आरबीआई की तीन दिवसीय एमपीसी बैठक शुरू
आरबीआई की तीन दिवसीय एमपीसी बैठक शुरू
नई दिल्ली, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आज सोमवार से शुरू हो गई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल से भारत के लिए ‘आयातित मुद्रास्फीति’ का खतरा बढ़ गया है। हालांकि आरबीआई ने पूर्व में रेपो रेट में कटौती कर इसे 5.25% पर लाया था, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल नीतिगत दरों में और कटौती की गुंजाइश खत्म होती नजर आ रही है।
बाजार विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों के अनुसार, केंद्रीय बैंक इस बार भी ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रख सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि आरबीआई फिलहाल किसी बड़े मुद्रा हस्तक्षेप के बजाय तरलता प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करेगा। वहीं, एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 95 के स्तर को छू रहा है। यदि महंगाई दर आरबीआई के संतोषजनक स्तर (6 प्रतिशत) को पार करती है, तो भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ जैसे उपकरणों के जरिए बॉन्ड ईल्ड को नियंत्रित करने की कोशिश की जा सकती है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा आगामी 8 अप्रैल को इस बैठक के नतीजों की घोषणा करेंगे। पूरे उद्योग जगत और निवेशकों की नजर मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर होगी: पहला, क्या कच्चे तेल के संकट को देखते हुए जीडीपी विकास दर और महंगाई के अनुमानों में संशोधन किया जाएगा, और दूसरा, क्या केंद्रीय बैंक अपना ‘न्यूट्रल’ रुख बरकरार रखेगा। आम आदमी के लिए फिलहाल राहत की खबर यह है कि होम लोन और ऑटो लोन की ईएमआई में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं ने भविष्य की ब्याज दरों और वित्तीय स्थिरता की राह को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट