होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाज के कैप्टन राकेश रंजन सिंह का दिल का दौरा पड़ने से निधन, रांची में शोक की लहर, परिजनों ने केंद्र सरकार से पार्थिव शरीर जल्द लाने की लगाई गुहार

होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाज के कैप्टन राकेश रंजन सिंह का दिल का दौरा पड़ने से निधन, रांची में शोक की लहर, परिजनों ने केंद्र सरकार से पार्थिव शरीर जल्द लाने की लगाई गुहार

रांची, 20 मार्च। झारखंड की राजधानी रांची निवासी और मर्चेंट नेवी के अनुभवी 47 वर्षीय शिप कैप्टन राकेश रंजन सिंह का पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल में निधन हो गया है। कैप्टन सिंह ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण होर्मुज जलसंधि में फंसे मालवाहक जहाज ‘अवाना’ पर तैनात थे। जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में जारी युद्ध जैसी स्थितियों के कारण उनका जहाज पिछले 20 दिनों से दुबई के समुद्र में लंगर डाले खड़ा था। 18 मार्च को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी, लेकिन क्षेत्र में हवाई पाबंदियों के कारण उन्हें समय पर एयर एंबुलेंस नहीं मिल सकी। जब तक उन्हें नाव के जरिए दुबई के तट तक लाया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी और दिल का दौरा पड़ने से उन्होंने दम तोड़ दिया।

कैप्टन राकेश रंजन सिंह का परिवार रांची के अरगोड़ा स्थित वसुंधरा अपार्टमेंट में रहता है और उनके असमय निधन से घर में मातम पसरा हुआ है। उनके बड़े भाई उमेश कुमार और ससुर ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से अपील की है कि उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने की व्यवस्था की जाए। वर्तमान में उनका शव दुबई के शेख राशिद अस्पताल के मॉर्चरी में रखा गया है। परिवार ने यह भी मांग की है कि उनकी मृत्यु की परिस्थितियों और कंपनी की जिम्मेदारी की विस्तृत जांच की जाए। कैप्टन सिंह अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनके भविष्य को लेकर परिवार अब गहरे संकट और चिंता में है।

मूल रूप से बिहार के नालंदा (बिहारशरीफ) निवासी कैप्टन राकेश रंजन सिंह एक अनुशासित और जांबाज अधिकारी थे। उनके मित्रों और मर्चेंट नेवी के साथियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में तनाव के दौरान भारतीय क्रू मेंबर्स की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके पार्थिव शरीर को दुबई से पहले पटना एयरपोर्ट लाया जाएगा, जहां से अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव ले जाया जाएगा। यह घटना अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर देश की सेवा करने वाले मर्चेंट नेवी कर्मियों के कठिन जीवन और आपातकालीन चिकित्सा की कमी जैसे गंभीर सवालों को भी उजागर करती है।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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