‘दिव्य दरबार’ में ‘चमत्कारी इलाज’ के दावों पर छिड़ा विवाद

‘दिव्य दरबार’ में ‘चमत्कारी इलाज’ के दावों पर छिड़ा विवाद

नागपुर, 3 महाराष्ट्र के नागपुर में चल रही राम कथा के दौरान बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से आयोजित ‘दिव्य दरबार’ को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है और अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ताओं ने चमत्कारी इलाज तथा दैवीय हस्तक्षेप के दावों पर सवाल उठाए हैं।

बागेश्वर धाम के प्रमुख शास्त्री ‘दिव्य दरबार’ आयोजित करने के लिए जाने जाते हैं। इन दरबारों में भक्त अपनी समस्याओं का ब्योरा देते हुए अर्जी देते हैं, जिसके आधार पर कहा जाता है कि वे भगवान हनुमान के आशीर्वाद से मार्गदर्शन और समाधान बताते हैं।

नागपुर में राम कथा कार्यक्रम के दौरान कई भक्तों को अपने अनुभव साझा करने के लिए मंच पर बुलाया गया। ऐसे ही एक मौके पर, एक अभिभावक ने दावा किया कि उनका 12 साल का बेटा, जो एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था, लगभग 100 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहा था। उन्होंने आगे दावा किया कि इलाज के दौरान लड़के की सांसें पांच मिनट के लिए रुक गई थीं। कुछ समय तक ऑक्सीजन न मिलने के बावजूद बच्चा जीवित रहा और पूरी तरह से ठीक हो गया, जिसका श्रेय उन्होंने शास्त्री के आशीर्वाद को दिया।

अभिभावक ने आगे दावा किया कि महीनों तक हिल-डुल न पाने वाला बच्चा अब खड़ा हो सकता है, और उन्होंने इस घटना को किसी चमत्कार से कम नहीं बताया।

अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने हालांकि इन दावों की कड़ी आलोचना की है और ऐसे दावों के वैज्ञानिक सत्यापन की मांग की है।

समिति से जुड़े श्याम मानव ने इन दावों की चिकित्सकीय विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, विशेष रूप से इस दावे पर कि बच्चा लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने और यहां तक कि ऑक्सीजन की आपूर्ति अस्थाई रूप से रुक जाने के बाद भी जीवित रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों की गहन चिकित्सकीय जांच होनी चाहिए।

इस घटना ने सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से अंधविश्वास को बढ़ावा देने के आरोपों पर चल रही बहस को फिर से हवा दे दी है, जबकि बड़ी संख्या में अनुयाई चल रही राम कथा और उससे जुड़े दरबारों में लगातार शामिल हो रहे हैं।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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