हमास प्रतिनिधि ने गाजा युद्धविराम पर नई वार्ता से किया इनकार, बोले- इस्राइल के साथ बात नहीं करेंगे…

हमास प्रतिनिधि ने गाजा युद्धविराम पर नई वार्ता से किया इनकार, बोले- इस्राइल के साथ बात नहीं करेंगे…

गाजा, 26 मई। इस्राइल के साथ नई वार्ता में शामिल होने की धारणा को हमास के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ओसामा हमदान ने खारिज कर दिया। साथ ही उन्होंने गाजा युद्धविराम के लिए वार्ता जैसी मीडिया रिपोर्टों का विरोध किया। सात महीनों से चल रहे इस्राइल और हमास युद्ध के विराम के लिए कई प्रयास हो रहे हैं।

इस महीने की शुरुआत में हमास ने कतर और मिस्र द्वारा मध्यस्थ्ता वाले युद्धविराम प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। हाल ही में ओसामा हमदान ने एक साक्षात्कार में बताया कि प्राथमिकता गाजा से इस्राइल की वापसी और सभी शत्रुता को समाप्त करने में निहित है। उन्होंने कहा कि हमें नई वार्ता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि हमास ने पहले ही युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार किया था, जिसे इस्राइल ने अस्वीकार कर दिया था।

इसके अलावा ओसामा ने इस्राइल द्वारा नए प्रस्तावों को स्वीकार करने की इच्छा के बारे में संदेह व्यक्त किया। उन्होंने पर्याप्त गारंटी के अभाव में इस्राइल को आक्रामकता को जारी रखने के लिए अलग से समय देने के खिलाफ चेतावनी दी।

इस्राइली मीडिया रिपोर्ट से पता चला कि पेरिस में मध्यस्थों के साथ चर्चा के बाद गाजा बंदी रिहाई समझौते के लिए बातचीत का नवीनीकरण किया जा रहा है। इस्राइली खुफिया प्रमुख डेविड बार्निया के सीआईए निदेशक बिल बर्न्स और कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी के साथ एक नए वार्ता ढांचे पर सहमति दी।

हमास अपने रुख पर अडिग रहा, वह अस्थायी युद्धविराम के बजाय शत्रुता को स्थाथी रूप से समाप्त करने पर जोर दे रहा है। इसके विपरीत, इस्राइल ने हमास के पूर्ण विद्यटन सहित अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने पर ही संघर्ष को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

फिर भी बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ते अलगाव ने इस्राल के लिए बड़ी चुनौतियां दी है। हाल ही में हुई घटनाएं जैसे कि राफा आक्रमण को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का आदेश और इस्राइली नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की कार्रवाई, बढ़ते राजनयिक गतिरोध को दर्शाती है। इसके अलावा आयरलैंड, नॉर्वे और स्पेन के फिलिस्तीन को मान्यता देने के फैसले इस्राइल की कूटनीतिक दुर्दशा को दर्शाते हैं।

दीदार ए हिन्द की रीपोर्ट

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