र सरकार इसे टाल क्यों रही है? महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसे तुरंत 2024 से लागू करने की विपक्ष की मांग को सरकार ने अनसुना कर दिया। गांधी ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री को इस दिशा में “यू-टर्न” लेने में 30 महीने क्यों लगे और अब इसे 2029 तक के लिए क्यों टाला जा रहा है।

विपक्ष के साथ चर्चा न करने और विशेष सत्र बुलाने की जल्दबाजी पर गांधी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी राज्यों (तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल) के व्यस्त समय का फायदा उठाकर महत्वपूर्ण बिलों को बिना सहमति के “बुलडोजर” की तरह पास कराना चाहती है। गांधी ने कहा कि अब तक सांसदों के साथ कोई आधिकारिक प्रस्ताव साझा नहीं किया गया है, जो प्रधानमंत्री के “मेरी मर्जी या हाईवे” वाले कार्य करने के तरीके को दर्शाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जनगणना में देरी के कारण 10 करोड़ से अधिक लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के लाभों से वंचित हो गए हैं।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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