ईरान-इजराइल युद्ध के चलते गहराया खाद्य तेल का संकट, आपूर्ति ठप होने की आशंका से सोयाबीन, पाम और सरसों तेल की कीमतों में भारी उछाल, सरकार से स्टॉक बनाने की मांग
ईरान-इजराइल युद्ध के चलते गहराया खाद्य तेल का संकट, आपूर्ति ठप होने की आशंका से सोयाबीन, पाम और सरसों तेल की कीमतों में भारी उछाल, सरकार से स्टॉक बनाने की मांग

नई दिल्ली, 16 मार्च। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक मालवाहक पोतों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत के तेल-तिलहन बाजारों पर दिख रहा है। बीते सप्ताह खाड़ी देशों से आपूर्ति घटने की आशंका के चलते घरेलू बाजार में लगभग सभी खाद्य तेलों की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई। विदेशों में बाजार मजबूत होने और रसोई गैस व खाद्य तेल की सप्लाई बाधित रहने के डर से मांग में अचानक भारी उछाल आया है। विशेष रूप से सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (CPO) और पामोलीन के दाम तेजी से ऊपर चढ़े हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
बाजार विशेषज्ञों ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि युद्ध के इस अनिश्चित काल में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सोयाबीन की बिक्री तुरंत रोक देनी चाहिए और सरसों की सरकारी खरीद तेज करनी चाहिए। कांडला बंदरगाह पर सोयाबीन डीगम और पाम तेल के बीच मूल्य का अंतर घटकर अब महज 10-20 डॉलर प्रति टन रह गया है। जानकारों का कहना है कि किसानों का मनोबल बनाए रखने और भविष्य में बाजार हस्तक्षेप के लिए सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक होना अनिवार्य है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में सोयाबीन का स्टॉक पिछले साल के 68 लाख टन से घटकर फरवरी 2026 में 58.41 लाख टन ही रह गया है।
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान दिल्ली और अन्य मंडियों में सरसों दाना 100 रुपये सुधरकर 6,725 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गया है। वहीं, मूंगफली तेल गुजरात 16,900 रुपये प्रति क्विंटल और सोयाबीन दिल्ली 15,550 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। कच्चे पामतेल (CPO) में 700 रुपये और पामोलीन दिल्ली में 550 रुपये का बड़ा उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्टॉकिस्ट सक्रिय रहे और सरकार ने बोनस देकर सरसों की खरीद नहीं की, तो आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं। बिनौला तेल और सूरजमुखी तेल भी आपूर्ति की कमी के कारण प्रीमियम दरों पर बिक रहे हैं।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट