मिडिल ईस्ट युद्ध से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया, होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से यूरोप में गैस 40% महंगी, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल से बढ़ी महंगाई
मिडिल ईस्ट युद्ध से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया, होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से यूरोप में गैस 40% महंगी, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल से बढ़ी महंगाई

फ्रैंकफर्ट, 04 मार्च मिडिल ईस्ट में छिड़े भीषण संघर्ष के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा भूचाल आ गया है। ईरान द्वारा तेल निर्यात के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को बंद किए जाने और कतरएनर्जी की एलएनजी (LNG) फैसिलिटी पर हमलों के बाद यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों में 40% से अधिक की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की 20% तेल सप्लाई गुजरती है, जिसका मार्ग अवरुद्ध होने से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की कमर टूट सकती है। इसके साथ ही बीमा कंपनियों द्वारा जहाजों की पॉलिसी कैंसिल करने से समुद्री व्यापार पर भी गहरा संकट मंडरा रहा है।
युद्ध के चलते अमेरिकी तेल (WTI) की कीमतों में 6.3% की तेजी आई है, जो अब 71.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया है। वहीं, इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 6.7% बढ़कर 77.74 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ है। तेल की इन बढ़ती कीमतों का सीधा असर अमेरिका और यूरोप के पंपों पर दिखने लगा है, जहाँ पेट्रोल और अन्य ईंधन महंगे हो गए हैं। सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी पर ईरानी ड्रोन हमलों की खबरों के बाद सावधानी के तौर पर कई रिफाइनरी बंद कर दी गई हैं, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित होने की आशंका प्रबल हो गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का बोझ काफी बढ़ जाता है। यूरोप में ऊर्जा लागत बढ़ने से पूरी अर्थव्यवस्था में अन्य वस्तुओं के दाम भी बढ़ने लगे हैं, जिससे आम जनता पर दोहरी मार पड़ रही है। ओमान की खाड़ी में तेल टैंकरों पर ड्रोन हमलों और सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम में आ रही रुकावटों ने समुद्री यातायात को और जोखिम भरा बना दिया है। यदि यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो दुनिया भर में उपभोक्ता कीमतों में बड़ी वृद्धि के साथ-साथ गंभीर आर्थिक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट


