जयद्रथ वध का मायावी सच: जब श्रीकृष्ण ने रोक दिया समय
जयद्रथ वध का मायावी सच: जब श्रीकृष्ण ने रोक दिया समय
अभिमन्यु की मृत्यु से क्रोधित हुए अर्जुन
महाभारत युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह रचा। अर्जुन की अनुपस्थिति में अभिमन्यु उसमें प्रवेश तो कर गया, लेकिन बाहर निकलने की कला नहीं जानता था। कौरव योद्धाओं ने मिलकर उसका वध कर दिया।
जयद्रथ था अभिमन्यु वध का मुख्य कारण
अभिमन्यु को चक्रव्यूह में फंसाने में जयद्रथ की बड़ी भूमिका थी। पुत्र की मृत्यु से दुखी अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली कि यदि वह अगले दिन सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध नहीं कर पाया, तो आत्मदाह कर लेगा।
जयद्रथ को मिला था वरदान
जयद्रथ को उसके पिता वृद्धक्षत्र से वरदान मिला था कि जो भी उसका सिर काटकर जमीन पर गिराएगा, उसके सिर के भी सौ टुकड़े हो जाएंगे।
कौरवों ने छिपा दिया जयद्रथ
अर्जुन की प्रतिज्ञा सुनकर जयद्रथ डर गया। दुर्योधन और कौरव सेना ने उसे पूरे दिन अर्जुन से दूर और सुरक्षित रखा ताकि सूर्यास्त तक वह बचा रहे।
श्रीकृष्ण ने रची मायावी लीला
जब सूर्यास्त का समय करीब आया और अर्जुन जयद्रथ तक नहीं पहुंच पाए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माया से सूर्य को बादलों में छिपा दिया। चारों ओर अंधेरा छा गया और जयद्रथ को लगा कि सूर्यास्त हो चुका है।
भ्रम में बाहर आया जयद्रथ
सूर्यास्त का भ्रम होते ही जयद्रथ छिपने की जगह से बाहर आ गया और अर्जुन का उपहास करने लगा। तभी श्रीकृष्ण ने अपनी माया हटाई और सूर्य फिर दिखाई देने लगा।
अर्जुन ने ऐसे किया जयद्रथ का वध
भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर अर्जुन ने दिव्य बाण चलाकर जयद्रथ का सिर धड़ से अलग कर दिया। बाण सिर को उड़ाते हुए उसके पिता वृद्धक्षत्र की गोद में ले गया, जो तपस्या कर रहे थे।
पिता के वरदान से हुई मृत्यु
जब वृद्धक्षत्र अचानक उठे तो जयद्रथ का सिर उनकी गोद से जमीन पर गिर पड़ा। वरदान के प्रभाव से उसी क्षण वृद्धक्षत्र के सिर के भी सौ टुकड़े हो गए। इस प्रकार अर्जुन की प्रतिज्ञा पूरी हुई।
दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट