भारत की पहली डिजिटल जनगणना की रूपरेखा आज होगी जारी, ‘लिव-इन’ जोड़ों को मिलेगा शादीशुदा का दर्जा और खुद जानकारी भरने के लिए ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ पोर्टल की मिलेगी सुविधा
भारत की पहली डिजिटल जनगणना की रूपरेखा आज होगी जारी, ‘लिव-इन’ जोड़ों को मिलेगा शादीशुदा का दर्जा और खुद जानकारी भरने के लिए ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ पोर्टल की मिलेगी सुविधा
नई दिल्ली, रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण आज दोपहर नई दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। इस ब्रीफिंग में देश की आगामी जनगणना प्रक्रिया की विस्तृत रूपरेखा पेश की जाएगी। आयुक्त ने प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही अधिकारियों को डेटा के गलत इस्तेमाल या लापरवाही बरतने पर कड़ी चेतावनी दी है। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत किसी भी प्रकार की अनियमितता, नागरिकों से अनुचित सवाल पूछना या कार्य में रुकावट डालने को अपराध माना गया है, जिसके लिए 1,000 रुपये के जुर्माने से लेकर तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।
आगामी 2027 की जनगणना में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा, जहां पहली बार ‘लिव-इन’ जोड़ों को औपचारिक तौर पर शादीशुदा जोड़ों की श्रेणी में रखा जाएगा। पोर्टल पर स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई जोड़ा साथ रह रहा है और अपने रिश्ते को ‘स्थिर’ मानता है, तो उन्हें जनगणना के आंकड़ों में विवाहित जोड़ा ही माना जाना चाहिए। यह पहली बार है जब भारतीय जनगणना के इतिहास में इस तरह का प्रगतिशील और औपचारिक रुख अपनाया गया है। इस डिजिटल कवायद में नागरिक ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ सिस्टम के जरिए अपनी जानकारी स्वयं ऑनलाइन जमा कर सकेंगे, जिससे प्रगणकों (Enumerators) पर निर्भरता कम होगी और डेटा सटीकता बढ़ेगी।
जनगणना का पहला चरण ‘हाउसलिस्टिंग’ (घरों की सूची बनाना) 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरा किया जाएगा। इस चरण के दौरान प्रश्नावली में कुल 33 सवाल शामिल होंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य देश के हर घर का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना है। इसमें एक प्रमुख सवाल घर में रहने वाले शादीशुदा जोड़ों की संख्या से संबंधित होगा। यह प्रक्रिया लगभग 45 दिनों तक चलेगी, जिसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार अलग-अलग समय-सीमा निर्धारित की जाएगी। इस पूरी कवायद का उद्देश्य देश की बदलती सामाजिक संरचना और जनसंख्या की वास्तविक स्थिति का डिजिटल पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करना है।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट
