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	<title>लाइफस्टाइल &#8211; Deedar-E-Hind | Hindi News Portal</title>
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	<description>Hindi News Portal &#38; Urdu NewsPaper</description>
	<lastBuildDate>Mon, 16 Mar 2026 09:08:36 +0000</lastBuildDate>
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		<title>वर्कलोड के साथ भी रहें सेहतमंद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 09:08:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्कलोड के साथ भी रहें सेहतमंद लंबे-लंबे काम के घंटे, घंटों बैठकर या खड़े रहकर काम करने की मजबूरी, काम की अधिकता, खाने का अनिश्चित समय इन सबके बीच एक सेहतमंद रह पाने की कल्पना कर पाना भी शायद मुश्किल है। लेकिन क्या आपको पता है कि छोटे-छोटे प्रयासों और बदलावों के जरिए आप वर्कलोड &#8230;]]></description>
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<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">वर्कलोड के साथ भी रहें सेहतमंद</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="300" height="168" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-16T143745.384.jpg" alt="" class="wp-image-127066" /></figure>



<p>लंबे-लंबे काम के घंटे, घंटों बैठकर या खड़े रहकर काम करने की मजबूरी, काम की अधिकता, खाने का अनिश्चित समय इन सबके बीच एक सेहतमंद रह पाने की कल्पना कर पाना भी शायद मुश्किल है। लेकिन क्या आपको पता है कि छोटे-छोटे प्रयासों और बदलावों के जरिए आप वर्कलोड के साथ भी अपनी सेहत को बरकरार रख सकते हैं।</p>



<p>डेस्क पर काम करने वाले या नाइट ड्यूटी करने वाले लोग अक्सर यह शिकायत करते हुए मिल जाते हैं कि उन्हें अपनी फिटनेस पर ध्यान देने का वक्त नहीं मिल पाता। इन सबके बीच लोग सेहत की अनदेखी करते हैं और कई तरह की समस्याओं से घिरे रहते हैं। इस स्थिति को बदल पाना तो थोड़ा मुश्किल है लेकिन कैसा हो यदि इस स्थिति में रहते हुए भी फिट रहने के सरल रास्ते निकाल लिए जाएं।</p>



<p>डेस्क पर बैठे-बैठे….</p>



<p>कॉफी की जगह ग्रीन टी:- दफ्तर में आपने चाय या कॉफी का जो भी समय तय कर रखा है तो उस समय कैफीन के डोज का ताजगी देने वाली ग्रीन टी से रिप्लेस कर देना सेहतमंद विकल्प होगा। ग्रीन टी में ईजीसीजी नामक केमिकल होता है, जो कोल्ड की स्थिति में मददगार होता है। यह कैलोरी और कैफीन फ्री होती है इसलिए इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है और बॉडी फैट को कम करने में मदद मिलती है।</p>



<p>हेल्दी स्नैक्स:- भोजन करने के कुछ समय बाद स्नैक्स जैसा खाने की इच्छा हो रही हो तो नट्स या सेब जैसे हेल्दी चीजें खाएं।</p>



<p>छोटा-सा आईना:- अपनी डेस्क पर एक छोटा-सा आईना रखें इससे जब भी आप डेस्क पर बैठे-बैठे कुछ अनहेल्दी खा रहे हों तो अगली बार उस पर विचार जरूर करेंगे।</p>



<p>फलों का कटोरा:- शोधों में यह बात सामने आई है कि यदि मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति खाना खाने से पहले फलों या फूलों की खुशबू सूंघ लेते हैं तो उनकी भूख कम हो जाती है, कुछ ऐसा ही प्रयोग दफ्तर में भी किया जा सकता है। अपनी डेस्क पर सेब और केले रखें इससे कुछ मीठा या अनहेल्दी खाने की तलब कम होगी।</p>



<p>थोड़ा-सा प्रयास बर्न करेगा फैट….</p>



<p>गाड़ी पार्क करें थोड़ी दूर पर:- हर काम के लिए बाइक या कार पर चलना मोटापे को बढ़ाने का काम तो करते ही हैं, यदि इसमें थोड़ी बहुत कटौती कर दी जाए तो हर दिन थोड़ी मात्रा में फैट बर्न किया जा सकता है। यूं तो दफ्तर जाने के लिए साइकल की सवारी कर सकते हैं लेकिन यह असुविधाजनक हो सकता है। इसकी बजाय कार या बाइक को अपने दफ्तर से कुछ दूर पार्किंग एरिया में पार्क करें, इससे आपको हर दिन थोड़ा पैदल चलने का मौका मिलेगा और फिटनेस बनी रहेगी। यदि दफ्तर घर से कम दूरी पर हो तो हफ्ते में एक या दो दिन पैदल ही जाएं।</p>



<p>सीढ़ियों से जाएं:- यदि पैदल जाना आपके लिए संभव ना हो तो ऑफिस में लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करें इससे अतिरिक्त फैट बर्न कर पाएंगे।</p>



<p>हर 45 मिनट पर ब्रेक:- लंबे समय तक बैठे रहने से ना केवल पेट के आस-पास चर्बी जमा होने की समस्या हो जाती है बल्कि बैक से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इससे बचने का सबसे सरल उपाय है कि हर 45 मिनट पर 15 मिनट का ब्रेक लें। यह आपके शारीरिक और मानसिक दोनों ही प्रकार की सेहत के लिए अच्छा है। खड़े होने और बैठे रहने के दौरान अपने पोश्चर का भी पूरा ध्यान रखें।</p>



<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट</mark></strong></p>
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		<title>फिटनेस इंस्ट्रक्टर बन लोगों को फिट रखो, कॅरियर बनाओ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 09:07:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[फिटनेस इंस्ट्रक्टर बन लोगों को फिट रखो, कॅरियर बनाओ आधुनिक जीवनशैली ने मानव शरीर और मस्तिष्क पर अकल्पनीय तनाव पैदा किया है। बढ़ती सुविधाओं के साथ शारीरिक कसरत कम होने लगी है जिससे समाज का बड़ा हिस्सा विशेष रूप से शहरी इलाका कई बीमारियों से घिर गया है। मधुमेह, हदृय रोग, मोटापा, हाइपरटेंशन जैसी कई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">फिटनेस इंस्ट्रक्टर बन लोगों को फिट रखो, कॅरियर बनाओ</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="300" height="168" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-16T143456.619.jpg" alt="" class="wp-image-127063" /></figure>



<p>आधुनिक जीवनशैली ने मानव शरीर और मस्तिष्क पर अकल्पनीय तनाव पैदा किया है। बढ़ती सुविधाओं के साथ शारीरिक कसरत कम होने लगी है जिससे समाज का बड़ा हिस्सा विशेष रूप से शहरी इलाका कई बीमारियों से घिर गया है। मधुमेह, हदृय रोग, मोटापा, हाइपरटेंशन जैसी कई बीमारियां कम उम्र में ही होने लगी है। इस जीवनशैली के कारण फिटनेस के क्षेत्र में व्यवसाय का अच्छा अवसर देखने को मिल रहा है। आधुनिक जिम, हेल्थी क्लब्स और फिटनेस सेंटर तेजी से खुल रहे हैं। ऐसे में फिटनेस इंस्ट्रक्टर का रोल बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी जिम्मेदारी प्रशिक्षु को फिट और शेप में बनाए रखने की होती है। जिम रूटीन के अलावा, फिटनेस ट्रेनर्स को उन्हेंम पोश्चर्स, डाइट इनटेक, फूड सप्लीमेंट्स के बारे में भी मार्गदर्शन करना होता है। यानी फिटनेस ट्रेनर का कॅरियर एक अच्छा विकल्प है।</p>



<p>स्टेकप बाय स्टेलप:- यह जरूरी नहीं है कि फिटनेस ट्रेनर के जॉब के लिए किसी प्रतिष्ठित संस्थान से सर्टिफिकेशन चाहिए। हालांकि अपने प्रतियोगियों से टक्कर लेने के लिए क्वॉलिटी ट्रेनिंग जरूरी है। आप संस्थान जैसे इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्टस् साइंसेस, नई दिल्ली, लक्ष्मीबाई नेशनल कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, तिरूवनंतपुरम व ग्वालियर और देशभर में संचालित स्पोर्टस् अथॉरिटी ऑफ (साई) की संस्थाओं में प्रवेश ले सकते हैं। यही नहीं अगर आपके पास फिजिकल एजुकेशन और इससे जुड़े विषयों का अच्छा ज्ञान है तो आप इस क्षेत्र में डॉक्टेरेट डिग्री भी कर सकते हैं।</p>



<p>करें जॉब मार्केट में मूव:- इन दिनों इस फील्ड में जॉब ओपनिंग अच्छी है लेकिन केवल एक अच्छी क्वॉलिफिकेशन ही काफी नहीं है। आपको फिटनेस इंडस्ट्री में होने वाले डेवलपमेंट्स के लिए खुद को अपडेट और अपग्रेड रखना होगा। आप जूनियर इंस्ट्र्कटर की तरह भी एक फिटनेस क्लब में शुरुआत कर सकते हैं। धीरे-धीरे आप संपर्क बनाते जाए और अच्छे जॉब मार्केट में मूव करें। एक अच्छा विकल्प खुद का व्यवसाय शुरू करना है। इसके लिए सही प्लानिंग, फाइनेंशियल सपोर्ट और जबर्दस्त मैनेजमेंट स्किल्स चाहिए।</p>



<p>जल्दे हो शुरुआत:- अगर आप स्कूल के दिनों से ही आपको भी खुद को एक वेल डिफाइन्डह एक्सरसाईज प्रोग्राम अपनाने की जरूरत है। टीनएज सही समय है जब आप जिम में अपनी बॉडी को परफेक्ट शेप दे सकते हैं।</p>



<p>फंडिंग/स्कॉलरशिप:- लक्ष्मीबाई नेशनल कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, तिरूवनंतपुरम योग्य छात्रों को बैचलर्स और मास्टर्स लेवल पर स्कॉलरशिप प्रदान करता है।</p>



<p>जॉब प्रोस्पेक्ट्स:- आम आदमी भी अब फिजिकल फिटनेस और वेलनेस को लेकर जागरूक हो रहा है। इसके साथ ही फिटनेस ट्रेनर्स के लिए कई सारे सुनहर अवसर है। अगर आप सरकारी नौकरी के इच्छुक हैं तो सरकार संचालित संस्थाओं और खेल विभागों में नौकरी पा सकते हैं। स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में ट्रेनर्स के पद भी होते हैं। पोस्टग्रेजुएशन डिग्री लेने वाले फिटनेस इंस्ट्रक्टरर्स विभिन्न कॉलेजों में टीचिंग जॉब भी कर सकते हैं। प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के अवसर फाइव स्टावर होटल से लेकर हेल्थू रिर्सोट, स्पा, स्पोर्टस और फिटनेस क्लब्स तक है। आप खुद का जिम्नेजियम या हेल्थ क्लब संचालित कर सकते हैं या फिर सेलेब्रिटीज के पर्सनल फिटनेस ट्रेनर के रूप में काम कर सकते हैं।</p>



<p>पैकेज:- फिटनेस ट्रेनर का वेतन कुछ पहलुओं पर निर्भर करता है। शुरुआती स्तर पर किसी प्रोफेशनल को ज्यादा वेतन भले न मिले लेकिन समय व अनुभव के साथ उनकी मासिक आय 15 हजार से 25 हजार तक हो सकती है। मल्टीनेशनल फिटनेस चैन में ट्रेनर्स की मासिक आय लाखों में होती है।</p>



<p>कई भूमिकाएं, कई नाम….</p>



<p>फिटनेस इंस्ट्रेक्टकर की भूमिकाएं इस तरह हो सकती है &#8211;</p>



<p>एरोबिक्स इंस्ट्रकटर:- एरोबिक्स एक्सरसाइजेस और रूटीन्स में दक्ष फिटनेस ट्रेनर।</p>



<p>क्लीनिकल एक्सरसाइज स्पेशलिस्ट :- मरीजों के साथ काम करने वाले ट्रेनर जो कि उन्हें शारीरिक बीमारियों से बाहर निकालने में मदद करें।</p>



<p>ग्रुप फिटनेस या जिम इंस्ट्रक्टर:- किन्हीं लोगों के समूह के लिए फिटनेस रूटीन तैयार करने में महारत।</p>



<p>पर्सनल ट्रेनर:- किसी एक क्लाइंट से जुड़ा फिटनेस ट्रेनर जो उनके फिटनेस शेड्यूल, डाइट और ट्रेनिंग पर ध्यान देता है।</p>



<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट</mark></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>जोगन</title>
		<link>http://deedarehind.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%a8-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 09:31:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[जोगन -विजय कुमार सप्पाती- मैं तो तेरी जोगन रे, हे घनश्याम मेरे!तेरे बिन कोई नहीं मेरा रे, हे श्याम मेरे!!मैं तो तेरी जोगन रे, हे घनश्याम मेरे!तेरी बंसुरिया की तान बुलाये मोहेसब द्वारे छोड़कर चाहूं सिर्फ तोहेतू ही तो है सब कुछ रे, हे श्याम मेरे!मैं तो तेरी जोगन रे, हे घनश्याम मेरे!मेरे नैनो में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">जोगन</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="221" height="228" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-15T145915.159.jpg" alt="" class="wp-image-126976" /></figure>



<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">-विजय कुमार सप्पाती-</mark></strong></p>



<p>मैं तो तेरी जोगन रे, हे घनश्याम मेरे!<br>तेरे बिन कोई नहीं मेरा रे, हे श्याम मेरे!!<br>मैं तो तेरी जोगन रे, हे घनश्याम मेरे!<br>तेरी बंसुरिया की तान बुलाये मोहे<br>सब द्वारे छोड़कर चाहूं सिर्फ तोहे<br>तू ही तो है सब कुछ रे, हे श्याम मेरे!<br>मैं तो तेरी जोगन रे, हे घनश्याम मेरे!<br>मेरे नैनो में बस तेरी ही तो एक मूरत है<br>सावंरा रंग लिए तेरी ही मोहनी सूरत है<br>तू ही तो एक युगपुरुष रे, हे श्याम मेरे!<br>मैं तो तेरी जोगन रे, हे घनश्याम मेरे!<br>बावरी बन फिरू, मैं जग भर रे कृष्णा<br>गिरधर नागर कहकर पुकारूं तुझे कृष्णा<br>कैसा जादू है तुने डाला रे, हे श्याम मेरे!<br>मैं तो तेरी जोगन रे,हे घनश्याम मेरे!<br>प्रेम पथ, ऐसा कठिन बनाया, मेरे सजना<br>पग पग जीवन दुखो से भरा, मेरे सजना<br>कैसे मैं तुझसे मिल पाऊं रे, हे श्याम मेरे!<br>मैं तो तेरी जोगन रे, हे घनश्याम मेरे!</p>



<p><mark class="has-inline-color has-vivid-cyan-blue-color"><strong>दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट</strong></mark></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हाकिम जी …</title>
		<link>http://deedarehind.com/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%9c%e0%a5%80-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 09:28:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[हाकिम जी &#8230; -डा. सत्यपाल शर्मा- गांव की रूपवती किशोरी ओखली में धान कूट रही है और काछा पटवारी उसके सामने खिड़की में बैठा उसकी आकर्षक देहभंगिमा को ललचाई नजरों से देख रहा है। जमीन मापने के लिए वह जरीब फेंकता हुआ अर्थभरी खांसी का स्वर करता है। भांदल धार के इस गांव की गोरी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">हाकिम जी &#8230;</mark></strong></p>



<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-red-color">-डा. सत्यपाल शर्मा-</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="235" height="215" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-15T145736.908.jpg" alt="" class="wp-image-126973" /></figure>



<p>गांव की रूपवती किशोरी ओखली में धान कूट रही है और काछा पटवारी उसके सामने खिड़की में बैठा उसकी आकर्षक देहभंगिमा को ललचाई नजरों से देख रहा है। जमीन मापने के लिए वह जरीब फेंकता हुआ अर्थभरी खांसी का स्वर करता है। भांदल धार के इस गांव की गोरी पर उसकी बुरी नजर है। वह गरीब है इसलिए उस पर हाथ मारना उसके लिए मुश्किल नहीं है। वाह रे पटवारी! तुम कभी सुधरोगे भी? जरा सोचो, तुम्हारी यह दागदार छवि पटवारियों के पूरे समुदाय को कलंकित कर रही है। गरीब बेबस महिलाओं की इज्जत लूटने और इनकी बसी-बसाई गृहस्थियों को उजाड़ने का यह सिलसिला कभी थमेगा भी?</p>



<p>चम्बा के इस दूरस्थ गांव में स्थानान्तरित होकर आया पटवारी दिनेश शर्मा सन्ध्या समय जुटने वाली नाच-गाने की महफिलों में अकसर यह लोकगीत सुनता है। यहां के बच्चे-बूढ़े सब नाचते हैं। वक्तकटी और मनोरंजन का यही तो एक साधन है। आयोजक स्कूल मास्टरों को तो आत्मीयता के कारण बुलाते हैं, मगर पटवारी जी को उनके हाकिमाना तेवरों से भय खाने के कारण अपने में शामिल करते हैं और बात-बात में उन्हें हाकिम जी-हाकिम जी कहकर संबोधित करते हैं। पर दिनेश शर्मा पटवारी को उनका यह रवैया कतई पसंद नहीं। वह कहते हैं, मैं सरकारी कर्मचारी हूं। लोगों के काम करने के लिए सरकार ने मुझे यहां भेजा है। मुझे वेतन भी मिलता है और निर्धारित भत्ते भी। इसमें हुकमरानी वाली क्या बात है? वह लोगों को बड़े प्यार से बिठा कर समझाते हैं-देखो भाई लोगो मैं हूं एक साधारण पटवारी, तुम्हारी तरह एक सीधा-सादा इनसान। मैं कोई हीरे-जवाहरात से जड़ा हुआ बुत नहीं हूं कि आप मेरी पूजा करें। मैं सिर्फ एक पटवारी हूं। काम करने के लिए आया हूं। काम बताइये। मेरे बस में होगा तो देर नहीं लगाउंगा, फौरन कर दूंगा। नहीं कर पाऊंगा तो मना कर दूंगा।</p>



<p>यहां न तो अभी पटवारखाना बना है और न पटवारी आवास ही, अतः पटवारी जी गांव के बड़े दुकानदार मेहरो शाह की दुकान के ऊपर बने कच्चे फर्श और सलेट की छाजन वाले कमरे में रहते हैं। स्कूल के एक लड़के ने उन्हें मिट्टी का चूल्हा बना दिया है और लाला जी ने ईंधन का प्रबंध कर दिया है। पटवारी जी को कई घरों से खाने के लिए बुलावा आता है पर वह अपना खाना स्वयं बनाते हैं। नौकरी पर जब लगे थे तो घौर नैतिकवादी पिता जी ने उन्हें कई तरह की ताकीद करके भेजा था। वह पूजा में आलस नहीं करेंगे। अपना खाना खुद बनाएंगे। जवान लड़कियों वाले घर में नहीं रहेंगे और गांव की महिलाओं को माताओं और बहनों की तरह मानेंगे। पटवारी जी ने इन्हीं कारणों से इस अकेले कमरे में डेरा रखा है। इसके फर्श में ही नीचे जाने का दरवाजा है जिसे स्थानीय भाषा में चोभू कहते हैं। रात के समय पटवारी जी फट्टा डालकर चोभू बंद कर लेते हैं ताकि कोई ऊपर न चढ़ आए। दिन के समय वह चोभू को ताला लगा लकड़ी की सीढ़ियों से उतर अपने काम पर निकल जाते हैं।</p>



<p>एक दिन क्या होता है कि एक भरे-पूरे जिस्म वाली नवयुवती के साथ दो-चार होने की नौबत आ जाती है। सन्ध्या का झुटपुटा कुछ-कुछ गहरा गया है। गांव की हलचल मंद पड़ गई है। बिजली-सड़क विहीन यह समूचा अंचल गहरे अंधकार में डूबने के कगार पर है। युवती चोभू का तख्ता हटा ऊपर चढ़ आती है। दिनेश शर्मा भौंचक्के से रह जाते हैं। युवती के हाथ में थाली है जिसमें एक दिया जल रहा है जिसका मद्धम प्रकाश उसके प्रसाधित चेहरे को आकर्षण प्रदान कर रहा है। थाली में सूखा नारियल, थोड़ी-सी दाख और रोली रखी है। पटवारी जी, मैं आपसे मित्री करने आई हूं। युवती ऐसे कहती है जैसे बरसों से परिचित हो। दिनेश शर्मा एक जवान जिस्म को अपने बेहद निकट पा कुछ हकलाते हुए से पूछते हैं, मित्री? वो क्या होती है? आप नहीं जानते-सवाल पूछते हुए स्वयं जवाब दे बैठी-पटवारी जी? पखले हैं, जानेंगे भी कैसे। युवती के ऐसा कहने पर पटवारी जी कुछ हिम्मत जुटा कर कहते हैं-ओ हां, समझा मित्री मतलब मित्र होना। हां समझ गये न? चारपाई के पायताने बैठी हुए युवती कुछ आगे सरकती हुई कहती है तो उसकी दबंगता देख वह कुछ सकपकाते हैं। सोचते हैं फंदा तो नहीं डाला जा रहा मुझ पर, और सहसा पिता जी का रौबीला चेहरा उनके सामने से गुजर जाता है। उनके कहे शब्द कोड़ों की तरह आ टकराते हैं उनके वजूद के साथ। वह अपने में हिम्मत जुटाते हुए कहते हैं-मैं तो भई सबका मित्र हूं। आप लोगों की सेवा के लिए आया हूं, सेवा बताइये। युवती उनके मुंह की ओर ताकती रहती है। पटवारी जी को वह कुछ निराश हुई-सी लगती है, मानों उसका एकाधिकार छिन रहा हो। अतः वह थाली में पांच का नोट रख अपनी मध्यम उंगली से माथे पर रोली का टीका लगा हाथ जोड़कर कहते हैं-आप मित्री करने आई हैं, ठीक है, इसमें कोई बुरी बात नहीं। पर मैंने कहा न कि मैं सबका मित्र हूं और इन सबमें आप भी आ जाती हैं। आप अपना कोई काम लाएंगी तो जरूर करूंगा। आप मित्री करने न आतीं तो भी मैं करता ही।</p>



<p>पटवारी यानी दिनेश शर्मा उच्च शिक्षा प्राप्त युवक है। पिता जी ने बड़े अरमानों के साथ उन्हें पढ़ाया है पर उन्हें लगा है कि उनकी चाहत पूरी नहीं हुई। पड़ोसियों के बच्चे ऊंची नौकरियों पर चले गये हैं। कोई इलेक्ट्रिकल इंजीनियर लगा है तो कोई साफ्टवेयर प्रोफेशनल, कोई होटल मैनेजमेंट में गया है तो कोई कस्टम और कराधान में कमाई कूटने लगा है। दिनेश ने गणित में एमएससी की है और उसके नसीब में आई है पटवारगिरी। पिता जी ने मन मारकर ही हामी भरी है। सोचा है फिलहाल यही सही। पेट पालने का जुगाड़ तो बना। कोई बात नहीं। ऊंची शिक्षा पाए हुए है, हमेशा पटवारी ही तो नहीं रहेगा। ज्यादा नहीं तो तहसीलदार तो बन ही जाएगा कुछ साल बाद।</p>



<p>बड़ी नौकरी न मिलने की बात दिनेश को भी कम नहीं कचोटती। हीनता का भाव भी कभी-कभी उसे पस्त कर जाता है, पर एक विचारशील नौजवान होने के नाते वह एकदम हताश होकर नहीं बैठ जाता। विद्यार्थी जीवन के उसके साथी खूब कमाने लगे हैं। नौकरियां लगते ही सबने गाड़ियां ले ली हैं और फ्लैट बुक करा लिए हैं। पर दिनेश पता नहीं क्या किस्मत लेकर आया है, पहाड़ की कन्दराओं में पड़ा है…</p>



<p>गांव के बुजुर्गवार पग्गड़धारी सन्तराम एक दिन दिनेश शर्मा को टियाले पर कुर्सी लगाए देखते हैं तो उसके पास आ बैठते हैं और बुजुर्गाना लहजे से कहते हैं-जरा संभल कर रहना हाकिम जी। आप नए-नए आए हैं न, इसलिए कुछ भी जानते नहीं। मैं समझा नहीं पंडित जी, जरा खोल कर बताएं बात क्या है? दिनेश के ऐसा पूछने पर वह कहते हैं, बात कुछ नहीं। कहना सिर्फ यही है कि लोग बड़े खबीस हैं। वो रसीलू लुहार है न, वही जो सुबह-सुबह आप के लिए दूध लाता है। हां-हां आता है। कहा है कुछ उसने? दिनेश शर्मा के कुछ सशंक होकर पूछने पर वह कहते हैं-कह रहा था यह पटवारी जी भी अच्छे खुराकी लगते हैं। बहुत बुरा लगा मुझे। आप जैसे जती-सती आदमी को कोई ऐसा कहे, मुझे तो कम से कम अच्छा नहीं लगता। खुराकी? कुछ समझा नहीं पंडित जी, जरा साफ-साफ बताएं न। मुझे खुराकी होने की क्या जरूरत है। पहलवानी तो करता नहीं मैं। दिनेश शर्मा के ऐसा पूछने पर पंडित जी मुस्कुरा कर कहते हैं-आप भी बड़े भोले हैं पटवारी जी। पता नहीं कब समझ पाएंगे इस गांव की भाषा। पटवारी जी सोच में पड़ जाते हैं और फिर सहसा बड़ी बेबाकी से कहते हैं ओ हां समझा कूट भाषा है यह। इस पर पंडित जी उनके खैरखाह बनते हुए से कहते हैं-मैं आपको यही सलाह दूंगा पटवारी जी कि आप इस अकेले डेरे पर न रहें। तो फिर रहूं कहां पंडित जी, पटवारी जी के कुछ चिन्तित हो ऐसा पूछने पर वह कहते हैं-आप मेरे यहां रहें। आपको एक कमरा दे देंगे। भोजन बनाने की तकलीफ भी नहीं करनी पड़ेगी आपको। दिनेश शर्मा सोच में पड़ जाते हैं। कुछ भी जवाब देते नहीं बनता उनसे। दो-टूक जवाब देना भी उन्हें ठीक नहीं लगता। नौजवान लड़कियों वाले घर में रहने का उन्हें सख्त निषेध है। और पंडित जी का घर लड़कियों वाला है। एक दिन वहां उन्हें खाने के लिए बुलाया गया था तभी उन्होंने वहां एक नौजवान लड़की देखी थी जो किसी न किसी बहाने से बार-बार उनके पास से होकर गुजरती थी।</p>



<p>इधर जमीनों के झगड़े-टंटे भी कम नहीं थे। पहले के पटवारियों ने कई काम लटका रखे थे जो अब दिनेश शर्मा को बड़ी तसल्ली और सहज भाव से करने थे। गांव के मास्टर लब्ध राम और कर्मचन्द लुहार के बीच जमीन के एक टुकड़े पर बड़ी खींचतान रहती थी। ऊंची-ऊंची कहासुनी भी हो जाती थी उनके बीच। आषाढ़ के महीने में जब वर्षा की पहली बौछारें पड़तीं, जमीन भाप छोड़ती और फिर तेज बौछारों के बाद बत्तर (जमीन का बिजाई के लिए तैयार होना) हो जाता और मक्की की बुआई के लिए हल चलने शुरू होते तो झगड़ा शुरू हो जाता। खेत की सीमा आगे बढ़ा लेने के एक-दूसरे पर इल्जाम लगते। कोई भी पक्ष दूसरे के दावे को स्वीकार न करता और इस तरह आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो जाते और आगे-पीछे की सब रंजिशों के पिटारे खुलने लगते।</p>



<p>बात पटवारी जी तक पहुंचती और जमीनों के झगड़ों के बीच बच-बचकर चलने वाले दिनेश शर्मा हिम्मत जुटाते। मास्टर लब्ध राम और कर्मचन्द दोनों को पेश होने का संदेश भेजते। उनकी दयानतदारी और नेकनीयती का सब लोहा मानते हैं। इसलिए दोनों पक्षों के लोग निश्चित समय पर हाजिर हो जाते हैं। देखो मास्टर जी और कर्मचन्द जी पटवारी दिनेश शर्मा शुरू करते हैं, आप जानते ही हैं कि जमीनों के झगड़े कैसे तूल पकड़ लेते हैं और इनमें फौजदारी तक की नौबत आ जाती है और फिर हम लोग पीढ़ियों तक वकीलों के हाथों लुटते रहते हैं। झगड़ा शुरू होता है मामूली-सी बात से। जमीन के एक-दो हाथ आगे-पीछे होने की बात होती है। अगर अक्लमंदी से काम लिया जाए तो बात पांच मिनट में खत्म हो सकती है। सही कहा आपने हाकिम जी, सब समवेत स्वर में बोलते हैं, मामला निपटाइये आप। मास्टर लब्धराम और कर्मचन्द आत्मीयतापूर्वक पटवारी जी की बात मान जाते हैं। झगड़े की तो कोई खास वजह ही नहीं होती पटवारी जी, यह तो हमारा बेवजह का अहंकार होता है जो हमें बेचैन किए रहता है, और तकलीफ कौन उठाता है? हम ही न? मास्टर जी के ऐसा कहने पर कर्मचन्द सिर हिला कर समर्थन करता है उनका। उसकी उग्रता एकदम गायब हो जाती है और वह बड़े समझदारी वाले लहजे में कहता है-मामला निपटा ही दीजिए हाकिम जी। यह रोज की खिच-खिच मिट ही जाए तो अच्छा। मास्टर जी को बार-बार छुट्टी लेकर आना पड़ता है और मेरे काम में भी खासा विघ्न पड़ता है। किसान लोग अलग से परेशान होते हैं।</p>



<p>देखिए मास्टर जी और कर्मचन्द जी विजेता की मुद्रा में आ पटवारी जी आत्मविश्वासपूर्वक कहते हैं, यदि तो आप मेरी निष्पक्षता पर यकीन करते हैं तो मैं फैसला कर देता हूं। प्रधान जी भी देख रहे हैं और गांव के चार भलेमानस भी मौजूद हैं। मुझे अगर आप सब इजाजत दें और मेरी बात मानें तो कुछ कहूं? हां-हां, क्यों नहीं पटवारी जी। बात मानेंगे क्यों नहीं। आपको हम क्या जानते नहीं। न काहू से दोस्ती न काहू से वैर। आपके इस चलन को यहां कौन नहीं जानता? प्रधान जी के बड़ी बेबाकी से ऐसा कहने पर दिनेश शर्मा पटवारी जी का हौसला बढ़ता है और कटे-फटे और एक-दूसरे के बीच धंसे किनारों के ऐन बीच खड़े हो कहते हैं यह रस्सी पकड़िये प्रधान जी उधर से। इधर से मैं पकड़ रहा हूं। देखिए यह सीधी लाइन बन गई बीचो-बीच। खेतों के इस ओर के कटे-फटे भाग अभी सीधे हो जाते हैं। देखिए बात सीधी- सी है। इस ओर मास्टर जी तथा उस तरफ कर्मचन्द। निशान लगा रहा हूं सीधी लाइन पर। लट्ठे पर मैं निशानदेही ठीक कर रहा हूं। किसी को कोई एतराज?<br>नहीं हाकिम जी एतराज और आपके न्याय पर? यह कैसे हो सकता है?</p>



<p>न्याय करना तो कोई आपसे सीखे।<br>हाकिम हो तो आप जैसा।</p>



<p>उपस्थित ग्रामीण तरह-तरह से पटवारी जी की तारीफ करते हैं। मास्टर लब्धराम राहत की सांस लेते कहते हैं-हाकिम जी जमाबन्दी दुरुस्त करना नहीं भूलना। वाह, पटवारी जी वाह। आपने तो रामराज वाली मिसाल पेश कर दी है आज-पं. संतराम प्रशंसात्मक लहजे में बोलते हैं। और मेहरो शाह गद्गतद स्वर में कहते हैं-आप तो देवता स्वरूप हैं पटवारी जी। मैं हैरान हूं कि आप जैसा जती-सती आदमी इस बदनाम महकमे में कैसे आ गया। सभा बरखास्त होती है तो एक काईंयां जैसा आदमी पटवारी जी को थोड़ा एक तरफ ले जाकर कहता है शिकार का शौक रखते हैं हाकिम जी? यह बात उसने बहुत धीरे से इस ढंग से कही कि जैसे यह कोई ऐसी गुप्त सूचना हो जिसे कोई दूसरा न सुन ले। शिकार और मैं? क्या बात कर दी तुमने रांझू? कर्मकाण्डी ब्राह्ममण का बेटा और शिकार? होश ठिकाने हैं तुम्हारे? जब मैं मांस खाता ही नहीं तो शिकार क्यों करूंगा? दिनेश शर्मा के तेवर दिखाने पर रांझू हाथ जोड़कर कहता है-नहीं पटवारी जी आपको कौन कहता है शिकार करने को। शिकार आपके डेरे पर पहुंच जाएगा। बंदा है किसलिए। हाकिमों की खिदमत करना बंदे का फर्ज है। मैंने कहा न रांझू मैं शाकाहारी हूं। सुना नहीं तुमने? दिनेश शर्मा की डांट सुनकर भी रांझू हार नहीं मानता और कहता है-कमाल है। हाकिम हुक्काम शिकार में शौक न रखें, यकीन नहीं होता। पहले वाले पटवारी तो शिकार खाते भी थे और शिकार करने में भी माहिर थे। वो जब भी आते काम-काज शुरू करने से पहले शिकार की मांग करते। खैर आप से क्या कहूं, जती-सती आदमी ठहरे आप। परहेजदार तो होंगे ही।</p>



<p>बात खत्म हुई। रांझू चला जाता है। दिनेश शर्मा मन ही मन कहते हैं- कुछ खोटी बुद्धि वाले तो बेशक यहां हैं पर बुनियादी तौर पर लोग स्नेही और सद्भाव वाले हैं। हमारा व्यवहार ठीक होगा तो ये लोग बिल्कुल बिगड़ेंगे नहीं। उस दिन पारले गांव से एक फौजी भाई आए थे। पता नहीं कब से टक्करें मार रहे थे हाकिमों के द्वार पर। कोई सुनता ही नहीं था। बात ही नहीं करता था। कहते थे जमाबन्दी की नकल लेनी है। पटवारी जी के चक्कर काटते-काटते टांगें टूट गयी हैं। मिलते ही नहीं। कभी मौके पर होते हैं। कभी किसी इन्तकाल के सिलसिले में तहसीलदार के साथ ड्यूटी पर होते हैं, कभी मतदाता सूचियों की जांच में जुटे बताए जाते हैं तो कभी बाढ़ के नुकसान का जायजा लेने कहीं गए बताए जाते हैं। डेरे पर ताला ही मिलता है। फौजी भाई का कहना था कि अधिकतर बातें सरासर झूठ होती थीं। मैं जानता हूं हाकिम जी, माफ करना, दुःखी होकर ही कह रहा हूं। सीधे ढंग से कोई काम कर दें तो हम बदखोई क्यों करें। मैंने शुक्र किया है कि वह बदल गए, अगर आप मेरा काम कर दें तो बड़ी मेहरबानी होगी। फौजी भाई का दुखड़ा सुनकर दिनेश शर्मा को दुःख तो हुआ पर शर्म भी कम नहीं आई। अतः उन्होंने उसे आदर से बिठाया और सहानुभूति भरे स्वर में कहा- यह मेहरबानी वाली बात क्या कह दी आपने। पांच मिनट का काम है। अभी किए देता हूं। और भाई जी आपने मुझे हाकिम जी नहीं कहना। मैं सिर्फ एक कर्मचारी हूं, हाकिम नहीं हूं। और दिनेश शर्मा ने पन्द्रह-बीस मिनट में नकल जमाबंदी बनाकर उनके सुपुर्द कर दी और मन ही मन कहा, कितना मजा आता है दूसरों का काम कर देने से। पता नहीं हमारे कर्मचारी काम से कतराते क्यों हैं।</p>



<p>दूसरों का काम समय पर निपटा देने से दिनेश शर्मा को बड़ी संतुष्टि मिलती है और उसका खून बढ़ता है। कहते है खून बढ़ाने वाली इस रसायन से दूर क्यों भागते हैं लोग-बाग। मैं खुशकिस्मत हूं जो मुझे दूसरों के काम आने का सुअवसर मिला है। अभी कुछ दिन पहले उन्होंने एक प्लाट मालिक को उसके एक झगड़ालू पड़ोसी से रास्ता दिलवाया है। इसे उनका एक बड़ा कारनामा माना गया है और उनकी सर्वत्र वाहवाही हुई है। लोग जमाबंदी की नकल लेने, ततीमा बनवाने, खसरा नंबर लेने या जमीन के इंतकाल की गर्ज से उनके पास आते हैं तो अपने साथ घी का डिब्बा, बढ़िया बासमती, मक्की का आटा, लोटा भर शहद या अपने खेत की सब्जी भेंट के तौर पर ले आते हैं। वह इसे स्वीकार तो करते हैं पर बिना कीमत चुकाए ग्रहण नहीं करते। वह लोगों से बार-बार कहते हैं कि सरकार मुझे वेतन देती है और जो मिलता है वही मेरे लिए बहुत होता है। पटवारी जी की आस-पास के सब गांवों में चर्चा होती है। उनके सहानुभूति वाले रवैये और खुशी-खुशी काम निपटा देने की प्रवृत्ति ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया है पर ऊपर वाले हाकिम-हुक्काम और हमपेशा सहयोगी उसी अनुपात में उनसे नाराज रहने लगे हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि ऐसा क्यों होता है कि काम करना भी कई बार हमारे यहां दोष बन जाता है।</p>



<p>और एक दिन उन्हें उनका स्थानान्तरण आदेश थमा दिया जाता है। और वह जाने की तैयारी शुरू कर देते हैं। गांव में यह खबर जंगल की आग की तरह फैल जाती है और सूरज ढलते ही उनके डेरे पर इलाके के बड़े जमींदार, स्थानीय स्कूल मास्टर, ग्राम पंचायतों के पदाधिकारी, दुकानदार और अन्य बहुत से प्रधान पुरुष इकट्ठास होना शुरू हो जाते हैं। दिनेश शर्मा हाथ जोड़कर सब का धन्यवाद करते हैं और अपने को खुशी-खुशी विदा करने का अनुरोध करते हैं, जिस पर चारों तरफ नहीं-नहीं की आवाज उठती हैं।<br>जाएंगे कैसे? हम जाने ही नहीं देंगे। एक स्वर।<br>हमने तो जनाब शुक्र मनाया था कि एक नेक आदमी हमें हाकिम के रूप में मिला है और आपने रट लगा ली है जाने की। पंचायत प्रधान गंभीर मुद्रा बनाकर कहते हैं।<br>हम ऐसे नहीं, तहसीलदार बनाकर भेजेंगे आपको। एक सेवानिवृत्त सूबेदार जब ऐसा कहते हैं तो दिनेश शर्मा के चेहरे पर एक रहस्यमयी मधुर मुस्कान फैलने लगती है पर वह बोलते कुछ नहीं।<br>अभी तो जनाब यहीं आराम से बैठे रहिए। तहसीलदार बन जाएंगे तो गले में हार पहनाकर खुशी-खुशी विदा करेंगे। पंचायत समिति के एक रौबीले पदाधिकारी जब अधिकारपूर्वक ऐसा कहते हैं तो दिनेश शर्मा जेब से एक कागज निकाल मुस्कुरा कर कहते हैं-तहसीलदार बनकर ही जा रहा हूं चैधरी साहिब। नायब तहसीलदार के तौर पर मेरी सिलेक्शन हो गई है। अब तो जाने देंगे न?<br>एक खुशनुमा सन्नाटा छा जाता है चारों ओर।</p>



<p><mark class="has-inline-color has-vivid-cyan-blue-color"><strong>दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट</strong></mark></p>
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		<title>मुश्किल नहीं है मोतियाबिंद का इलाज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 09:40:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[मुश्किल नहीं है मोतियाबिंद का इलाज वृद्धावस्था में आंखों की रोशनी वैसे भी कम होने लगती है और एक अवस्था ऐसी आती है एकदम से दिखना बन्द हो जाता है। इस अवस्था में परेशानी का प्रारम्भ होता है। भारत वर्ष में अन्धत्व के प्रमुख कारणों में मोतिया बिन्द प्रमुख है। अस्सी प्रतिशत अन्धत्व का कारण &#8230;]]></description>
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<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">मुश्किल नहीं है मोतियाबिंद का इलाज</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="351" height="144" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-10T144847.449.jpg" alt="" class="wp-image-126882" /></figure>



<p>वृद्धावस्था में आंखों की रोशनी वैसे भी कम होने लगती है और एक अवस्था ऐसी आती है एकदम से दिखना बन्द हो जाता है। इस अवस्था में परेशानी का प्रारम्भ होता है। भारत वर्ष में अन्धत्व के प्रमुख कारणों में मोतिया बिन्द प्रमुख है। अस्सी प्रतिशत अन्धत्व का कारण मोतियाबिन्द नामक बीमारी है। मोतियाबिन्द एक रोग है जिसका संबंध हमारी आयु से होता है। वृद्धावस्था में आमतौर से मोतियाबिन्द हो जाता है। हमारी आंख में एक पारदर्शी लेन्स होता है। यह लेन्स धुंधला पड़ जाता है और अपनी पारदर्शिता खो देता है। इसी को मोतियाबिन्द कहते हैं।</p>



<p>मोतियाबिन्द पुरूष, स्त्री किसी को भी वृद्धावस्था में हो सकता है। इसका कोई विशेष कारण नहीं है लेकिन अत्यधिक धूम्रपान, मदिरा पान, निरन्तर तेज रोशनी में कार्य करने या आंख में चोट लगने से यह रोग कम उम्र मंछ भी हो सकता है। मधुमेह के रोगियों को भी यह कम उम्र में हो सकता है। इसलिए चालीस वर्ष की उम्र के बाद आंखों की जांच के प्रति सावधानी बरतना नितान्त आवश्यक है। यदि आंखों की जांच उसके बाद होती रहे तो अच्छा है। मोतियाबिन्द एक ऐसा रोग है जिसे रोकने के लिए कोई उपचार, सावधानियां नहीं है इसलिए मोतियाबिन्द को उम्र के साथ रोका नहीं जा सकता।</p>



<p>मोतियाबिन्द की पदचाप:- मोतियाबिन्द आपको उम्र के साथ आकर घेरे इसके पूर्व उसकी पदचाप सुन लीजिए। मोतियाबिन्द बिना किसी शोर गुल के धीरे-धीरे बिना दर्द के आता है। इसके आगमन पर कम दिखाई देने लगता है। दूर और पास की वस्तु का भेद करने में दिक्कत आती है। पुतली का रंग बदल कर धुंधला अथवा सफेद हो जाता है। कभी-कभी एक वस्तु दो वस्तु के रूप में दिखाई पड़ती है। रंगों के पहचानने में परेशानी आती है। ये संकेत यदि दिखाई दें तो यह समझ लेना चाहिए कि मोतियाबिन्द रोग का आगमन हो गया है।</p>



<p>मोतियाबिन्द को ठीक कैसे करें:- मोतियाबिन्द का दवा के रूप में कोई उपचार नहीं है। इसका एकमात्र इलाज एक छोटा सा साधारण आपरेशन है। इस आपरेशन में आंख पर आ गई झिल्ली को (लेंस) हटा देने से पूर्ववत दिखाई देने लगता है। यही एक मात्र हल है। हमारे देश में आपरेशन शब्द का ही बड़ा डर है। हम समझते हैं कि आपरेशन में सदा खतरा रहता है। इसलिए इस भय के कारण निरक्षण ग्रामीण जन आपरेशन को टालते रहते हैं।</p>



<p>आपरेशन टालने का खतरा:- मोतियाबिन्द आपरेशन एक छोटा सा साधारण आपरेशन है। लाखों लोग भारत में यह आपरेशन करा चुके हैं। हमारे ग्राम, शहर, मोहल्ले में ऐसे व्यक्ति मिल सकते हैं जो मोतियाबिन्द का आपरेशन कराकर देखने में सक्षम हो गए हैं। अतः मोतियाबिन्द के आपरेशन में कोई खतरा नहीं है, यह हमें समझ लेना चाहिए। लेकिन मोतियाबिन्द का आपरेशन यदि हम नहीं कराएं तो अपारदर्शी लेन्स के न हटाने से व्यक्ति अंधा हो जाता है। इस खतरे से बचने के लिए जैसे ही पता चले कि मोतियाबिन्द है, आपरेशन के लिए स्वयं अस्पताल जाकर जांच करा लेना चाहिए और आपरेशन भी करा लेना सर्वोत्तम होगा।</p>



<p>आपरेशन का समय:- उत्तर भारत में यह अन्ध विश्वास व्याप्त है कि आपरेशन के लिए उचित समय शीत ऋतु है इसलिए अक्तूबर से फरवरी तक अधिकतम मोतियाबिन्द के आपरेशन इस अवधि में होते हैं किन्तु यह एक भ्रम है। यह इतना छोटा और साधारण आपरेशन होता है कि किसी भी समय इसे कराया जा सकता है।</p>



<p>सम्पूर्ण दक्षिण भारत में मोतियाबिन्द के आपरेशन साल भर बिना किसी डर के होते हैं। अब उत्तर भारत में भी अन्ध विश्वास टूट रहा है किन्तु अभी व्यापक रूप से ग्रामीण ठंड में आपरेशन को ही उत्तम मान रहे हैं किन्तु वस्तु स्थिति यह है कि मोतियाबिन्द का आपरेशन वर्ष भर में कभी भी कराया जा सकता है। यदि मोतियाबिन्द के आपरेशन में विलम्ब होता है तो लाइलाज अन्धापन अवश्य हो सकता है।</p>



<p>जैसे ही कम दिखना प्रारंभ हो, मोतियाबिन्द का आपरेशन कराने के लिए अस्पताल जाना चाहिए। एक समय में एक ही आंख का आपरेशन किया जाता है। जो आंख ज्यादा प्रभावित होती है उसका आपरेशन सबसे पहले किया जाता है। जो आंख ज्यादा प्रभावित होती है उसका आपरेशन सबसे पहले किया जाता है। जब यह आंख पूर्णतया दृष्टि पा जाती है तब ही दूसरी आंख का आपरेशन होता है। मोतियाबिन्द का आपरेशन अत्यन्त साधारण आपरेशन है। इसमें कोई दर्द और कष्ट नहीं है। आपरेशन करते वक्त व्यक्ति को बेहोश नहीं किया जाता।</p>



<p>कोई खर्च नहीं:- इस आपरेशन के लिए शासकीय अस्पताल, मेडिकल कालेजों में निःशुल्क व्यवस्था की गई है कुछ सचल इकाइयां भी ग्रामों में जाकर इस आपरेशन की व्यवस्था करते हैं। भारत सरकार ने स्वास्थ्य के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अंधत्व निवारक कार्यक्रम को सम्मिलित कर लिया है। इसलिए इस आपरेशन के लिए हर सरकारी अस्पताल में निःशुल्क सुविधा की गई है।</p>



<p>इतना ही नहीं, सम्पूर्ण देश में स्वयं सेवी संगठन नेत्र शिविर भी ग्रामों में आयोजित करते हैं जिसमें अनुभवी डाक्टर ग्राम में ही नेत्रों का आपरेशन कर देते हैं। इन शिविरों में न केवल मोतियाबिन्द का निःशुल्क आपरेशन होता है वरन भोजन, दवा व, चश्मे भी संगठन निःशुल्क वितरण करते हैं। इन शिविरों में रोगी को पांच दिन ठहरना पड़ता है। आपरेशन हो जाने के 4-6 सप्ताह बाद आंख की पुनः जांच करानी चाहिए। रोगी की इस जांच का बड़ा महत्व है।</p>



<p>आपरेशन के बाद की सावधानियां:- सफल आपरेशन के बाद भी रोगी को एक माह तक सावधानी रखनी आवश्यक है। नेत्र सर्जन जो दवा देते हैं, उसे नियमित रूप से लेना, आंख को हरी पट्टी से ढक कर रखना, तेज रोशनी, धुंआ, धूल से आंख को बचाना बहुत आवश्यक है। इतना ही नहीं, यदि कोई शिकायत हो तो तत्काल डाक्टर को बताना चाहिए और सलाह अनुसार कार्य करना चाहिए। मोतियाबिन्द के आपरेशन के बाद दो सप्ताह तक सिर न धोने, भारी परिश्रम न करने, अधिक झुकने, मुड़ने के कार्य न करने की सलाह डाक्टर देते हैं। इस आपरेशन वाली आंख को छूना, दबाना, खतरनाक रहता है।</p>



<p>आप क्या कर सकते हैं?:- मोतियाबिन्द आपरेशन के इस कार्य में उन व्यक्तियों की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है जिन्हें मोतियाबिन्द नहीं हुआ और यही से आपके सेवा कार्य का प्रारम्भ हो जाता है। आप इस सेवा कार्य में निम्नलिखित महत्वपूर्ण भूमिका को निभा सकते हैं।</p>



<p>प्रत्येक जिले में शासन ने अन्धत्व निवारण के इस कार्य हेतु एक अन्धत्व निवारण समिति बनाई है। आप इस समिति के सहयोग से अपने ग्राम या आस पास के ग्रामों में नेत्र शिविर लगवा सकते हैं। आप अपने क्षेत्र में एक नेत्र शिविर समिति गठित कर नेत्र शिविर लगाने का महान कार्य कर सकते हैं। इसके लिए अपने जिले के अन्धत्व निवारण समिति से सम्पर्क कीजिए। इसका कार्यालय सामान्य तथा जिला अस्पताल में होता है। इस कार्य के लिए यह समिति वित्तीय सहायता भी देती है।</p>



<p>यदि आपके क्षेत्र में नेत्र शिविर पहले से ही लग रहे हैं तो इन शिविरों में अपने ग्राम व परिवार के सदस्यों को लेकर आइए। मोतियाबिन्द का रोगी वृद्ध तो होता ही है, उसे दिखाई भी नहीं देता, अतः बिना आपकी मदद के मोतियाबिन्द का आपरेशन नहीं हो सकता। आप वृद्धजनों को प्रेम से समझाइए सलाह दीजिए और प्रेरणा दीजिए। एक बार उनका आपरेशन हो गया तो ज्योति मिलने के बाद प्रतिदिन वे आपको आशीर्वाद देंगे। यह वृद्धों की सर्वोत्तम सेवा होगी।</p>



<p></p>
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		<title>केले का छिल्का: विटामिन और पोषक तत्वों का खजाना, जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Mar 2026 08:42:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[केले का छिल्का: विटामिन और पोषक तत्वों का खजाना, जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे अच्छी सेहत के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार बेहद जरूरी होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि दैनिक आहार में मौसमी फलों को शामिल किया जाए, क्योंकि ये शरीर को आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करते हैं। इन्हीं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">केले का छिल्का: विटामिन और पोषक तत्वों का खजाना, जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="300" height="168" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-09T141040.107.jpg" alt="" class="wp-image-126838" /></figure>



<p>अच्छी सेहत के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार बेहद जरूरी होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि दैनिक आहार में मौसमी फलों को शामिल किया जाए, क्योंकि ये शरीर को आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करते हैं। इन्हीं फलों में केला एक ऐसा फल है जो लगभग हर मौसम में आसानी से उपलब्ध होता है और पोषण से भरपूर होता है।</p>



<p>अधिकतर लोग केला खाने के बाद उसके छिलके को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन हाल के कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि केले का छिलका भी पोषक तत्वों का भंडार है। इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए बेहद लाभकारी हो सकते हैं। यदि इसे सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह पाचन, दिल, आंखों, त्वचा और मानसिक स्वास्थ्य तक के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।</p>



<p>केले के छिलके में मौजूद पोषक तत्व</p>



<p>केले के छिलके में कई प्रकार के महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:</p>



<p>फाइबर</p>



<p>एंटीऑक्सीडेंट</p>



<p>ल्यूटिन</p>



<p>पॉलीफेनॉल</p>



<p>कैरोटेनॉयड्स</p>



<p>फ्लेवोनॉयड्स</p>



<p>विटामिन ए</p>



<p>विटामिन बी6</p>



<p>ये सभी तत्व शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।</p>



<p>पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद</p>



<p>केले के छिलके में भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।</p>



<p>फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होता है। कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि फाइबर आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे पाचन प्रक्रिया मजबूत होती है।</p>



<p>इसके अलावा केले के छिलके में रेजिस्टेंट स्टार्च भी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और पेट से जुड़ी कई समस्याओं से राहत दिला सकता है।</p>



<p>दिल की सेहत के लिए लाभकारी</p>



<p>केले के छिलके में मौजूद पॉलीफेनॉल, कैरोटेनॉयड्स और फ्लेवोनॉयड्स जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट शरीर में बनने वाले फ्री-रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं।</p>



<p>फ्री-रेडिकल्स के कारण शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) बढ़ सकती है, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एंटीऑक्सीडेंट इनसे बचाव करते हैं और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।</p>



<p>नियमित रूप से केले के छिलके का सेवन करने से हृदय रोगों का जोखिम कम हो सकता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर हो सकती है।</p>



<p>आंखों की सेहत के लिए उपयोगी</p>



<p>केले के छिलके में ल्यूटिन और विटामिन ए अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होता है।</p>



<p>ल्यूटिन आंखों को हानिकारक प्रकाश से बचाने में मदद करता है और उम्र से जुड़ी आंखों की समस्याओं के खतरे को कम कर सकता है। विटामिन ए आंखों की रोशनी को बनाए रखने और दृष्टि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>



<p>मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद</p>



<p>केले के छिलके में ट्रिप्टोफैन और विटामिन बी6 जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माने जाते हैं।</p>



<p>ट्रिप्टोफैन शरीर में जाकर सेरोटोनिन नामक हार्मोन में बदल जाता है। सेरोटोनिन को “हैप्पी हार्मोन” भी कहा जाता है क्योंकि यह मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है और तनाव व अवसाद के लक्षणों को कम कर सकता है।</p>



<p>वहीं विटामिन बी6 नींद की गुणवत्ता को सुधारने में मदद करता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।</p>



<p>त्वचा और बालों के लिए भी उपयोगी</p>



<p>केले के छिलके का उपयोग केवल खाने तक सीमित नहीं है। इसे त्वचा और बालों की देखभाल में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>



<p>चेहरे पर केले के छिलके को हल्के से रगड़ने से त्वचा में निखार आ सकता है।</p>



<p>यह मुंहासों और दाग-धब्बों को कम करने में मदद कर सकता है।</p>



<p>बालों में लगाने से बालों की चमक बढ़ सकती है और स्कैल्प को पोषण मिल सकता है।</p>



<p>डाइट में कैसे करें इस्तेमाल</p>



<p>केले के छिलकों को कई तरीकों से आहार में शामिल किया जा सकता है:</p>



<p>स्मूदी में ब्लेंड करके</p>



<p>आइसक्रीम या डेजर्ट की टॉपिंग के रूप में</p>



<p>पके केले के नरम छिलकों को उबालकर</p>



<p>सब्जी या स्टिर-फ्राई बनाकर</p>



<p>हालांकि छिलकों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार के केमिकल या गंदगी को हटाया जा सके।</p>



<p>निष्कर्ष</p>



<p>अक्सर हम जिन चीजों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, उनमें भी कई बार सेहत के लिए जरूरी पोषक तत्व छिपे होते हैं। केले का छिलका भी ऐसा ही एक उदाहरण है।</p>



<p>फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी विटामिन से भरपूर केले का छिलका पाचन, दिल, आंखों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। सही तरीके से इसका उपयोग करके हम अपने आहार को और अधिक पौष्टिक बना सकते हैं।</p>



<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट</mark></strong></p>



<p></p>
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		<item>
		<title>फोन में लगे-लगे कैसे खराब हो जाती है सिम? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां, जानें बचने के तरीके</title>
		<link>http://deedarehind.com/%e0%a4%ab%e0%a5%8b%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ac-%e0%a4%b9/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Mar 2026 08:39:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[फोन में लगे-लगे कैसे खराब हो जाती है सिम? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां, जानें बचने के तरीके स्मार्टफोन के इस दौर में सिम कार्ड हमारा डिजिटल आधार है। लेकिन कई बार यूजर हैरान रह जाते हैं जब बिना किसी बाहरी चोट के सिम काम करना बंद कर देती है। इसके &#8230;]]></description>
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<p><strong><mark class="has-inline-color has-luminous-vivid-orange-color">फोन में लगे-लगे कैसे खराब हो जाती है सिम? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां, जानें बचने के तरीके</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="300" height="168" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-09T140755.261.jpg" alt="" class="wp-image-126835" /></figure>



<p>स्मार्टफोन के इस दौर में सिम कार्ड हमारा डिजिटल आधार है। लेकिन कई बार यूजर हैरान रह जाते हैं जब बिना किसी बाहरी चोट के सिम काम करना बंद कर देती है। इसके पीछे खराब होने की वजहें कुछ इस प्रकार हैं:</p>



<ol class="wp-block-list">
<li>नमी और लिक्विड प्रमुख वजह<br>जरूरी नहीं कि फोन पानी में गिरे तभी सिम खराब हो। अगर आप ज्यादा नमी वाले इलाके में रहते हैं या पसीने वाले हाथों से फोन इस्तेमाल करते हैं, तो फोन के भीतर पहुंची भाप सिम की गोल्ड प्लेटेड चिप पर ऑक्सीडेशन पैदा कर देती है। इससे सिम और फोन के बीच का संपर्क (इलेक्ट्रिकल कनेक्शन) टूट जाता है।</li>



<li>ओवरहीटिंग गंभीर समस्या<br>सिम कार्ड मुख्य रूप से प्लास्टिक और एक सूक्ष्म सिलिकॉन चिप से बना होता है। जब आप भारी गेमिंग करते हैं या धूप में फोन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो सिम ट्रे का तापमान बढ़ जाता है। यह अत्यधिक गर्मी सिम के आंतरिक सर्किट को स्थायी रूप से डैमेज कर सकती है।</li>



<li>वोल्टेज फ्लक्चुएशन और चार्जिंग<br>क्या आप जानते हैं कि खराब चार्जर भी सिम खराब कर सकता है? चार्जिंग के समय अगर बिजली का झटका लगता है, तो वह फोन के मदरबोर्ड से होता हुआ सिम ट्रे तक पहुंचता है, जिससे सिम की छोटी सी मेमोरी करप्ट हो सकती है।</li>



<li>पुरानी चिप और घिसावट<br>अगर आप 5-6 साल से एक ही सिम चला रहे हैं, तो उसके मेटल कॉन्टैक्ट्स घिस जाते हैं। फोन के वाइब्रेशन और हल्की हलचल से भी चिप पर रगड़ लगती है, जिससे एक समय बाद वह इनवैलिड सिम दिखाने लगती है।</li>
</ol>



<p>कैसे पहचानें कि सिम खराब हो रही है?<br>अगर आपके फोन की स्क्रीन पर बार-बार नो सिम या सिम फेलर का मैसेज आ रहा है, तो मुमकिन है कि सिम कार्ड खराब हो रहा हो।</p>



<p>नेटवर्क सिग्नल का अचानक गायब होना और फिर वापस आना।<br>कॉल के दौरान आवाज कटना या बार-बार कॉल ड्रॉप होना।<br>सिम को दूसरे फोन में डालने पर भी नेटवर्क न आना।<br>सिम को सुरक्षित कैसे रखें?<br>सफाई: महीने में एक बार सिम निकालकर उसे मुलायम सूखे कपड़े या इरेजर से हल्के हाथ से साफ करें।<br>अच्छे चार्जर का उपयोग: हमेशा ओरिजिनल या ब्रांडेड चार्जर ही इस्तेमाल करें।<br>बार-बार न निकालें: सिम ट्रे को बार-बार खोलने से बचें ताकि फिजिकल डैमेज न हो।</p>



<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट</mark></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>चमक रहा इवेंट मैनेजमेंट, उभर रहे नए रोजगार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 09:15:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[चमक रहा इवेंट मैनेजमेंट, उभर रहे नए रोजगार उदारीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों ने हमारी आर्थिक और सामाजिक ढांचे को ही बदल दिया है। यही वजह है कि आज लोगों में बच्चों के बर्थ डे कार्यक्रम से लेकर शादी−विवाह तक के समारोहों में बड़े पैमाने पर मनाने की होड़ लग गई है। यही वजह है &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-cyan-blue-color">चमक रहा इवेंट मैनेजमेंट, उभर रहे नए रोजगार</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="240" height="210" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-05T144354.572.jpg" alt="" class="wp-image-126673" /></figure>



<p>उदारीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों ने हमारी आर्थिक और सामाजिक ढांचे को ही बदल दिया है। यही वजह है कि आज लोगों में बच्चों के बर्थ डे कार्यक्रम से लेकर शादी−विवाह तक के समारोहों में बड़े पैमाने पर मनाने की होड़ लग गई है। यही वजह है कि आज स्टेटस सिंबल बन चुके सामाजिक रस्मों−रिवाजों को पूरा करने की जिम्मेदारी इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों को सौंपी जानी लगी है। ये कंपनियां मोटी रकम लेकर संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन करती हैं। फिलहाल इस व्यवसाय का देश भर में 600 हजार करोड़ रुपए का कारोबार है। इसमें हर साल 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी भी हो रही है। लिहाजा इस क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं उभर कर सामने आई हैं।</p>



<p>इवेंट मैनेजमेंट का मतलब कार्यक्रम प्रबंधन है। जिसके तहत शादी, पार्टियां, बर्थ डे पार्टियां, सौन्दर्य प्रतियोगिता, खेल आयोजन, उद्योग जगत के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे नए उत्पादों की लांचिंग, प्रेस कांफ्रेंस, सेमिनार, प्रशिक्षण और ब्रांड शो जैसे कार्यक्रम हैं। इवेंट मैनेजमेंट के तहत इन कार्यक्रमों से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का एक समूह कार्यक्रम कराने वालों की स्थिति का अध्ययन करता है। जिसके आधार पर ही इवेंट मैनेजर कार्यक्रमों की तैयारी करते हैं। आयोजक की जिम्मेदारी सिर्फ पैसे चुकाने तक ही होती है।</p>



<p>इवेंट मैनेजमेंट के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कार्यों का संपादन किया जाता है। लिहाजा इसके लिए किसी विशेष पाठ्यक्रम की व्यवस्था नहीं है। यह व्यवसाय पूरी तरह से व्यवहार कुशलता और संचालन व्यवस्था पर आधारित है। इसलिए आमतौर पर एमबीए और जनसंचार से संबंधित डिग्रियां एक कुशल इवेंट मैनेजर बनने के लिए सहायक होती हैं। लेकिन व्यवहारिक रूप से कोई भी ग्रेजुएट युवक जो बहिमुखी प्रतिभा का धनी है और अपनी बातों को प्रभावी ढंग से दूसरे के समक्ष रखने में सक्षम है तथा उसमें प्रबंधन की क्षमता हो वह इसे कॅरियर के तौर पर अपना सकता है।</p>



<p>एक इवेंट मैनेजर में टीम भावना होना बहुत जरूरी है। क्योंकि यह इस व्यवसाय का मेरू दंड है। इस कारोबार में उतरने से पहले अभ्र्यथी को किसी इवेंट कंपनी में बतौर प्रशिक्षु काम करना आवश्यक है। इसके अलावा उसे पार्टियों के आयोजन में हो रहे बदलाव से अवगत होना भी जरूरी है। साथ ही समाज के धनी तबके के बीच पैठ एक इवेंट मैंनेजर की सफलता के सूत्र हैं।</p>



<p>इच्छुक अभ्यर्थी इन संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं…</p>



<p>-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट, 7 एवन आरकेड, डीजे रो विल पार्ले मुंबई।</p>



<p>-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, जेएनयू कैम्पस, नई दिल्ली।</p>



<p>-मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, शोला अहमदाबाद।</p>



<p>-सेंट जेविर्यस कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशन, धोबी तालाब रोड़, लाइंस मुंबई।</p>



<p>-केजे सोमाया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, विले पार्ले मुंबई।</p>



<p>-यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे, गणेश खिंड, पुणे।</p>



<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट</mark></strong></p>
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		<item>
		<title>लंका दहन के समय एक घर छोड़ दिया था हनुमानजी ने</title>
		<link>http://deedarehind.com/%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a5%9c-%e0%a4%a6%e0%a4%bf-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 09:11:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[लंका दहन के समय एक घर छोड़ दिया था हनुमानजी ने मेघनाथ ने श्रीहनुमानजी को रावण के सामने लाकर खड़ा कर दिया। हनुमानजी ने देखा कि राक्षसों का राजा रावण बहुत ही ऊंचे सोने के सिंहासन पर बैठा हुआ है। उसके दस मुंह और बीस भुजाएं हैं। उसका रंग एकदम काला है। उसके आसपास बहुत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-red-color">लंका दहन के समय एक घर छोड़ दिया था हनुमानजी ने</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="275" height="183" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-05T144053.692.jpg" alt="" class="wp-image-126670" /></figure>



<p>मेघनाथ ने श्रीहनुमानजी को रावण के सामने लाकर खड़ा कर दिया। हनुमानजी ने देखा कि राक्षसों का राजा रावण बहुत ही ऊंचे सोने के सिंहासन पर बैठा हुआ है। उसके दस मुंह और बीस भुजाएं हैं। उसका रंग एकदम काला है। उसके आसपास बहुत से बलवान योद्धा और मंत्री आदि बैठे हुए हैं। लेकिन रावण के इस प्रताप और वैभव का हनुमानजी पर कोई असर नहीं पड़ा। वह वैसे ही निडर खड़े रहे जैसे सांपों के बीच में गरुड़ खड़े रहते हैं।</p>



<p>हनुमानजी को इस प्रकार अपने सामने अत्यन्त निर्भय और निडर खड़े देखकर रावण ने पूछा- बन्दर तू कौन है? किसके बल के सहारे वाटिका के पेड़ों को तुमने नष्ट किया है? राक्षसों को क्यों मारा है? क्या तुझे अपने प्राणों का डर नहीं है? मैं तुम्हें निडर और उद्दण्ड देख रहा हूं। हनुमानजी ने कहा- जो इस संपूर्ण विश्व के, इस संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं, मैं उन्हीं भगवान श्रीरामचंद्रजी का दूत हूं। तुम चोरी से उनकी पत्नी का हरण कर लाये हो। उन्हें वापस कर दो। इसी में तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का कल्याण है। यदि तुम यह जानना चाहते हो कि मैंने अशोवाटिका के फल क्यों खाये, पेड़ आदि क्यों तोड़े, राक्षसों को क्यों मारा तो मेरी बात सुनो। मुझे बहुत जोर की भूख लगी थी इसलिए वाटिका के फल खा लिये। बंदर स्वभाव के कारण कुछ पेड़ टूट गये। अपनी देह सबको प्यारी होती है इसलिए जिन लोगों ने मुझे मारा, मैंने भी उन्हें मारा। इसमें मेरा क्या दोष है? लेकिन इसके बाद भी तुम्हारे पुत्र ने मुझे बांध रखा है।</p>



<p>रावण को बहुत ही क्रोध चढ़ आया। उसने राक्षसों को हनुमानजी को मार डालने का आदेश दिया। राक्षस उन्हें मारने दौड़ पड़े। लेकिन तब तक विभीषण ने वहां पहुंच कर रावण को समझाया कि यह तो दूत है। इसका काम अपने स्वामी को संदेश पहुंचाना है। इसका वध करना उचित नहीं होगा। इसे कोई अन्य दंड देना ही ठीक होगा। विभीषण की यह सलाह रावण को पसंद आ गयी। उसने कहा ठीक है बंदरों को अपनी पूंछ से बड़ा प्यार होता है। इसकी पूंछ में कपड़े लपेटकर, तेल डालकर उसमें आग लगा दो। जब यह बिना पूंछ का होकर अपने स्वामी के पास जायेगा तब फिर उसे भी साथ लेकर लौटेगा। यह कहकर वह बड़े जोर से हंसा।</p>



<p>रावण का आदेश पाकर राक्षस हनुमानजी की पूंछ में तेल भिगो भिगोकर कपड़े लपेटने लगे। अब तो हनुमानजी ने बड़ा ही मजेदार खेल किया। वह धीरे धीरे अपनी पूंछ को बढ़ाने लगे। ऐसी नौबत आ गयी कि पूरी लंका में तेल, कपड़े और घी बचे ही नहीं। अब राक्षसों ने तुरंत उनकी पूंछ में आग लगा दी। पूंछ में आग लगते ही हनुमानजी तुरंत उछलकर एक ऊंची अटारी पर जा पहुंचे और वहां से चारों ओर कूद कूदकर वह लंका को जलाने लगे। देखते ही देखते पूरी नगरी आग की विकराल लपटों में घिर गयी। सभी राक्षस और राक्षसियां जोर जोर से चिल्लाने लगे। वे सब रावण को कोसने लगे। रावण को भी आग बुझाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। हनुमानजी की सहायता करने के लिए पवन देवता भी जोर जोर से बहने लगे। थोड़ी ही देर में पूरी लंका जलकर नष्ट हो गयी। हनुमानजी ने केवल विभीषण का घर छोड़ दिया और उसे जलाया नहीं।</p>



<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-purple-color">दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट</mark></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>पित्त और कफ विकारों का घरेलू उपचार है गूलर.</title>
		<link>http://deedarehind.com/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%ab-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87-5/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Deedare Hind]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 09:10:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[पित्त और कफ विकारों का घरेलू उपचार है गूलर. मोरासी परिवारी का सदस्य गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है। इसका वनस्पतिक नाम फीकुस ग्लोमेराता रौक्सबुर्ग है। यह सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है। यह नदी−नालों के किनारे एवं दलदली स्थानों पर उगता है। उत्तर प्रदेश के मैदानों में यह अपने आप ही उग आता है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><mark class="has-inline-color has-vivid-red-color">पित्त और कफ विकारों का घरेलू उपचार है गूलर.</mark></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="259" height="194" src="https://deedarehind.com/wp-content/uploads/2026/03/download-2026-03-05T143853.668.jpg" alt="" class="wp-image-126667" /></figure>



<p>मोरासी परिवारी का सदस्य गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है। इसका वनस्पतिक नाम फीकुस ग्लोमेराता रौक्सबुर्ग है। यह सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है। यह नदी−नालों के किनारे एवं दलदली स्थानों पर उगता है। उत्तर प्रदेश के मैदानों में यह अपने आप ही उग आता है।</p>



<p>इसके भालाकार पत्ते 10 से सत्रह सेमी लंबे होते हैं जो जनवरी से अप्रैल तक निकलते हैं। इसकी छाल का रंग लाल−घूसर होता है। फल गोल, गुच्छों में लगते हैं। फल मार्च से जून तक आते हैं। कच्चा फल छोटा हरा होता है पकने पर फल मीठे, मुलायम तथा छोटे−छोटे दानों से युक्त होता है। इसका फल देखने में अंजीर के फल जैसा लगता है। इसके तने से क्षीर निकलता है।</p>



<p>आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है। पका हुआ गूलर रुचिकारक, मीठा, शीतल, पित्तशामक, तृषाशामक, श्रमहर, कब्ज मिटाने वाला तथा पौष्टिक है। इसकी जड़ में रक्तस्राव रोकने तथा जलन शांत करने का गुण है। गूलर के कच्चे फलों की सब्जी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर या अन्य प्रकार से उपयोग किया जाता है।</p>



<p>गूलर के नियमित सेवन से शरीर में पित्त एवं कफ का संतुलन बना रहता है। इसलिए पित्त एवं कफ विकार नहीं होते। साथ ही इससे उदरस्थ अग्नि एवं दाह भी शांत होते हैं। पित्त रोगों में इसके पत्तों के चूर्ण का शहद के साथ सेवन भी फायदेमंद होता है।</p>



<p>गूलर की छाल ग्राही है, रक्तस्राव को बंद करती है। साथ ही यह मधुमेह में भी लाभप्रद है। गूलर के कोमल−ताजा पत्तों का रस शहद में मिलाकर पीने से भी मधुमेह में राहत मिलती है। इससे पेशाब में शर्करा की मात्रा भी कम हो जाती है। गूलर के तने को दूध बवासीर एवं दस्तों के लिए श्रेष्ठ दवा है। खूनी बवासीर के रोगी को गूलर के ताजा पत्तों का रस पिलाना चाहिए। इसके नियमित सेवन से त्वचा का रंग भी निखरने लगता है।</p>



<p>हाथ−पैरों की त्वचा फटने या बिवाई फटने पर गूलर के तने के दूध का लेप करने से आराम मिलता है, पीड़ा से छुटकारा मिलता है। गूलर से स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी अनियमितताएं भी दूर होती हैं। स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर इसकी छाल के काढ़े का सेवन करना चाहिए। इससे अत्याधिक बहाव रुक जाता है। ऐसा होने पर गूलर के पके हुए फलों के रस में खांड या शहद मिलाकर पीना भी लाभदायक होता है। विभिन्न योनि विकारों में भी गूलर काफी फायदेमंद होता है। योनि विकारों में योनि प्रक्षालन के लिए गूलर की छाल के काढ़े का प्रयोग करना बहुत फायदेमंद होता है।</p>



<p>मुंह के छाले हों तो गूलर के पत्तों या छाल का काढ़ा मुंह में भरकर कुछ देर रखना चाहिए। इससे फायदा होता है। इससे दांत हिलने तथा मसूढ़ों से खून आने जैसी व्याधियों का निदान भी हो जाता है। यह क्रिया लगभग दो सप्ताह तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें।</p>



<p>आग से या अन्य किसी प्रकार से जल जाने पर प्रभावित स्थान पर गूलर की छाल को लेप करने से जलन शांत हो जाती है। इससे खून का बहना भी बंद हो जाता है। पके हुए गूलर के शरबत में शक्कर, खांड या शहद मिलाकर सेवन करने से गर्मियों में पैदा होने वाली जलन तथा तृषा शांत होती है।</p>



<p>नेत्र विकारों जैसे आंखें लाल होना, आंखों में पानी आना, जलन होना आदि के उपचार में भी गूलर उपयोगी है। इसके लिए गूलर के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे साफ और महीन कपड़े से छान लें। ठंडा होने पर इसकी दो−दो बूंद दिन में तीन बार आंखों में डालें। इससे नेत्र ज्योति भी बढ़ती है। नकसीर फूटती हो तो ताजा एवं पके हुए गूलर के लगभग 25 मिली लीटर रस में गुड़ या शहद मिलाकर सेवन करने या नकसीर फूटना बंद हो जाती है।</p>



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