बिहार में सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ सम्पन्न

बिहार में सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ सम्पन्न

पटना, 25 मार्च। बिहार में उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही सूर्योपासना का महापर्व चैती बुधवार को छठ सम्पन्न हो गया। बिहार में चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था का महापर्व ‘चैती छठ’ 22 मार्च से शुरू हुआ। साल में दो बार चैत्र और कार्तिक महीने में शुक्लपक्ष में महापर्व छठ व्रत होता है, जिसमें श्रद्धालु भगवान भास्कर की अराधना करते हैं।छठ महापर्व के चौथे और अंतिम दिन आज राजधानी पटना समेत राज्य के अन्य हिस्सों में हजारों महिला और पुरुष व्रतधारियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। दूसरा अर्घ्य अर्पित करने के बादश्रद्धालुओं का 36 घंटे का निराहार व्रत समाप्त हुआ और उसके बाद ही व्रतधारियों ने अन्न ग्रहण किया। चार दिवसीय इस महापर्व के तीसरे दिन कल व्रतधारियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया था।
इस बीच औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल देव के पवित्र सूर्य कुंड में चैती छठ व्रत के अवसर पर आज सुबह आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। श्रद्धालुओं ने देव के कथित त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में कतारबद्ध होकर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की और सूर्य कुंड में भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया।
लोक मान्यता है कि छठ व्रत के अवसर पर देव में श्रद्धालुओं कोभगवान भास्कर की साक्षात उपस्थिति की रोमांचक अनुभूति होती है और अत्यंतप्राचीन सूर्य मंदिर में आराधना करने से मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति होती है।
गया जी से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के अंतिम दिन आज श्रद्धालुओं ने उदयीमान सूर्य को अर्घ्य दिया। इसे लेकर शहर के दूर-दूर के क्षेत्र से छठव्रती फल्गु नदी पहुंचे, जहां पितामहेश्वर घाट, केंदुई घाट, झारखंडे घाट, राय बिंदेश्वरी घाट सहित अन्य घाटों पर छठव्रतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया।इस दौरान पूरे धार्मिक अनुष्ठान के साथ पूजापाठ की गई। छठव्रती के साथ उनके परिजन भी बड़ी संख्या में फल्गु नदी के विभिन्न घाटों पर पहुंचे थे।श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखने को मिली।श्रद्धालुओं ने सुख, समृद्धि एवं शांति को लेकर भगवान सूर्य से प्रार्थना की। महापर्व का आज समापन हो गया।
गौरतलब है कि चार दिवसीय यह महापर्व नहाय खाय से शुरू होता और उस दिन श्रद्धालु नदियों और तलाबों में स्नान करने के बाद शुद्ध घी में बना अरवा भोजन ग्रहण करते हैं। इस महापर्व के दूसरे दिन श्रद्धालु दिन भर बिना जलग्रहण किये उपवास रखने के बाद सूर्यास्त होने पर पूजा करते हैं और उसके बाद एक बार ही दूध और गुड़ से बनी खीर खाते हैं तथा जब तक चांद नजर आये तब तक ही पानी पीते हैं। इसके बाद से उनका करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

Related Articles

Back to top button