कहानी: इजहार…

कहानी: इजहार…

-सपना मांगलिक-

निक्की एक 12 साल कि ख्वाबों ख्यालों में रहने वाली एक साधारण लड़की थी उसके कम बोलने कि आदत के कारण उसके बहुत कम दोस्त थे। जिसकी वजह से निक्की अपने आपको बहुत अकेला और कमतर आंकती थी। एक दिन उसने देखा कि उसके घर से थोड़ी दूर वाले फ्लैट में दो गाड़ियों में से कुछ लोग सामान उतार रहे हैं पूछने पे पता चला कि वो लोग किसी दूसरे शहर से आये हैं और अब यहीं रहेंगे ये घर भी उन्होंने ही खरीद लिया है उस परिवार में माता पिता के अलावा एक उसकी ही उम्र का लड़का भी था दिखने में गोरा चिट्टा पर शर्मीला सा नाम था उसका राजू। राजू कि माताजी ने निक्की से उसका नाम और कक्षा के बारे में पूछा फिर मुस्कुराते हुए बताया कि उनका बेटा राजू भी उसकी ही उम्र का है और उसके ही स्कूल में एडमिशन लेने वाला है। राजू कि माताजी ने निक्की से कहा-बेटा हमारा राजू बहुत शर्मीला है जल्द ही किसी से घुलता-मिलता नहीं है। वैसे भी ये शहर उसके लिए नया है और वो यहां किसी को नहीं जनता तो तुम्हें जब भी वक्त मिले इसके साथ खेलने के लिए यहां आ जाया करो राजू का भी मन लग जाएगा।

निक्की राजू की माताजी को मना नहीं कर पायी और उसके मुंह से निकल ही गया-जी आंटी जरूर इतना कह निक्की वाहन से अपने घर चली गयी।

दूसरे दिन निक्की जब स्कूल में गयी तो हैरान रह गयी कल बाला लड़का राजू उसका एडमिशन भी निक्की कि ही क्लास में और निक्की के ही बी सेक्शन में हुआ। दोनों ने एक दूसरे को देख मुस्कराहट का आदान-प्रदान किया। और जब लंच का समय हुआ तो निक्की राजू के पास जाकर बोली-राजू कैसा लगा तुम्हें हमारा स्कूल?राजू ने कहा-अच्छा तो है लेकिन यहां मेरा कोई दोस्त नहीं जिससे मैं बातें कर सकूं जयपुर में तो अमित और विशाल थे उनसे मेरा मन लग जाता था पर यहां में एकदम अकेला हूं।

निक्की-बस इतनी सी बात, फिर अपना हाथ आगे बढाते हुए बोली राजू मुझसे दोस्ती करोगे?

राजू ने भी उसका हाथ पकड़ अपनी मौन स्वीकृति दे दी। अब तो दोनों घर से साथ ही स्कूल से घर लौट के आते और इतवार के दिन भी साथ साथ शतरंज और कैरम खेलते या फिर बहार पार्क में बतियाते। दोनों ही अपने दिल कि हर बात एक दूसरे से शेयर करने लगे थे और राजू भी स्कूल में या पढाई में निक्की को कोई भी समस्या होने पर उसकी मदद बड़ी तत्परता से करता। समय ने पंख लिए और दो साल बीत गए राजू और निक्की कि मित्रता और भी गहरी होती चली जा रही थी।

एक दिन निक्की बोली-राजू क्या तुम किसी लड़की के प्रति आकर्षित हुए हो?राजू शरमाते हुए-ये कैसा सवाल कर रही होनिक्की-बताओ ना राजू हमने प्रोमिस किया था ना एक दूसरे के साथ सारी बातें शेयर करेंगेराजू-नहीं अबतक तो नहीं, तुमने कभी किसी को पसंद किया?

निक्की-(नजरें झुकाते) हुए-मेरी जैसी साधारण सी दिखने वाली लड़की को कौन पसंद करेगा।

राजू-निक्की तुम ऐसा क्यों बोल रही हो तुम बहुत अच्छी हो जितना साथ तुम मेरा देती हो वैसा कोई भी नहीं देता ना स्कूल में ना ही घर में मुझे तो तुम साधारण नहीं असाधारण दिखती हो एकदम परियों कि रानी के जैसी जो छड़ी घुमाकर मेरी हर मुश्किल दूर कर देती है।

निक्की-फिर विवेक ने मेरा मजाक बनाकर अपमानित क्यूं किया। पता है राजू तुम्हारे आने से पहले में विवेक को पसंद करती थी और जब मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हें पसंद करती हूं तो उसने अपने दोस्तों के सामने मेरा मजाक बनाया कहा-पहले घर जा कर आइना देखो एकदम बंदरिया दिखती हो।

तुम ही बताओ राजू क्या में इतनी बुरी दिखती हूं, ऐसा कहकर निक्की राजू के गले से लगकर रोने लगी और राजू भी बड़े प्यार से उसकी पीठ थपथपा कर उसे हौसला दे रहा था। राजू-अरे नहीं निक्की तुम तो बहुत प्यारी सी गुडिया हो तुम्हारी मुस्कान बहुत प्यारी है एकदम शालीन और सच्ची और रही बात विवेक कि तो वह खुद एक बन्दर है और बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद।

राजू कि बात सुन निक्की रोते-रोते हंस पड़ी। उसे हस्त देख राजू भी हंसने लगा और दोनों हाथ में हाथ डाल वापस घर कि तरफ चल पड़े।

राजू और निक्की समय के साथ बहुत ही पक्के दोस्त बन गए उनके परिवार वाले दोनों को दो हंसों का जोड़ा कहकर बुलाते थे। दोनों एक दुसरे के साथ अपने मन कि सुख, दुःख कि हर बात बांटा करते थे लेकिन निक्की ने उससे हमेशा अपने मन कि एक बात छुपाई और वो ये कि वह राजू से बहुत प्यार करने लगी थी, राजू भी विवेक कि तरह उसका प्यार ना ठुकरा दे इस डर से उसने राजू को अभी तक कुछ नहीं बताया। इसी दिन पर दिन गहरी होती दोस्ती के साथ दोनों ने स्नातक भी पास कर लिया। अब निक्की ने सोचा कि ये सही बक्त है राजू से अपने प्यार का इजहार करने का यही सोच उसने राजू का मोबाइल नंबर मिलाया। दूसरी तरफ से राजू कि बेसब्री भरी आवाज सुनाई दी-हेलो निक्की आज में तुम्हें एक जरूरी बात बताने वाला हूं तुम जल्दी से पार्क आ जाओ वही बात करेंगे बाय।

निक्की कि खुशी का ठिकाना ना रहा वो समझी कि राजू भी उसकी ही तरह उससे अपने प्यार का इजहार करना चाहता है, निक्की उस दिन बहुत देर लगाकर तैयार हुई घर से दो कदम कि दूरी वाले पार्क के लिए वो इतना सज संवर रही थी। अंत में अपने को एक बार और शीशे में निहार कर वो पार्क कि तरफ चल दी। वहां राजू पहले से ही बैठा हुआ था। निक्की को देख बोला-अरे निक्की बहुत देर लगा दी तुमने क्या कर रही थीनिक्की कुछ नहीं राजू बस देर हो गयी कह इंतजार करने लगी कि राजू उसे कहे कि वह आज बहुत सुन्दर लग रही है या जो बात यानि प्यार का इजहार करे जिसके लिए उसने उसे यहां बुलाया है। लेकिन राजू ने जो कहा उसे सुनकर निक्की के परों तले जमीन खिसक गयी।

राजू-(उत्साहित हो )निक्की तुम्हें पता है मुझे बेंगलौर पपउ में प्रवेश मिल गया है और कल ही में बेंगलौर के लिए निकल रहा हूं मैंने सबसे पहले ये बात तुम्हें बताई क्यूंकि मुझे पता है कि इस खबर से मुझसे भी ज्यादा तुम खुश होंगी।

निक्की अपने आपको संयत करते हुएवाह राजू ये तो बहुत अच्छी खबर है मुझे तुम पर गर्व है जिंदगी में तुम कामयाबी की मिसाल बनो।

राजू-तो कल तुम मुझे एअरपोर्ट तक आ रही हो ना विदा करने, निक्की ने सहमति में सर हिलाया और निक्की राजू से घर पे जरूरी काम का बहाना बना वाहन से वापस आने लगी जैसे ही वो मुडी राजू-निक्की आज तुम बहुत सुन्दर लग रही होलेकिन अब निक्की को इस तारीफ से कोई खुशी नहीं हुई क्यूंकि उसका प्यार उससे दूर जो जा रहा था।

दूसरे दिन निक्की राजू को उसकी परिवार के साथ विदा करने गयी दोनों ने एक दूसरे को पत्र लिखते रहने का वादा किया। निक्की ने भी अपनी आगे कि पढ़ाई जारी कि उसने फैशन डिजायनिंग का कोर्स शुरू किया। राजू के शुरू में तो हर सप्ताह पत्र आते थे लेकिन छः माह के बाद वो महीने और साल के अंत तक कभी कभी आने लगे। दो साल बाद राजू का पत्र मिला कि उसकी एम बी ए पूरी हो गयी है और वहीं बेंगलौर में उसकी नौकरी भी लग गयी है। इस बार भी निक्की ने चाहकर भी अपने दिल कि बात राजू से नहीं कि। ऐसे ही दो और साल गुजर गए निक्की ने अपना एक बुटीक खोल लिया जो खूब अच्छे से चल रहा था निक्की और राजू का इस बीच कोई संपर्क नहीं रहा। निक्की ने भी अपने आपको बुटीक में मशगूल कर लिया और मम्मी-पापा के शादी के आग्रह को भी निक्की बार-बार इस आशा से ठुकराए जा रही थी कि शायद राजू उससे प्यार का इजहार करे।

एक दिन अचानक ही राजू कि मम्मी का फोन निक्की कि मम्मी के पास आया कि राजू कि शादी अगले सप्ताह तय हुई है निक्की को कुछ दिन के लिए बेंगलौर भेज दीजिए वो राजू कि बचपन कि दोस्त है अगर शादी में वही हंगामा नहीं करेगी तो और कौन करेगा। फिर राजू का भी फोन निक्की के पास आया की उसकी हवाई जहाज कि टिकिट कुरियर कर दी है। निक्की ने राजू को आश्वासन दिया कि वो उसकी शादी में जरूर आएगी और खूब नाचेगी भी। फोन रखने के बाद निक्की खूब जोर जोर से रोने लगी रोये भी क्यों ना उसकी आखिरी आस ने भी अब दम तोड़ दिया था।

खैर निक्की दिल पे पत्थर रख बेंगलौर गयी वाहन राजू से ऐसे मिली जैसे बचपन में मिला करती थी राजू और निक्की खूब बातें बनाते शादी वाले घर कि कई जिम्मेदारियों को निक्की ने एक परिवार के सदस्य कि तरह संभाला। राजू कि शादी वाले दिन बारात में जम के नाची भी लेकिन इस मुस्कराहट और नाच के पीछे छिपा गम राजू एक बार भी नहीं पहचान पाया जब निक्की ने राजू और उसकी पत्नी श्वेता को एक दूसरे के वरमाला डालते देखा तो उसका अंतर्मन तड़प उठा। शादी के दूसरे दिन राजू और उसके परिवार से विदा लेते वक्त निक्की से राजू बोला-निक्की थोड़े दिन और रुक जाओ नानिक्की-राजू अभी तो में जा रही हूं लेकिन दोबारा जब आउंगी तब तुम एक प्यारे से बेबी के पापा बन जाओगेराजू उसकी बात सुन शर्मा गया, और घर के सभी लोग खिलखिला पड़े।

बेंगलौर से आने के बाद कुछ दिन तक निककी का मन बुटीक के किसी भी काम में नहीं लगा ममी पापा ने घुमाफिरा के उससे फिर से शादी कि बात करनी चाही तो उसने झुंझला के उन्हें कभी शादी ना करने की अपनी भीष्म प्रतिज्ञा सुना दी, मम्मी पूछ-पूछ कर हार गयी उसके फैसले कि वजह लेकिन निक्की ने उन्हें कुछ ना बताया। इसके बाद आठ साल और बीत गए ना राजू का कोई फोन उसके पास आया ना ही उसने किया लेकिन एक दिन जब वह अपने बुटीक में टेलर को कुछ समझा रही थी तभी उसके पास राजू का फोन आया, निक्की के हेल्लो कहते ही राजू बच्चों कि तरह फूट-फूटकर रो पड़ा, निक्की-क्या हुआ राजू सब ठीक तो है?राजू-निक्की मेरा तलाक हो गया में बिलकुल अकेला हो चुका हूं जीने कि कोई वजह नजर नहीं आ रहीकहते हुए राजू फिर रोने लगा।

निक्की-राजू ऐसे हिम्मत मत हारो मुझे पूरी बात बताओ कैसे हुआ ये सब वो भी इतने साल बाद?

राजू-मैं कल तुम्हारे पास आ रहा हूं मिलकर बताऊंगा, दूसरे दिन कि फ्लाईट से राजू वाहन आ गया निक्की के गले लग फिर रोया शादी टूटने कि वजह उसने सामंजस्य का ना होना बताया।

राजू बहुत ज्यादा अवसाद ग्रस्त नजर आ रहा था निक्की ने उसे कुछ दिन वही रुकने का आग्रह किया। राजू ने उसका आग्रह मान लिया अब रोज निक्की और राजू घूमने जाते निक्की उसे अवसाद से निकलने कि पूरी-पूरी कोशिश में लगी थी और 2-3 दिन में ही उसकी मेहनत रंग लाने लगी राजू का मुरझाया चेहरा दोबारा खिल उठा वो भी हंसने चहकने लगा, राजू के सामीप्य में निक्की को महसूस होता कि भगवां ने राजू को शायद उसी के लिए दोबारा भेजा है, लेकिन इस बार भी मौके कि नजाकत देख निक्की अपने दिल का हाल राजू को ना बता सकी। 15 दिन वाहन रुकने के बाद जब राजू नोर्मल हो चुका था तो उसने निक्की से वापस जाने कि बात कही क्यूंकि उसकी छुट्टियां खत्म हो चुकी थी अगर ज्यादा अवकाश लिया तो उसकी नौकरी चली जायेगी, निक्की ने भरी मन से राजू को विदा किया राजू के जाने के बाद निक्की फिर से अकेली हो गयी।

राजू के जाने के लगभग सात दिन बाद बेंगलौर से फोन आया कि राजू ने आत्महत्या कर ली है। और वह एक वसीयत भी बनाकर गया है जो तभी पढ़ी जायेगी जब निक्की वहां आ जायेगी।

राजू के घरवालों ने निक्की से राजू की अंतिम इच्छा पूरी करने का आग्रह किया। निक्की राजू की इस अंतिम इच्छा के लिए और आत्महत्या का असली कारण जानने के लिए वहां के लिए रवाना हुई। वहां जाके देखा एक हौल में राजू के परिवार वाले और उसकी पत्नी श्वेता वहां बैठे हैं निक्की के पहुंचने पर वकील साहब को भी बुलवा लिया गया। थोड़ी देर शांत रहने के बाद निक्की ने श्वेता से उसके तलाक की वजह पूछी और उसने जो वजह बताई उसे सुन निक्की सन्न रह गयी श्वेता के अनुसार राजू और उसके बीच कभी पति-पत्नी वाले रिश्ते नहीं रहे क्यूंकि राजू शादी से पहले किसी और से प्रेम करता था उसने श्वेता को उस लड़की का नाम तो नहीं बताया लेकिन ये जरूर कहा कि अब वह किसी और से प्यार नहीं कर पायेगा। श्वेता आठ साल तक जोगन कि तरह राजू के प्यार को पाने का जतन और उम्मीद करती रही इन आठ सालों में राजू उसका दोस्त तो बना लेकिन पति नहीं बन पाया हारकर उसने ये अनचाही शादी तोड़ने का निर्णय ले लिया आज यहां वह भी राजू के वसीयत के आग्रह पर ही आई है। श्वेता कि बात निक्की को अंदर तक हिला गयी लेकिन इससे पहले वो कुछ सोचे वकील साहब वसीयत पढ़ने के लिए आ चुके थे।

वकील साहब ने वसीयत के अनुसार राजू कि संपत्ति का हकदार उसके माता पिता और पूर्व पत्नी श्वेता को आधा-आधा बताया और निक्की के नाम एक लाल डायरी और एक पत्र था, निक्की ने कांपते हाथों से पत्र खोला और पढ़ने लगी उसमें राजू ने लिखा-प्रिय निक्की जो बात में तुमसे कई बार कहना चाह रहा था और अपने जीते जी ना कह पाया आज वो तुम्हें लिखकर बता रहा हूं।

शायद जब यह पत्र मिलेगा तो मैं इस दुनिया में नहीं होऊंगा निक्की बचपन से मैं एक प्यारी सी लड़की को प्रेम करता था और जब भी अपनी प्रेमिका और पत्नी के बारे में सोचता मुझे उसी लड़की का चेहरा दिखाई देता और वो लड़की तुम हो निक्की। मैंने कई बार तुमसे अपने प्यार का इजहार करना चाहा लेकिन तुम मुझे मना ना कर दो और हमारी दोस्ती ना टूट जाए इस डर से मैं तुम्हें नहीं कह पाया, आज मैं ये बात कह रहा हूं लेकिन तुम्हारा नाराज होना मैं नहीं सह पाउंगा इसलिए ये दुनिया छोड़कर जा रहा हूं मुझसे कोई गलती हुई हो तो माफ करना ये लाल डायरी में तब तब लिखता था जब मैं तुमसे प्रेम का इजहार करना चाहता था और बिना कहे रह जाता तुम इसे पढ़ लेना और श्वेता से कहना मुझे माफ कर दे मेरी वजह से उसकी जिंदगी के आठ साल बर्बाद हो गए, अलविदा।

(साभार: रचनाकार)

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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