जे पी मॉर्गन ने वेदांता के शेयरों की भावना को बेहतर बताया, एल्यूमिनियम व्यवसाय में मजबूती की उम्मीद जतायी

जे पी मॉर्गन ने वेदांता के शेयरों की भावना को बेहतर बताया, एल्यूमिनियम व्यवसाय में मजबूती की उम्मीद जतायी

नई दिल्ली,। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने पश्चिम एशिया संकट के चलते संरचनात्मक रूप से सख्त होते जा रहे एल्यूमिनियम बाजार और मध्यम अवधि में मूल्य का परिदृश्य अनुकूल होने की संभावनाओं का हवाला देते हुए वेदांता लिमिटेड की रेटिंग को उन्नत कर ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) से बढ़ाकर ‘ओवरवेट’ (क्रय) की श्रेणी में रखा है।

जे पी मॉर्गन ने वेदांता के लिए अपना लक्ष्य मूल्य को भी बढ़ दिया है, जिससे इस शेयर में इसके वर्तमान स्तरों से उल्लेखनीय बढ़त की संभावना दिखती है। फर्म की एक रपट के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी राजनीतिक तनाव के कारण अल तवीलाह और अल्बा सहित प्रमुख एल्यूमिनियम स्मेल्टर कंपनियों के उत्पादन में बाधाएं उत्पन्न हुई हैं। इन व्यवधानों को सामान्य होने में 9–12 महीने लग सकते हैं, विशेष रूप से यदि बुनियादी ढांचे

को नुकसान पहुंचा हो, जिससे चीन के बाहर एल्यूमिनियम आपूर्ति में कमी आ सकती है। इसके परिणामस्वरूप, जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि एल्यूमिनियम की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी, जिससे कमोडिटी चक्र में निरंतर तेजी बनी रह सकती है।

जेपी मॉर्गन ने वेदांता के संदर्भ में कहा है कि कंपनी का शेयर परिचालन लाभ (एबिडटा) के चार गुना से कम पर कारोबार कर रहा है और चालू वित्त वर्ष में इसके एबिडटा में में 49 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है, जो एल्यूमिनियम, जिंक और सिल्वर की ऊंची कीमतों से प्रेरित होगी।

इस बीच, वेदांता के प्रमुख अनिल अग्रवाल ने लौह अयस्क कारोबार की संभावनाओं के बारे में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि देश में 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए लगभग 80 करोड़ टन लौह अयस्क की आवश्यकता होगी, जिसके लिए घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि जरूरी है। यह वृद्धि ऐसे बड़े और एकीकृत खनन खिलाड़ियों के समर्थन से संभव होगी, जो वैश्विक स्तर पर संचालन करने में सक्षम हों।

उन्होंने कहा, “ अगर हम इसी तरह चलते रहे तो हमें अपनी ज़रूरत का 75 प्रतिशत लौह अयस्क विदेशों से आयात करना पड़ेगा।’ वेदांता प्रमुख ने किया कि इस समय वैले, बीएचपी, रियो टिंटो और फोर्टेस्क्यू जैसी सिर्फ 4 या 5 बड़ी कंपनियां हैं जो पूरी दुनिया का 70 – 80 प्रतिशत लौह अयस्क पैदा करती हैं। ”

श्री अग्रवाल का कहना है कि भारत के पास भी इसके अलावा कोई मार्ग नहीं है कि देश में 3-4 ऐसी बड़ी कंपनियाँ जिनमें से प्रत्येक में 20 से 30 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन करने की क्षमता हो। उन्होंने कहा कि इसमें अवसंरचना सुविधाओं के विकास पर अनुमानित 20-25 अरब डालर या उससे भी ज़्यादा के निवेश की जरूरत होगी।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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