मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव खारिज,

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव खारिज,

-लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा सभापति ने 193 सांसदों के नोटिस को अमान्य किया

नई दिल्ली, 07 अप्रैल । देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए विपक्षी दलों द्वारा लाया गया महाभियोग प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में खारिज कर दिया गया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों के नोटिस को स्वीकार करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस प्रस्ताव को अमान्य घोषित किया। गौरतलब है कि इस महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सदस्यों सहित कुल 193 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे, जो अब पूरी तरह निष्प्रभावी हो गया है।

विपक्षी गठबंधन ने 12 मार्च, 2026 को भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम 2023 के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की थी। विपक्षी सांसदों का आरोप था कि चुनावी प्रक्रियाओं और निष्पक्षता के मामले में संवैधानिक मानदंडों की अनदेखी की जा रही है। हालांकि, लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि प्रस्ताव के नोटिस पर गहन विचार-विमर्श और सभी तकनीकी पहलुओं के सूक्ष्म आकलन के बाद ही इसे अस्वीकार करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से सरकार और चुनाव आयोग को बड़ी राहत मिली है, जबकि विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन बता रहा है।

महाभियोग प्रस्ताव खारिज होने के बाद संसद से लेकर सोशल मीडिया तक राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे विपक्षी आवाजों को दबाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने पूर्व राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे का जिक्र करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर लोकसभा बुलेटिन साझा किया। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने इस कदम को चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्था को बदनाम करने की साजिश बताया है। इस घटनाक्रम के बाद आगामी दिनों में संसद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं।

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